इन्वेस्ट इंडिया की एमडी और सीईओ निवृत्ती राय को ऑडिट और आंतरिक जांच के घेरे में रहने के बाद केवल छह महीने का अल्पकालिक अंतरिम विस्तार मिला है। उनका यह कार्यकाल जनवरी 2027 तक रहेगा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, आंतरिक समितियों और ऑडिटरों द्वारा विभिन्न फैसलों की जांच किए जाने के बीच यह फैसला लिया गया है। जुलाई 2023 में इंटेल इंडिया की पूर्व प्रमुख निवृत्ती राय को तीन साल के कार्यकाल के लिए इन्वेस्ट इंडिया का प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) नियुक्त किया गया था। उनसे पहले दीपक बागला ने वाणिज्य मंत्रालय द्वारा उनके कार्यकाल के तीखे ऑडिट के बाद पद छोड़ दिया था।
कंसल्टेंसी अनुबंध और प्रक्रिया पर उठे सवाल
निव्रत्ती राय के कार्यकाल के दौरान वैश्विक फर्म 'एटी किर्नी' (AT Kearney) को बिना दस्तावेजी मंजूरी के 14.16 करोड़ रुपये का संगठनात्मक पुनर्गठन अनुबंध देने को लेकर विवाद खड़ा हुआ। रिकॉर्ड बताते हैं कि अप्रैल 2024 में इन्वेस्ट इंडिया के बोर्ड को सूचित किया गया था कि वाणिज्य मंत्रालय के अधीन वित्तीय oversight समिति (FOC) ने 11 अक्टूबर 2023 को इस प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। हालांकि, उस FOC बैठक के मिनट्स में किसी भी मंजूरी का जिक्र नहीं है, बल्कि समिति ने पुनर्गठन अभ्यास की आवश्यकता, औचित्य और दायरे पर चिंता जताई थी।
निव्रत्ती राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि एटी किर्नी को सभी प्रक्रियाओं और 14 नवंबर 2023 को FOC से ईमेल के जरिए मिली आवश्यक स्वीकृतियों के बाद ही काम पर रखा गया था। हालांकि, FOC की पूछताछ पर इन्वेस्ट इंडिया के ईमेल जवाब में ऐसी किसी मंजूरी का उल्लेख नहीं मिलता है। बाद में, वाणिज्य मंत्रालय के एक अतिरिक्त सचिव और FOC अध्यक्ष ने एटी किर्नी के अनुबंध को छह महीने के लिए 26 करोड़ रुपये से अधिक करों पर बढ़ाने के प्रस्ताव की समीक्षा की और अगस्त 2024 की अपनी रिपोर्ट में विस्तार की आवश्यकता, स्पष्ट रूप से मापने योग्य परिणामों की कमी और लागत अनुमानों पर सवाल उठाए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि पहले दौर में एटी किर्नी को मनोनयन आधार पर रखने के लिए सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी की कोई जानकारी नहीं दी गई थी।
वेतन और कर कटौती से जुड़े नियम
दिसंबर 2024 में एक स्वतंत्र ऑडिटर की रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि निवृत्ती राय कर्मचारी के बजाय एक सलाहकार के रूप में लागू कर कटौतियों के साथ अपना पारिश्रमिक निकाल रही थीं। रिपोर्ट ने प्रबंधन से वित्तीय विवरणों में इसे सुधारने और संबंधित कर देनदारियों का पालन करने को कहा था। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि इस विसंगति को पहचानते हुए प्रबंधन ने नियमों का पूर्ण पालन सुनिश्चित करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें एक कर्मचारी के रूप में पुनर्वर्गीकृत कर दिया।
इस पर निवृत्ती राय ने कहा कि उन्होंने लागू ब्याज के साथ सभी बकाया करों का भुगतान कर दिया है, जबकि इन्वेस्ट इंडिया ने अपनी त्रुटियों के लिए जुर्माने का भुगतान किया है। रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि उन्होंने कम से कम अक्टूबर 2024 तक एक सलाहकार के रूप में वेतन निकालने के लिए वाउचर जमा किए थे। इस संबंध में उनका कहना था कि उन्होंने उस अवधि के दौरान जो निर्देश मिले, उनका पालन किया।
इन्वेस्ट इंडिया की पृष्ठभूमि
इन्वेस्ट इंडिया 2009 में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के तहत स्थापित एक गैर-लाभकारी कंपनी है, जिसकी देखरेख वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) द्वारा की जाती है। इस पूरे घटनाक्रम पर DPIIT की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है, जबकि सरकार के उच्च स्तर पर मामले की समीक्षा जारी है।