इंडियन बैंक ने ईवी चार्जिंग स्टेशन के लिए 'इंड ग्रीन चार्ज' योजना शुरू की है। इसके तहत अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का ऋण मिलेगा। जानिए पात्रता और लक्ष्य।
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के बढ़ते चलन के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के इंडियन बैंक ने चार्जिंग कारोबार को बढ़ावा देने के लिए 'इंड ग्रीन चार्ज' नामक एक विशेष ऋण योजना शुरू की है। इस योजना का उद्देश्य देश भर में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग बुनियादी ढांचे का विस्तार करना और नए उद्यमियों को व्यवसाय के अवसर प्रदान करना है।
इंडियन बैंक द्वारा शुरू की गई इस नई ऋण योजना के तहत पात्र कारोबारियों और उद्यमियों को अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक का वित्तीय सहयोग मिल सकेगा। बैंक ने इस कर्ज की अधिकतम चुकौती अवधि 8 साल निर्धारित की है, जिससे उद्यमियों को अपने कारोबार को स्थापित करने और संचालित करने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
विभिन्न प्रकार के चार्जिंग स्टेशनों के लिए वित्तीय सहायता
यह योजना उद्यमियों की अलग-अलग व्यावसायिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। इसके तहत विभिन्न श्रेणियों में ऋण लिया जा सकता है:
- पब्लिक चार्जिंग स्टेशन: आम जनता और सभी ईवी चालकों के उपयोग के लिए सार्वजनिक स्थल पर चार्जिंग केंद्र स्थापित करना।
- प्राइवेट चार्जिंग स्टेशन: निजी उपयोग और सीमित दायरे में चार्जिंग की सुविधाएं तैयार करना।
- फ्लीट चार्जिंग स्टेशन: कैब, कमर्शियल डिलीवरी वाहन और अन्य व्यावसायिक वाहन बेड़ों (Fleets) के लिए विशेष चार्जिंग व्यवस्था।
- कारोबारी मॉडल: उद्यमी स्वतंत्र रूप से अपना ब्रांड बनाकर या किसी स्थापित फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत भी चार्जिंग स्टेशन स्थापित कर सकते हैं।
ऋण वितरण के लक्ष्य और व्यावसायिक योजना
इंडियन बैंक ने इस योजना के तहत चरणबद्ध तरीके से कर्ज बांटने का लक्ष्य तय किया है। बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (MD & CEO) बिनोद कुमार के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के बचे हुए पांच महीनों में इस योजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपये के ऋण वितरित करने का लक्ष्य है। इसके अलावा, अगले वित्त वर्ष में इस राशि को बढ़ाकर 250 करोड़ रुपये करने की योजना बनाई गई है। बैंक का मानना है कि यह पहल सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए नए रास्ते खोलेगी और चार्जिंग स्टेशनों के संचालन व रखरखाव से रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बाजार में ईवी और चार्जिंग स्टेशनों की बढ़ती मांग
देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की कुल बिक्री 29.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 26.59 लाख यूनिट पर पहुंच गई है। वाहनों की संख्या में इस तीव्र बढ़ोतरी के साथ ही चार्जिंग स्टेशनों की आवश्यकता भी तेजी से बढ़ी है। बाजार के अनुमानों के मुताबिक, भारत में ईवी चार्जिंग स्टेशन का बाजार वर्ष 2025 के 6,139 करोड़ रुपये से बढ़कर वर्ष 2030 तक 21,940 करोड़ रुपये तक पहुंचने की संभावना है।
बैंक प्रबंधन का मानना है कि इस क्षेत्र में वित्तपोषण व्यावसायिक रूप से बेहद व्यावहारिक और हरित वित्तपोषण (Green Financing) को बढ़ावा देने वाला है। हालांकि, इस कारोबार में उतरने से पहले उद्यमियों को उपयुक्त स्थान के चयन, बिजली कनेक्शन की उपलब्धता, आवश्यक उपकरणों, रखरखाव की लागत और स्थानीय बाजार की मांग का बारीकी से आकलन करने की सलाह दी गई है।