याचिका पर केंद्र सरकार, पेट्रोलियम बोर्ड और सरकारी तेल कंपनियों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह में मांगा गया जवाब
घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर की बुकिंग और सब्सिडी के वितरण के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य बनाने के सरकार के निर्णय को कानूनी चुनौती दी गई है। इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने हस्तक्षेप करते हुए केंद्र सरकार, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (PNGRB) और सरकारी तेल विपणन कंपनियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने संबंधित पक्षों को निर्देश दिया है कि वे आगामी दो सप्ताह के भीतर अपना आधिकारिक जवाब दाखिल करें।
बुजुर्गों और दिव्यांगों की परेशानियों का उठाया गया मुद्दा
उच्च न्यायालय में दायर की गई याचिका में यह मुख्य रूप से तर्क दिया गया है कि बायोमेट्रिक सत्यापन की यह अनिवार्यता समाज के कई संवेदनशील वर्गों के लिए भारी असुविधा का कारण बन सकती है। याचिकाकर्ता के अनुसार, इस नए नियम के लागू होने से विशेष तौर पर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा ऐसे उपभोक्ताओं को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जो तकनीकी कारणों या शारीरिक असमर्थता के चलते अपना बायोमेट्रिक सत्यापन सफलताપૂર્વક पूरा नहीं करा पा रहे हैं।
प्रशासनिक और व्यावहारिक पक्ष
सार्वजनिक वितरण प्रणाली और गैस सब्सिडी वितरण प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा बिचौलियों एवं फर्जी लाभार्थियों को रोकने के उद्देश्य से सरकार समय-समय पर तकनीकी सुधारों और सत्यापन के नए तरीके अपनाती रही है। हालांकि, दूसरी ओर नागरिक अधिकारों और कल्याणकारी योजनाओं तक सहज पहुंच के पैरोकारों का मानना है कि तकनीकी प्रकियाओं को अनिवार्य बनाते समय उन लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था होना आवश्यक है जो किन्हीं कारणों से बायोमेट्रिक मशीनों पर अपनी पहचान सत्यापित करने में असमर्थ रहते हैं। इस याचिका पर अगली सुनवाई दोनों पक्षों के जवाब सामने आने के बाद तय होगी।