छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले से एक बेहद दुखद और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। जिले के चांपा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम उच्चभिट्ठी में जमीन के छोटे से टुकड़े के बंटवारे को लेकर उपजा विवाद इतना बढ़ गया कि एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया और एक बुजुर्ग को अपनी जान गंवानी पड़ी। मामूली बात पर शुरू हुई तनातनी ने चंद मिनटों में खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित और सख्त कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी को दबोच लिया है और उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।
जमीन के टुकड़े ने ली बुजुर्ग की जान
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम उच्चभिट्ठी में लगभग 9 डिसमिल जमीन पर एक मकान बना हुआ है। इसी जमीन और मकान के मालिकाना हक तथा बंटवारे को लेकर लोचन प्रसाद यादव, गोपी यादव और भरत यादव के परिवारों के बीच लंबे समय से अनबन और विवाद चल रहा था। सोमवार, 05 अक्टूबर 2026 को यह विवाद उस वक्त अपनी चरम सीमा पर पहुंच गया जब स्थिति ने हिंसक मोड़ ले लिया। परिवारों के बीच आपसी कलह और रंजिश ने एक बुजुर्ग की जिंदगी को हमेशा के लिए छीन लिया।
घटना के दिन, आरोपी राजकिरण यादव (उम्र 23 वर्ष) आवेश में आकर रमेश यादव के घर में जबरन घुस गया। उसके हाथ में एक धारदार स्टील का ब्लेड भी था। घर के भीतर पहुंचते ही आरोपी ने न केवल गाली-गलौज शुरू कर दी, बल्कि वहां मौजूद सदस्यों को जान से मारने की धमकियां भी देने लगा। इस आक्रामक रवैये से घर में अफरा-तफरी मच गई।
बीच-बचाव करना पड़ा भारी
विवाद जब मारपीट तक पहुंच गया और आरोपी रमेश यादव के साथ हाथापाई करने लगा, तो घर में मौजूद बुजुर्ग लोचन प्रसाद यादव से अपने बेटे पर हो रहा हमला देखा नहीं गया। वह फौरन अपनी जगह से उठे और बीच-बचाव करने के लिए आगे आए। उनका मकसद केवल दोनों पक्षों को शांत कराना और लड़ाई को रोकना था। लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह नेकनीयती उनके लिए आखिरी साबित होगी।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जब लोचन प्रसाद यादव बीच-बचाव करने पहुंचे, तो गुस्से में अंधे हो चुके आरोपी राजकिरण यादव ने आव देखा न ताव, और बुजुर्ग के सीने पर एक जोरदार धक्का दे दिया। धक्का इतना शक्तिशाली था कि बुजुर्ग लोचन प्रसाद यादव खुद को संभाल नहीं पाए और सीधे जमीन पर जा गिरे। जमीन पर गिरने के कुछ ही पलों के भीतर उनकी हालत बिगड़ गई और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। अचानक हुई इस घटना से पूरे घर में कोहराम मच गया।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई और गिरफ्तारी
घटना की सूचना मिलते ही चांपा थाना पुलिस हरकत में आ गई। पुलिस दल तुरंत मौके पर पहुंचा और स्थिति का जायजा लिया। पुलिस ने सबसे पहले मर्ग कायम कर मामले की गहन जांच शुरू की। घटनास्थल की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद पुलिस ने पंचनामा किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इसके साथ ही अस्पताल से शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी प्राप्त की गई, ताकि मौत के असली कारणों का तकनीकी रूप से खुलासा हो सके।
जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित रमेश यादव और अन्य प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के विस्तृत बयान दर्ज किए। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय के कुशल निर्देशन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. यूलैंडन यार्क के मार्गदर्शन में एक विशेष रणनीति बनाई गई। प्राथमिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपी के कृत्य के कारण ही बुजुर्ग की जान गई है।
दर्ज किए गए गंभीर कानूनी धाराएं
पुलिस ने इस मामले में पुख्ता सबूत जुटाने के बाद भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज किया। आरोपी के खिलाफ निम्नलिखित धाराओं में कार्रवाई की गई है:
- धारा 105 (गैर इरादतन हत्या): हत्या की श्रेणी में न आने वाला आपराधिक मानव वध।
- धारा 296: सार्वजनिक स्थान पर या किसी अन्य तरीके से अशिष्टता या शांति भंग करना।
- धारा 351(3): आपराधिक धमकी देना।
- धारा 333: घर में जबरन घुसना या अन्य संबंधित गंभीर अपराध।
आरोपी काबूम, हथियार बरामद
थाना प्रभारी निरीक्षक कमलेश कुमार सेन्डे के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने तकनीकी और मैदानी इनपुट के आधार पर जाल बिछाकर आरोपी राजकिरण यादव को धर दबोचा। पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। आरोपी के मेमोरंडम कथन के आधार पर पुलिस ने घटना में इस्तेमाल किया गया वह धारदार स्टील का ब्लेड भी बरामद कर लिया है, जिसे उसने छिपाने की कोशिश की थी।
कानूनी प्रक्रिया और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद पुलिस ने आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया और सोमवार को न्यायालय के समक्ष पेश करते हुए न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कमलेश कुमार सेन्डे और उनके पुलिस स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही, जिन्होंने बिना किसी देरी के मामले का पर्दाफाश किया।
समाज के लिए एक सबक
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि जरा-जरा सी जमीन और संपत्ति के विवाद इंसानी रिश्तों को किस हद तक खोखला कर चुके हैं। कानून अपने हाथ में लेने और आवेश में आकर उठाए गए कदम अक्सर न केवल अपराधी का जीवन बर्बाद करते हैं, बल्कि पूरे परिवार को सदमे में छोड़ जाते हैं। जांजगीर-चांपा जिले की इस घटना ने एक बार फिर समाज में सहनशीलता की कमी और बढ़ती आक्रामकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।