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चंदौली में सरकारी लापरवाही: ब्लॉक ऑफिस के बगल में ही बंद मिला आंगनबाड़ी केंद्र

चंदौली में सरकारी लापरवाही: ब्लॉक ऑफिस के बगल में ही बंद मिला आंगनबाड़ी केंद्र

चंदौली में सरकारी सिस्टम पर सवाल: ब्लॉक दफ्तर के बगल में ही 'ताले' में कैद आंगनबाड़ी

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो सरकारी व्यवस्था की पोल खोलने के लिए काफी है। शहाबगंज विकासखंड के अरारी गांव में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र, जो खुद ब्लॉक कार्यालय के बेहद करीब है, वहां की कार्यप्रणाली पर अब बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। बुधवार को जब यह केंद्र निर्धारित समय से काफी पहले ही बंद मिला, तो ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया।

नियमों की सरेआम अनदेखी, ताले में लटका भविष्य

सरकारी नियमों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक अनिवार्य है। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य बच्चों को पोषणयुक्त आहार और प्रारंभिक शिक्षा प्रदान करना है। लेकिन अरारी गांव की स्थिति कुछ और ही बयां कर रही थी। निर्धारित समय से पहले ही केंद्र पर ताला जड़ दिया गया था। सबसे हैरानी की बात यह है कि केंद्र के बरामदे में गांव के लोगों की चारपाई रखी हुई पाई गई, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकारी भवन का उपयोग निजी हितों के लिए किया जा रहा है।

ग्रामीणों का आक्रोश: बच्चों के पोषण और शिक्षा से खिलवाड़ क्यों?

इस लापरवाही को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार इन केंद्रों पर लाखों रुपये खर्च करती है ताकि गरीब परिवारों के बच्चों को बेहतर पोषण मिल सके। लेकिन, केंद्र का समय से पहले बंद होना और वहां निजी सामान का कब्जा होना सीधे तौर पर शासन के निर्देशों की धज्जियां उड़ाने जैसा है।

  • समय की पाबंदी का उल्लंघन: दोपहर 12 बजे से पहले ही केंद्र बंद कर दिया गया।
  • सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग: बरामदे में चारपाई का मिलना सरकारी भवन के निजी इस्तेमाल को दर्शाता है।
  • जिम्मेदारी का अभाव: ब्लॉक कार्यालय के पास होने के बावजूद किसी अधिकारी की नजर इस पर नहीं पड़ी।

सीडीपीओ ने दी सफाई, लेकिन सवाल अब भी बरकरार

जब इस मामले में शहाबगंज के सीडीपीओ आनंद सिंह से संपर्क किया गया, तो उन्होंने अपना बचाव करते हुए 'आवश्यक सरकारी कार्य' का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि कार्यालय में कुछ जरूरी काम होने के कारण केंद्र को थोड़ा पहले बंद करना पड़ा। हालांकि, यह तर्क ग्रामीणों को संतुष्ट करने के लिए काफी नहीं है।

'अगर केंद्र बंद करना ही था, तो इसकी जानकारी अभिभावकों को क्यों नहीं दी गई? और सरकारी भवन के बरामदे में चारपाई रखने की इजाजत किसने दी?' - स्थानीय निवासी

सुधार की जरूरत: क्या सिर्फ कागजी कार्रवाई से चलेगा सिस्टम?

यह मामला केवल एक आंगनबाड़ी केंद्र का नहीं है, बल्कि यह उस निगरानी तंत्र पर भी सवाल उठाता है जो इन केंद्रों के संचालन की जिम्मेदारी संभालता है। यदि ब्लॉक दफ्तर के नाक के नीचे ऐसी लापरवाही हो रही है, तो सुदूरवर्ती क्षेत्रों में क्या हाल होगा, यह सहज ही समझा जा सकता है। ग्रामीणों ने अब उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. आंगनबाड़ी केंद्र का निर्धारित समय क्या है?

सरकारी आदेशों के अनुसार, आंगनबाड़ी केंद्रों को सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक संचालित करना अनिवार्य है।

2. यदि केंद्र समय से पहले बंद मिले, तो शिकायत कहां करें?

ऐसी स्थिति में आप अपने क्षेत्र के बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) या जिला कार्यक्रम अधिकारी (DPO) के कार्यालय में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

3. सरकारी भवन में निजी सामान रखना क्या कानूनी अपराध है?

जी हां, सरकारी संपत्ति का उपयोग निजी कार्यों के लिए करना नियमों के विरुद्ध है और इसके लिए संबंधित कर्मचारी पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है।

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तनु उपाध्याय

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Senior Sub Editor

तनु उपाध्याय एंटरटेनमेंट जगत की हलचल को करीब से समझती हैं और उसे दर्शकों के सामने आकर्षक अंदाज में पेश करती हैं। फिल्मों, टीवी, ओटीटी और वायरल ट्रे...

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