धार्मिक नगरी वाराणसी यानी काशी के विकास के पहिए अब और तेजी से घूमने वाले हैं। शहर के बुनियादी ढांचे को एक नया और आधुनिक आयाम देने वाली महत्वाकांक्षी एलिवेटेड कॉरिडोर परियोजना ने अपनी रफ्तार पकड़ ली है। लगभग 25 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार होने वाले इस 89 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर के निर्माण को लेकर तैयारियां अब बेहद निर्णायक चरण में पहुंच चुकी हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत पिछले दो महीनों से चल रहा गांवों का विस्तृत सर्वे का काम सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। इस सर्वे के दौरान कॉरिडोर के दायरे में आने वाली हर एक बारीकी, जमीन की स्थिति और प्रभावित होने वाली संपत्तियों का पूरा डेटा जुटा लिया गया है।
अक्तूबर में शासन को भेजी जाएगी फाइनल रिपोर्ट
सर्वे का काम पूरा होने के बाद अब प्रशासनिक अमला अगली कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा करने में जुट गया है। जमीनी स्तर पर जुटाए गए आंकड़ों के आधार पर अब संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी एनओसी और जरूरी अनुमतियां लेने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, सभी विभागों से औपचारिकताएं पूरी होते ही इस परियोजना की समग्र और फाइनल रिपोर्ट इसी साल अक्तूबर के महीने में शासन के पास भेज दी जाएगी। शासन स्तर पर इस पूरे प्रस्ताव का बारीकी से परीक्षण किया जाएगा और हरी झंडी मिलने के बाद निर्माण कार्यों की औपचारिक शुरुआत का रास्ता साफ हो जाएगा। फिलहाल इस पूरी परियोजना की गति विभिन्न विभागों से मिलने वाली एनओसी और शासन की अंतिम मुहर पर टिकी हुई है।
सर्वे में क्या-क्या जुटाया गया डेटा?
वाराणसी के आसपास के ग्रामीण इलाकों में किए गए इस व्यापक सर्वे में तकनीकी टीमों ने बेहद बारीकी से काम किया है। अधिकारियों ने बताया कि सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि इस विशाल परियोजना की जद में कौन-कौन सी जमीनें आ रही हैं, किस क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ेगा और वहां कौन-सी निजी या सार्वजनिक संपत्तियां मौजूद हैं। इन सभी अहम जानकारियों को संकलित करके एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। जब सभी संबंधित विभाग अपनी रिपोर्ट और एनओसी सौंप देंगे, तब एक मास्टर रिपोर्ट तैयार कर शासन के उच्चाधिकारियों के समक्ष पेश की जाएगी।
केंद्र सरकार से मिल चुकी है 25 हजार करोड़ की भारी-भरकम मंजूरी
इस मेगा प्रोजेक्ट के वित्तीय पहलुओं की बात करें तो केंद्र सरकार ने इस साल जुलाई में ही इस एलिवेटेड कॉरिडोर के लिए लगभग 25 हजार करोड़ रुपये के भारी बजट को अपनी मंजूरी दे दी थी। इस ड्रीम प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी एनएचएआई (NHAI) द्वारा हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) के तहत कराया जाएगा। इस मॉडल के जरिए निर्माण कार्य में गति और पारदर्शिता दोनों सुनिश्चित की जाती हैं। परियोजना के डिजाइन में केवल एक मुख्य एलिवेटेड मार्ग ही नहीं, बल्कि यातायात को पूरी तरह से सुगम बनाने के लिए कई अत्याधुनिक फ्लाईओवर, लूप, रैंप और लिंक रोड भी प्रस्तावित किए गए हैं, ताकि भविष्य में शहर के भीतर किसी भी तरह का ट्रैफिक जाम न लगे।
39 गांवों की भूमि पहले ही हो चुकी है चिह्नित
इस परियोजना की सुगबुगाहट काफी समय पहले शुरू हो गई थी। इससे पहले केंद्र सरकार के आधिकारिक राजपत्र (Gazette) में इस परियोजना के एक बड़े हिस्से के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर कुल 39 गांवों को पहले ही चिह्नित किया जा चुका है। इसके साथ ही, निर्माण कार्य को बिना किसी बाधा के तेजी से आगे बढ़ाने के लिए एनएचएआई की तरफ से पैकेजवार टेंडर यानी निविदा प्रक्रिया भी पहले ही शुरू की जा चुकी है। जैसे ही विभागीय एनओसी और शासन की औपचारिक स्वीकृति मिलेगी, वैसे ही ज़मीन पर निर्माण कार्यों की हलचल तेज हो जाएगी।
काशी के यातायात और व्यापार को मिलेगा ऐतिहासिक बूस्ट
यह एलिवेटेड कॉरिडोर केवल एक सड़क मार्ग नहीं है, बल्कि यह काशी के भविष्य के आर्थिक और सामाजिक विकास की रीढ़ बनने वाला है। इस परियोजना के पूरा हो जाने से वाराणसी आने वाले पर्यटकों, श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों को भयंकर ट्रैफिक जाम से मुक्ति मिलेगी। साथ ही, उत्तर प्रदेश के इस प्रमुख शहर से गुजरने वाले कमर्शियल ट्रैफिक को शहर के भीतर फंसे बिना ही आसानी से बायपास या मुख्य मार्गों से निकलने का रास्ता मिल जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस तरह के आधुनिक बुनियादी ढांचे से न केवल लॉजिस्टिक्स आसान होंगे, बल्कि स्थानीय व्यापार, पर्यटन और रोजगार के नए अवसरों के द्वार भी खुलेंगे।
फिलहाल, काशी के लोगों की निगाहें अक्तूबर के महीने पर टिकी हैं, जब यह पूरी रिपोर्ट शासन के पास पहुंचेगी। जैसे ही शासन स्तर से अंतिम मुहर लगेगी, वैसे ही इस 25 हजार करोड़ के ऐतिहासिक प्रोजेक्ट की नींव रखने की आधिकारिक घोषणा कर दी जाएगी।