भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की कानूनी मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां उनके राजनीतिक और खेल जगत के सफर पर इन मामलों का साया लंबे समय से बना हुआ है, वहीं अब न्याय की गुहार लगाते हुए महिला पहलवानों ने अदालत का रुख किया है। दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने इन महिला पहलवानों की याचिका पर सुनवाई करते हुए बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर को आधिकारिक तौर पर नोटिस जारी किया है। इस मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई आगामी 9 अक्टूबर को तय की गई है, जिस पर पूरे देश की निगाहें टिकी हुई हैं।
निचले फैसले के खिलाफ कोर्ट का दरवाजा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, महिला पहलवानों ने उस फैसले को चुनौती दी है जिसमें पहले बृजभूषण सिंह को राहत दी गई थी या उनके खिलाफ आरोपों की दिशा में कोर्ट का रुख कुछ नरम पड़ा था। पहलवानों का यह कदम यह साफ दर्शाता है कि वे इस कानूनी लड़ाई को किसी भी हाल में बीच में छोड़ने के मूड में नहीं हैं। न्याय पाने की उनकी यह जिद अब एक नया मोड़ ले चुकी है। राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज के समक्ष इस याचिका को रखा गया, जहां लंबी बहस के बाद अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया।
यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक खिलाड़ी का नहीं है, बल्कि देश के खेल प्रशासन, महिला सुरक्षा और न्याय व्यवस्था से जुड़ा हुआ एक संवेदनशील मुद्दा बन चुका है। जब पिछले दिनों इस मामले में राहत की खबरें आई थीं, तब देश भर के खेल प्रेमियों और खुद पीड़ित पहलवानों के खेमे में निराशा देखी गई थी। अब इस नई याचिका के बाद एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल मामले में कानूनी हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला और आगे क्या?
साल 2023 में देश की राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर देश के नामी-गिरामी पहलवानों ने अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू किया था। इन पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह पर गंभीर यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। इस विरोध प्रदर्शन ने न केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी थीं। खेल जगत से लेकर राजनीतिक गलियारों तक इस बात की चर्चा थी कि क्या देश के सर्वोच्च खेल महासंघों में बैठे लोग सुरक्षित हैं और क्या आम खिलाड़ियों की आवाज सुनी जा रही है।
इस पूरे प्रकरण के बाद दिल्ली पुलिस ने एसआईटी का गठन किया और लंबी जांच के बाद चार्जशीट दाखिल की गई। मामला अदालत तक पहुंचा जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं। अब चूंकि महिला पहलवानों ने अदालत के उस आदेश या निर्णय को चुनौती दी है जिससे वे असंतुष्ट थीं, तो कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि मामला एक बार फिर से गहन न्यायिक परीक्षण के दौर से गुजरेगा।
9 अक्टूबर की सुनवाई पर टिकी नजरें
अदालत द्वारा जारी किए गए नोटिस के जवाब में अब बृजभूषण सिंह और विनोद तोमर के वकीलों को अपना पक्ष रखना होगा। 9 अक्टूबर को होने वाली अगली सुनवाई बेहद अहम मानी जा रही है। इस दिन यह तय हो सकता है कि अदालत इस याचिका को किस दिशा में आगे बढ़ाती है और क्या पूर्व WFI प्रमुख को इस मामले में फिर से कड़ी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ेगा।
- याचिकाकर्ता: पीड़ित महिला पहलवान
- प्रतिवादी: बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर
- अदालत: दिल्ली की राउज़ एवेन्यू कोर्ट
- अगली सुनवाई की तारीख: 9 अक्टूबर
- मुख्य मुद्दा: पूर्व में आए फैसले के खिलाफ चुनौती और न्याय की मांग
खेल प्रेमियों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और आम जनता के बीच इस बात की उत्सुकता है कि क्या इस कानूनी दांव-पेच के जरिए पीड़ितों को वह न्याय मिल पाएगा जिसकी वे शुरुआत से मांग कर रहे हैं। इस मामले के हर एक पहलू पर मीडिया और न्यायविदों की पैनी नजर बनी हुई है। जैसे-जैसे 9 अक्टूबर की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक और खेल हलकों में सुगबुगाहट तेज होती जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और नए खुलासे या कानूनी मोड़ देखने को मिल सकते हैं।