बीसीसीआई के नए मुख्य चयनकर्ता की दौड़ में रमेश पोवार मजबूत दावेदार के रूप में उभरे हैं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) में अजीत अगरकर का कार्यकाल समाप्त होने के बाद से नए मुख्य चयनकर्ता के उत्तराधिकारी की तलाश तेजी से चल रही है। पश्चिम क्षेत्र के चयनकर्ता पद के लिए आवेदन की निर्धारित समय-सीमा अब समाप्त हो चुकी है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में कई बड़े घटनाक्रम सामने आए हैं, जिसमें पूर्व खिलाड़ियों के रुख और बोर्ड की भविष्य की रणनीतियों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
पार्थिव पटेल ने क्यों नहीं किया आवेदन?
शुरुआती दौर में इस दौड़ के लिए पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज पार्थिव पटेल का नाम काफी आगे चल रहा था। हालांकि, अंतिम समय में उन्होंने इस पद के लिए आवेदन नहीं किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पार्थिव पटेल के इस फैसले के पीछे भारतीय क्रिकेट में वीवीएस लक्ष्मण का बढ़ता प्रभाव एक मुख्य वजह माना जा रहा है। हाल ही में बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने स्पष्ट किया था कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (COE) के प्रमुख होने के नाते लक्ष्मण चयन समिति की सभी बैठकों में अनिवार्य रूप से हिस्सा लेंगे। इसी प्रशासनिक ढांचे के कारण कुछ दिग्गजों ने इस पद से दूरी बनाए रखी है।
रमेश पोवार बन सकते हैं नए वरिष्ठ चयनकर्ता
पार्थिव पटेल के मैदान से हटने के बाद अब पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, रमेश पोवार जो पहले जूनियर पुरुष चयन समिति का अध्यक्ष बनने की दौड़ में शामिल थे, अब वरिष्ठ चयनकर्ता पद के लिए एक मजबूत दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। इसके साथ ही, यदि नए पूर्णकालिक अध्यक्ष की नियुक्ति पर सहमति नहीं बनती है, तो प्रज्ञान ओझा अंतरिम अध्यक्ष के रूप में अपनी भूमिका जारी रख सकते हैं।
बजट में बढ़ोतरी और दिग्गजों द्वारा प्रस्ताव ठुकराना
भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने चयन समिति को आर्थिक रूप से और अधिक मजबूत बनाने के लिए अपने बजट में भारी बढ़ोतरी की है। पूर्व खिलाड़ियों आरपी सिंह और प्रज्ञान ओझा के समिति में शामिल होने के बाद इस बजट को बढ़ाकर 17.45 करोड़ रुपये किया गया था, जिसे अब आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बढ़ाकर 19.35 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके बावजूद, बोर्ड के सामने चुनौतियां कम नहीं हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, बीसीसीआई ने लगभग 100 टेस्ट मैच खेल चुके दो पूर्व दिग्गज भारतीय क्रिकेटरों से भी इस पद को संभालने के लिए संपर्क साधा था, लेकिन दोनों ने ही इस बड़े प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।
अजीत अगरकर को लेकर क्या थी बोर्ड की योजना?
बोर्ड की मूल योजना यह थी कि अजीत अगरकर साल 2027 के पुरुष वनडे विश्व कप तक मुख्य चयनकर्ता के पद पर बने रहें, ताकि टीम के चयन और दीर्घकालिक रणनीतियों में निरंतरता और स्थिरता बनी रहे, लेकिन किन्हीं कारणों से यह योजना पूरी नहीं हो सकी। अब चूंकि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख के रूप में वीवीएस लक्ष्मण की भूमिका लगातार विस्तारित हो रही है, ऐसे में क्रिकेट हलकों में यह चर्चा भी है कि बोर्ड बड़े बदलावों के बजाय मौजूदा अंतरिम व्यवस्था और संतुलन को ही कुछ समय के लिए आगे बढ़ाने पर विचार कर सकता है।