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चंदौली में अनोखे अंदाज में मना विश्व आदिवासी दिवस, प्रकृति रक्षा का संकल्प

चंदौली में अनोखे अंदाज में मना विश्व आदिवासी दिवस, प्रकृति रक्षा का संकल्प

क्या आप जानते हैं कि हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच का रिश्ता कितना गहरा है? इसी अटूट रिश्ते को मजबूती देने और अपनी समृद्ध विरासत को याद करने के लिए हर साल की तरह इस बार भी विश्व आदिवासी दिवस पर देश भर में विशेष आयोजन किए गए। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक बेहद प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है, जहाँ प्रकृति की रक्षा का संकल्प लेते हुए अनूठे अंदाज में यह दिवस मनाया गया।

महर्षि वेद व्यास मंदिर परिसर में गूंजा प्रकृति संरक्षण का संदेश

दिनांक 09 अगस्त 2026 को चंदौली के प्रसिद्ध महर्षि वेद व्यास मंदिर परिसर में आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा हुए और एक शानदार मिसाल पेश की। इस भव्य कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव आलोक कुमार गोंड और जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार गोंड के नेतृत्व में हुई। इस दौरान स्थानीय लोगों और पार्टी पदाधिकारियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और समाज के उत्थान के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का दृढ़ संकल्प लिया।

कार्यक्रम के दौरान प्रमुख वक्ताओं ने अपने संबोधन में साफ कहा कि जल, जंगल और जमीन ही आदिवासी अस्मिता की असली पहचान हैं। आज के समय में इन तीनों को बचाए रखना केवल आदिवासियों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी मानवता के अस्तित्व के लिए सबसे बड़ी जरूरत बन चुका है।

वृक्षारोपण और मुंह मीठा कर बांटी गई खुशियां

इस बार के आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसे केवल कागजी औपचारिकताओं तक सीमित नहीं रखा गया, बल्कि पूरी तरह से धरातल पर उतारा गया। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मिलकर मंदिर परिसर में विभिन्न जीवनदायिनी प्रजाति के पौधे रोपे।

  • पर्यावरण की सुरक्षा: लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने और उन्हें पेड़ बनने तक सींचने का संकल्प लिया गया।
  • सामूहिक भागीदारी: इस आयोजन में गाँव के युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई।
  • मिठाई वितरण: सफल वृक्षारोपण के बाद उपस्थित सभी लोगों को मिठाई बांटकर विश्व आदिवासी दिवस की बधाइयां दी गईं और उत्सव मनाया गया।

इस अवसर पर तहसील अध्यक्ष संदीप कुमार गोंड, ओमप्रकाश गोंड, ब्लॉक अध्यक्ष प्रदीप कुमार गोंड, और विवेक कुमार गोंड सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में समाज के संवैधानिक अधिकारों और पर्यावरण के प्रति अपने कर्तव्यों पर विशेष जोर दिया।

क्यों खास है यह पहल?

आज के दौर में जब ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन जैसी भयंकर समस्याएं विकराल रूप लेती जा रही हैं, ऐसे में स्थानीय स्तर पर इस तरह के कार्यक्रम समाज को एक सकारात्मक दिशा दिखाते हैं। आदिवासी समुदाय सदियों से प्रकृति को पूजता आया है और पेड़-पौधों को अपने परिवार का हिस्सा मानता है। चंदौली के इस आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि संस्कृति और प्रकृति का बंधन आज भी उतना ही मजबूत है जितना पहले हुआ करता था।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: विश्व आदिवासी दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर: हर साल 9 अगस्त को पूरी दुनिया में विश्व आदिवासी दिवस (International Day of the World's Indigenous Peoples) मनाया जाता है।

Q2: चंदौली में यह कार्यक्रम कहाँ आयोजित किया गया था?

उत्तर: यह कार्यक्रम चंदौली के प्रसिद्ध महर्षि वेद व्यास मंदिर परिसर में आयोजित किया गया था।

Q3: इस कार्यक्रम के मुख्य आयोजक कौन थे?

उत्तर: इस कार्यक्रम का आयोजन आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव आलोक कुमार गोंड और जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार गोंड के नेतृत्व में किया गया था।

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अल्का सिंह

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Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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