बॉलीवुड गलियारों और देश भर की सुर्खियों में लंबे समय से चर्चा का विषय रहे दिशा सालियान मौत मामले में अब एक नया और बड़ा कानूनी मोड़ आ गया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की संदिग्ध मौत की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराने का स्पष्ट आदेश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने इस मामले में प्रासंगिक धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश जारी किए हैं, जिससे इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच में एक नया अध्याय शुरू हो गया है।
अदालत के इस फैसले से क्या बदलेगा?
सितंबर 2026 के इस बड़े घटनाक्रम ने एक बार फिर से उस दौर की यादों को ताजा कर दिया है जब सुशांत सिंह राजपूत और दिशा सालियान की मौतों ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। शुरुआती जांच में मुंबई पुलिस ने इस मामले को दुर्घटनावश मौत (Accidental Death) मानकर बंद कर दिया था, लेकिन परिवार और विभिन्न पक्षों द्वारा उठाए गए सवालों के बाद से ही लगातार इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष केंद्रीय एजेंसी से जांच की मांग की जा रही थी। अब बॉम्बे हाईकोर्ट का यह निर्देश उन तमाम अटकलों और मांगों पर मुहर लगाता नजर आ रहा है।
न्यायालय की यह औपचारिकता केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह उन अनसुलझे सवालों के जवाब तलाशने की दिशा में एक ठोस कदम है जो पिछले कई वर्षों से हवा में तैर रहे थे। अदालत ने माना है कि मामले की तह तक जाने के लिए एक स्वतंत्र एजेंसी की संलिप्तता आवश्यक है, ताकि जनता का न्याय व्यवस्था पर भरोसा और अधिक मजबूत हो सके।
क्या था पूरा मामला?
घटना की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो जून 2020 के शुरुआती दिनों में मुंबई के मलाड इलाके में एक ऊंची इमारत से गिरकर दिशा सालियान की रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। इस घटना के ठीक कुछ ही दिनों बाद, 14 जून 2020 को उनके करीबी और जाने-माने अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत अपने अपार्टमेंट में मृत पाए गए थे। इन दोनों घटनाओं के समय और परिस्थितियों के बीच एक गहरा संबंध जोड़ा जाने लगा था, जिसके कारण सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक में भारी उबाल देखा गया था।
भले ही मुंबई पुलिस ने अपनी शुरुआती रिपोर्ट में यह दावा किया था कि यह आत्महत्या का मामला था, लेकिन दिशा के माता-पिता और शुभचिंतकों ने हमेशा से इसमें किसी गहरी साजिश या अनहोनी की आशंका जताई थी। उनका तर्क था कि घटना की रात क्या हुआ था और वहां कौन-कौन मौजूद था, इन तमाम पहलुओं की गहराई से कभी जांच नहीं की गई।
CBI जांच से मिल सकते हैं नए सुराग
अब जबकि बॉम्बे हाईकोर्ट ने सीबीआई को इस मामले की कमान सौंपने का आदेश दिया है, तो यह उम्मीद की जा रही है कि एजेंसी उन सभी कड़ियों को आपस में जोड़ेगी जो अब तक गायब थीं।
- घटना की रात की परिस्थितियों का पुनर्निर्माण: सीबीआई उन सभी चश्मदीदों और लोगों से दोबारा पूछताछ कर सकती है जो उस रात दिशा के साथ पार्टी में या आसपास मौजूद थे।
- टेक्निकल सर्विलांस और डिजिटल साक्ष्य: कॉल रिकॉर्ड्स, चैट और डिलीट किए गए डेटा को रिकवर कर तकनीकी पहलुओं की नए सिरे से जांच होगी।
- पोस्टमॉर्टम और मेडिकल रिपोर्ट की समीक्षा: एम्स या अन्य शीर्ष मेडिकल संस्थानों के विशेषज्ञों की मदद से पुरानी मेडिकल रिपोर्ट्स का री-इवैल्यूएशन किया जा सकता है।
राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज
बॉम्बे हाईकोर्ट के इस आदेश के सामने आते ही महाराष्ट्र की राजनीति और बॉलीवुड हल्कों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। कई राजनीतिक नेताओं ने अदालत के इस फैसले का स्वागत किया है और उम्मीद जताई है कि अब दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। वहीं दूसरी ओर, आम जनता और सोशल मीडिया यूजर्स भी इस खबर के बाद लगातार अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। लोगों का मानना है कि सच चाहे जो भी हो, उसे सामने आना ही चाहिए ताकि मृत आत्मा को शांति मिल सके और परिवार को न्याय का अहसास हो सके।
आगे की कानूनी प्रक्रिया क्या होगी?
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद सीबीआई जल्द ही अपनी एक विशेष टीम का गठन करेगी। यह टीम मुंबई पहुंचकर सबसे पहले संबंधित पुलिस थानों से केस डायरी, दस्तावेज और अब तक जुटाए गए सबूतों को अपने कब्जे में लेगी। इसके बाद नए सिरे से एफआईआर दर्ज कर औपचारिक जांच का आगाज किया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया में कुछ समय लग सकता है, क्योंकि एजेंसी को ज़ीरो से शुरुआत करने के बजाय अब तक के सभी पहलुओं की नए सिरे से स्क्रूटनी करनी होगी।
यह देखना बेहद दिलचस्प और महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में इस हाई-प्रोफाइल मामले में सीबीआई को कौन-से नए और चौंकाने वाले तथ्य हाथ लगते हैं। देश की निगाहें अब पूरी तरह से केंद्रीय एजेंसी की आगामी कार्रवाई और इस पर आने वाले अपडेट्स पर टिकी हुई हैं।