महाराष्ट्र में बढ़ते सूखे के बीच राकांपा प्रमुख शरद पवार सोलापुर और धाराशिव का दौरा करेंगे। किसानों के लिए पानी और चारे की मांग उठाई है।
महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच राकांपा (शरद गुट) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार सोलापुर तथा आसपास के सूखा प्रभावित इलाकों का दौरा करने निकल रहे हैं। इस दौरान वे किसानों और ग्रामीण जनता की समस्याओं को नजदीक से समझेंगे तथा पेयजल व पशुओं के चारे की व्यवस्था को प्राथमिकता देने की मांग करेंगे।
पुणे में मीडिया से बातचीत के दौरान शरद पवार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर केंद्र सरकार को भी घेरा। उन्होंने कहा कि इस विषय पर केंद्र की ओर से अब तक कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है, जिसके चलते दिल्ली में विपक्षी दल एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस राष्ट्रीय राजनीतिक घटनाक्रम के साथ-साथ उनका तात्कालिक और मुख्य ध्यान महाराष्ट्र के सूखे से जूझ रहे किसानों और उनकी बुनियादी जरूरतों पर है।
सोलापुर और माढा तहसील में गहराया जल संकट
महाराष्ट्र के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है। इंसानों के लिए पीने के पानी के साथ-साथ मवेशियों के चारे का संकट भी गहराता जा रहा है। इस स्थिति का जायजा लेने के लिए शरद पवार सोमवार को निर्धारित दौरों पर रहेंगे। वे सोलापुर जिले की माढा तहसील के दुधाली और तुलशी गांव के अलावा भूम-परांडा और धाराशिव (उस्मानाबाद) क्षेत्रों का दौरा करेंगे। उनके साथ स्थानीय विधायक भी मौजूद रहेंगे, जो प्रशासनिक और जमीनी स्थिति की जानकारी देंगे।
प्रशासनिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल सोलापुर जिले के 139 गांवों में हालात से निपटने के लिए 135 टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है। अकेले माढा तहसील में ही 110 टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है। ये आंकड़े इस क्षेत्र में पानी की भारी किल्लत और सूखे की गंभीरता को स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं। पवार ने कहा कि वे प्रभावित लोगों से सीधे मुलाकात कर उनकी जरूरतें जानेंगे और प्रशासन के माध्यम से आवश्यक सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे। इस संबंध में उनकी दिल्ली के साथ-साथ राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री के साथ भी चर्चा हो चुकी है।
उजनी एआई डेटा सेंटर और जल संसाधन का मुद्दा
दौरे और सूखे की चर्चा के दौरान शरद पवार ने उजनी में प्रस्तावित एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) डेटा सेंटर परियोजना को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में एआई परियोजना आने का यह मतलब नहीं है कि सारा पानी खत्म हो जाएगा, लेकिन यह अत्यंत आवश्यक है कि उपलब्ध जल संसाधनों का बहुत ही सावधानी और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल किया जाए ताकि कृषि और उद्योग दोनों की जरूरतें संतुलित बनी रहें।
वर्तमान परिस्थितियों में शरद पवार का यह दौरा ग्रामीण इलाकों में प्रशासनिक मदद तेज करने और किसानों की आवाज को प्रमुखता से उठाने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सूखे के इस संकट के बीच पेयजल और चारे की उपलब्धता सुनिश्चित करना इस समय सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है।