उच्च शिक्षा विभाग ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए उठाए कड़े कदम
छत्तीसगढ़ के सरकारी कालेजों में शिक्षण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाने के लिए राज्य शासन ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। इसके तहत अब शासकीय महाविद्यालयों में सेवाएं दे रहे अतिथि व्याख्याताओं (Guest Lecturers) की उपस्थिति बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से दर्ज की जाएगी। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से इस संबंध में स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि कालेजों में व्याख्याताओं की नियमित उपस्थिति और कार्यप्रणाली की सटीक मॉनिटरिंग की जा सके।
राज्य के सरकारी कालेजों में लंबे समय से अतिथि व्याख्याताओं की सेवाएं ली जाती रही हैं, जो नियमित शिक्षकों के रिक्त पदों के विरुद्ध विद्यार्थियों की पढ़ाई सुचारू रखते हैं। अभी तक कई कालेजों में उपस्थिति दर्ज करने की पारंपरिक व्यवस्था थी, जिसमें पारदर्शिता और निगरानी को लेकर प्रशासनिक स्तर पर चुनौतियां सामने आती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कालेजों में अतिथि व्याख्याताओं के आगमन और प्रस्थान का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।
रोजाना के आधार पर मिलेगा मानदेय का भुगतान
इस नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ ही अतिथि व्याख्याताओं के मानदेय भुगतान की प्रक्रिया को भी स्पष्ट किया गया है। तय किए गए नियमों के अनुसार, अतिथि प्रवक्ताओं को उनके कार्य दिवसों और बायोमेट्रिक मशीन में दर्ज उपस्थिति के आधार पर रोजाना का मानदेय प्रदान किया जाएगा। इससे मानदेय गणना में आने वाली विसंगतियों पर रोक लगेगी और कार्य के घंटों व दिनों के हिसाब से पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित हो सकेगा।
विभाग का मानना है कि इस कदम से न केवल कालेजों में शैक्षणिक अनुशासन मजबूत होगा, बल्कि विद्यार्थियों को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। अतिथि व्याख्याताओं की समय पर उपस्थिति से कक्षाओं का संचालन तय समय सारणी के अनुसार हो सकेगा, जिससे पाठ्यक्रम समय पर पूरे किए जा सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सभी संबंधित महाविद्यालयों के प्राचार्यों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।