छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में प्रशासनिक व्यवस्थाओं को और अधिक पारदर्शी और पुख्ता बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। जिले की कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने सोमवार, 05 अक्टूबर 2026 को जिला मुख्यालय स्थित जिला कोषालय के स्ट्रांग रूम का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने छत्तीसगढ़ कोषालय संहिता के सहायक नियम-39 के तहत निर्धारित प्रावधानों का सख्ती से पालन सुनिश्चित कराते हुए स्ट्रांग रूम के भीतर रखी गई तमाम महत्वपूर्ण और बहुमूल्य सामग्रियों का बारीकी से भौतिक सत्यापन किया।
कड़े सुरक्षा घेरे के बीच हुआ दस्तावेजों और सामग्रियों का मिलान
प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने स्ट्रांग रूम के अंदर पहुंचकर एक-एक संधारित पेटियों और पैकेटों की जांच की। इस औचक निरीक्षण के दौरान सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा गया। कलेक्टर ने मुख्य रूप से अदालती एवं गैर-अदालती मुद्रांक (Court and Non-Court Stamps), कोर्ट फीस कॉपिंग टिकट, नोटरियल टिकट, रेवेन्यू टिकट और स्पेशल एडहेसिव स्टाम्प जैसी बेहद संवेदनशील और बहुमूल्य सामग्रियों के पैकेटों की खुद जांच की।
महत्वपूर्ण बात यह रही कि कलेक्टर ने केवल पैकेटों को देखकर औपचारिकता पूरी नहीं की, बल्कि कोषालय में संधारित आधिकारिक पंजियों (Registers) में दर्ज विवरण से इनका भौतिक मिलान भी कराया। स्टॉक रजिस्टर में दर्ज आंकड़ों और वास्तविक सामग्रियों की संख्या में पूरी तरह से समानता पाई गई, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली में सटीकता का पता चलता है।
कोषालय अधिकारी से ली विभागीय कार्यप्रणाली की जानकारी
भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने जिला कोषालय अधिकारी दशरथ प्रसाद सोनी से लंबी चर्चा की। इस दौरान उन्होंने जिले के कोषालय से जुड़े तमाम वित्तीय कामकाज, विभागीय कार्यप्रणाली और वर्तमान व्यवस्थाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। कलेक्टर ने कोषालय अधिकारी से यह भी जाना कि भविष्य की जरूरतों के लिहाज से सुरक्षा और रख-रखाव के पुख्ता इंतजाम किस स्तर पर किए जा रहे हैं।
सुरक्षा और रख-रखाव को लेकर दिए गए सख्त निर्देश
निरीक्षण के अंत में कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट शब्दों में निर्देशित किया कि सरकारी अभिलेखों और बहुमूल्य सामग्रियों के सुरक्षित रख-रखाव में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने विशेष तौर पर निम्नलिखित बिंदुओं पर जोर दिया:
- अभिलेखों का सही संधारण: सभी पंजियों और डिजिटल रिकॉर्ड्स को समय पर अपडेट रखा जाए।
- सुरक्षा मानकों का पालन: स्ट्रांग रूम के भीतर और बाहर सुरक्षा के सभी नियमों का कड़ाई से पालन हो।
- नियमित मॉनिटरिंग: उच्च अधिकारियों द्वारा समय-समय पर आंतरिक निरीक्षण किया जाता रहे ताकि किसी भी संभावित त्रुटि से बचा जा सके।
- सामग्रियों की सुरक्षा: नमी या अन्य कारणों से स्टाम्प और टिकटों को बचाने के लिए उचित पर्यावरणीय नियंत्रण बनाए रखें।
मौजूद रहे जिले के अन्य प्रमुख अधिकारी
इस उच्च स्तरीय निरीक्षण के दौरान जिला कोषालय के कई अन्य जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे। सभी ने कलेक्टर के निर्देशों को गंभीरता से नोट किया और भविष्य में भी पूरी पारदर्शिता के साथ काम करने का भरोसा दिलाया। प्रशासनिक हलकों में इस औचक निरीक्षण को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे शासकीय कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा मिलता है।
इस प्रकार के औचक निरीक्षण न केवल प्रशासनिक अमले को सतर्क रखते हैं, बल्कि वित्तीय संस्थानों और कोषालयों में सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद बनाने में मददगार साबित होते हैं। बलरामपुर जिला प्रशासन की इस सक्रियता से यह साफ है कि क्षेत्रीय विकास और प्रशासनिक कसावट के मामले में किसी भी तरह की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी।