गांवों की तस्वीर तभी बदलती है जब नागरिक हक के लिए आवाज उठाएं और प्रशासन बिना देर किए एक्शन मोड में आ जाए। उत्तर प्रदेश के नियंताबाद ब्लॉक स्थित ग्राम सभा चौरहट में ऐसा ही एक उम्दा उदाहरण देखने को मिला है। यहां एक शिकायत पर प्रशासनिक अमले ने ऐसी फुर्ती दिखाई कि कुछ ही घंटों में गंदगी से पटी गलियों की नुहार बदल गई।
किस बात को लेकर परेशान थे ग्रामीण?
चौरहट की पुरानी बस्ती में पिछले कुछ दिनों से नालियां चोक थीं और रास्तों पर कचरे का ढेर लगा हुआ था। सबसे ज्यादा खस्ताहाल स्थिति इन तीन मुख्य जगहों पर थी:
- प्राथमिक विद्यालय के पीछे वाली गली: जहां से रोज छोटे-छोटे बच्चे स्कूल गुजरते हैं।
- मेडिकल स्टोर वाली गली: जहां दवा लेने आने वाले मरीजों को बदबू और गंदगी का सामना करना पड़ रहा था।
- हसीन पान वाले की गली: घनी आबादी वाला क्षेत्र होने के कारण यहां संक्रामक बीमारियों का डर सबसे अधिक था।
मौसम के इस बदलाव में गांव में डेंगू, मलेरिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का खौफ पसर रहा था। ग्रामीणों की इस समस्या को देखते हुए राष्ट्रीय सचिव श्री नसीम अहमद ने तुरंत मोर्चा संभाला और एडीओ (ADO) पंचायत से संपर्क कर त्वरित कार्रवाई की मांग की।
एडीओ पंचायत का निर्देश और 'युद्ध स्तर' पर सफाई
शिकायत मिलते ही पंचायत प्रशासन हरकत में आया। एडीओ पंचायत ने बिना किसी नौकरशाही देरी के सफाई कर्मियों की विशेष टीम को तुरंत मौके पर रवाना किया।
“गांवों में जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जहां भी सफाई की समस्या होगी, वहां प्राथमिकता के आधार पर त्वरित कार्रवाई होगी।” — पंचायत प्रशासन
टीम ने गांव पहुंचते ही मोर्चा संभाला और नालियों की सिल्ट निकालने के साथ-साथ पूरी बस्ती में सैनिटाइजेशन और चूने का छिड़काव कराया। देखते ही देखते गंदगी से पटी गलियां पूरी तरह चकाचक हो गईं।
बीमारियों के खतरे से मिली बड़ी राहत
समय रहते हुई इस सफाई से गांव के बच्चों और बुजुर्गों ने सबसे ज्यादा राहत की सांस ली है। गंदगी हटने से न केवल आवागमन सुगम हुआ है, बल्कि पनप रहे मच्छरों और बैक्टीरिया का खतरा भी टल गया है।
आगे की राह: ग्रामीणों से भी सहयोग की अपील
सफाई अभियान पूरा होने के बाद राष्ट्रीय सचिव नसीम अहमद और स्थानीय प्रबुद्धजनों ने एडीओ पंचायत व सफाई कर्मियों की तत्परता की खुलकर तारीफ की। इसके साथ ही ग्रामीणों से भी एक भावुक अपील की गई है कि वे नालियों में प्लास्टिक या सूखा कचरा न बहाएं। आखिर गांव को स्वच्छ रखना सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी साझी जिम्मेदारी है।