समाज को दिशा देने के लिए कई बार बड़े विज्ञापनों या भारी भरकम बजट की जरूरत नहीं होती, बल्कि कुछ लोगों की सच्ची नीयत और एक छोटी सी पहल ही बड़ा बदलाव लाने के लिए काफी होती है। रायपुर जिले से एक ऐसी ही प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया है कि अगर समाज का हर व्यक्ति ठान ले, तो किसी भी जरूरतमंद के रास्ते के कांटे आसानी से फूलों में बदले जा सकते हैं।
सेवा संकल्प अभियान: जब समाज आया आगे
वर्तमान समय में शिक्षा किसी भी राष्ट्र और समाज की रीढ़ मानी जाती है। लेकिन आज भी हमारे समाज में एक ऐसा वर्ग मौजूद है, जिसके बच्चे आर्थिक तंगी या संसाधनों के अभाव के कारण अपनी बुनियादी शिक्षा भी पूरी नहीं कर पाते। कॉपियों, किताबों, पेन और पेंसिल जैसी सामान्य दिखने वाली चीजें भी कई परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ बन जाती हैं।
इसी समस्या को गहराई से समझते हुए रायपुर जिले में 'सेवा संकल्प अभियान' की शुरुआत की गई। इस व्यापक अभियान का मुख्य उद्देश्य समाज के उन तबकों तक शिक्षा की अलख पहुंचाना है, जो संसाधनों की कमी से जूझ रहे हैं। इस अभियान के तहत जिले भर में अलग-अलग मोर्चों पर सेवा और सामाजिक सहभागिता से जुड़े छह विभिन्न सेवा अभियानों की रूपरेखा तैयार की गई है, जिन्हें चरणबद्ध तरीके से अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
118 नागरिकों ने पेश की इंसानियत की मिसाल
इसी कड़ी में गुरुवार को एक विशेष 'स्टेशनरी दान अभियान' का आयोजन किया गया। इस आयोजन की सफलता ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि रायपुर के नागरिकों के दिलों में दूसरों के प्रति कितनी संवेदना और परोपकार की भावना कूट-कूट कर भरी है। अभियान के पहले ही दिन शहर के 118 जागरूक और संवेदनशील नागरिकों ने आगे आकर बढ़-चढ़कर अपनी सहभागिता दर्ज कराई।
इन नागरिकों ने सिर्फ मौखिक समर्थन देने के बजाय व्यावहारिक रूप से कदम उठाया और जरूरतमंद बच्चों के लिए कॉपियां, रजिस्टर, पेन, पेंसिल, कलर्स, ज्योमेट्री बॉक्स और स्कूल बैग जैसी तमाम जरूरी स्टेशनरी सामग्री दानस्वरूप भेंट की। इतने बड़े पैमाने पर मिले सहयोग ने न केवल आयोजकों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि यदि सही दिशा में मंच प्रदान किया जाए, तो हर नागरिक समाज सुधार में अपना योगदान देने के लिए तैयार रहता है।
क्यों जरूरी है ऐसी पहल?
- शिक्षा का प्रसार: संसाधनों के अभाव में बच्चों की पढ़ाई नहीं रुकेगी।
- सामाजिक एकता: इस तरह के अभियान समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में जोड़ते हैं।
- बच्चों का मनोबल: नए स्टेशनरी मिलने से बच्चों में पढ़ाई के प्रति रुचि और उत्साह बढ़ता है।
- नैतिक जिम्मेदारी: यह समाज के संपन्न वर्ग को उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराता है।
बच्चों के चेहरों पर आई मुस्कान
जब इन दान की गई सामग्रियों को संकलित किया गया, तो आयोजकों के चेहरे पर एक अलग ही संतोष और खुशी का भाव था। इस अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों का कहना है कि जब ये कॉपियां और कलर्स उन मासूम बच्चों के हाथों में पहुंचेंगे, जिन्हें इनकी वास्तव में जरूरत है, तो उनके चेहरों पर आने वाली मुस्कान ही इस पूरी मेहनत का सबसे बड़ा इनाम होगी। कई स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी इस तरह के अभियानों से जुड़ने की अपनी इच्छा जताई है।
आगे की क्या है योजना?
'सेवा संकल्प अभियान' के तहत आयोजित किए जा रहे इन छह विभिन्न अभियानों का सिलसिला यहीं थमने वाला नहीं है। आयोजकों की योजना आने वाले दिनों में शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य, पर्यावरण और कौशल विकास जैसे अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी इसी प्रकार के जन-सहयोग कार्यक्रमों को आयोजित करने की है। रायपुर प्रशासन और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं के इस संयुक्त प्रयास ने एक नया मानक स्थापित किया है।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी व्यस्त जिंदगी में से थोड़ा सा समय निकालकर अपने आसपास के जरूरतमंदों की मदद के लिए भी दे सकते हैं। रायपुर के इन 118 नागरिकों ने यह दिखा दिया है कि बदलाव की शुरुआत खुद से और अपनी छोटी सी कोशिश से ही होती है। यदि हर शहर में इसी तरह के सेवा अभियान चलाए जाएं, तो वह दिन दूर नहीं जब देश का हर बच्चा शिक्षित और सशक्त होगा।