छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शुक्रवार को राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय चेतना का एक अद्भुत और अविस्मरणीय नजारा देखने को मिला। रोहिणीपुरम स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर उस वक्त गूंज उठा जब एक सुर और एक लय में हजारों विद्यार्थियों, आचार्यों और नागरिकों ने 'वंदे मातरम्' का सामूहिक गायन किया। इस भव्य आयोजन में राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विशेष रूप से शिरकत की और बच्चों के साथ खुद भी स्वर से स्वर मिलाकर मां भारती की इस वंदना में हिस्सा लिया।
यह आयोजन केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं था, बल्कि यह उस ऐतिहासिक क्षण का उत्सव था जब राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' ने अपनी रचना और राष्ट्र चेतना के प्रसार के 150 गौरवशाली वर्ष पूरे किए हैं। कार्यक्रम के दौरान विद्यालय का पूरा माहौल देशभक्ति के रंगों में रंगा नजर आया।
वंदे मातरम्: राष्ट्र चेतना और स्वाधीनता का सशक्त स्वर
इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि 'वंदे मातरम्' केवल एक शब्द या राष्ट्रगीत मात्र नहीं है, बल्कि यह मां भारती की सच्ची वंदना और राष्ट्रीय चेतना का सबसे शक्तिशाली स्वर है। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने याद किया कि कैसे स्वतंत्रता संग्राम के उस कठिन दौर में इस गीत ने देश के कोने-कोने में स्वाधीनता की अलख जगाई थी।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, "जब देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था, तब 'वंदे मातरम्' का उद्घोष ही स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों के लिए साहस, राष्ट्रप्रेम और सर्वोच्च बलिदान का पर्याय बन गया था। इसी प्रेरणा ने अनगिनत वीरों को अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल जाने की शक्ति दी थी।" उन्होंने जोर देकर कहा कि आज जब हम इस गीत के 150 वर्ष पूरे होने का जश्न मना रहे हैं, तो यह हमारे लिए अपने गौरवशाली इतिहास, पूर्वजों के संघर्ष और त्याग को याद करने का सबसे सही समय है। साथ ही, यह नई पीढ़ी को उनके कर्तव्यों का बोध कराने का भी एक बड़ा माध्यम है।
पूरे देश में एक करोड़ से अधिक लोगों ने किया गायन
विद्या भारती के आह्वान पर आयोजित इस राष्ट्रव्यापी अभियान की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि आज देश के लगभग 25 हजार से अधिक स्थानों पर एक करोड़ से ज्यादा विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने एक साथ 'वंदे मातरम्' का गान किया है। इतनी भारी संख्या में एक ही समय पर मां भारती की वंदना होना देश की अटूट राष्ट्रीय एकता और अखंडता का एक अनोखा और भव्य दृश्य प्रस्तुत करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य की बात करें तो यहाँ भी इस ऐतिहासिक आयोजन के तहत लगभग 1500 अलग-अलग स्थानों पर पांच लाख से अधिक लोगों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने इस बात पर विशेष बल दिया कि कैसे ऐसे आयोजन आज की युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति और इतिहास से जोड़े रखते हैं।
विद्यालय के विकास के लिए 50 लाख रुपये की बड़ी घोषणा
विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और शिक्षण संस्थानों को बेहतर बुनियादी ढांचे से लैस करने की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस दौरान एक बड़ी घोषणा की। उन्होंने सरस्वती शिशु मंदिर के समग्र विकास और उच्च स्तरीय सुविधाओं के विस्तार के लिए 50 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान करने का ऐलान किया। इस घोषणा के बाद विद्यालय परिवार और उपस्थित नागरिकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
शिक्षा और संस्कारों का संगम है छत्तीसगढ़ सरकार की प्राथमिकता
शिक्षा के क्षेत्र में राज्य सरकार की दूरगामी सोच और योजनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार शिक्षा को हमेशा से सर्वोच्च प्राथमिकताओं में रखती है। उन्होंने कहा कि सरकार का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि छत्तीसगढ़ के हर एक बच्चे को, चाहे वह राजधानी रायपुर में रहता हो या फिर बस्तर और सरगुजा के किसी दूरदराज के अंचल में, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अपनी प्रतिभा को निखारने के समान अवसर मिलें।
संसाधनों की कमी को बच्चों की तरक्की में बाधा न बनने देने की बात कहते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने यह सुनिश्चित किया है कि प्रदेश के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और यूपीएससी जैसी कठिन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए बेहतरीन माहौल मिले। इसी दिशा में कदम बढ़ाते हुए दिल्ली स्थित ट्रायबल यूथ हॉस्टल में छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए सीटों की संख्या बढ़ाकर 200 कर दी गई है।" उन्होंने गर्व के साथ साझा किया कि वहाँ रहकर तैयारी कर रहे छत्तीसगढ़ के 13 विद्यार्थियों ने हाल ही में यूपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की है। यह इस बात का प्रमाण है कि यदि हमारे बच्चों को सही समय पर सही मार्गदर्शन और संसाधन मिल जाएं, तो वे देश के किसी भी कोने में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा सकते हैं।
चरित्र निर्माण और अनुशासन ही सच्ची शिक्षा
किताबों और डिग्रियों से आगे बढ़कर शिक्षा के वास्तविक अर्थ को समझाते हुए मुख्यमंत्री साय ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी पाना या ज्ञान रटना नहीं होना चाहिए। सच्ची शिक्षा वही है जो बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संस्कार दे, अनुशासन सिखाए और उनके भीतर समाज तथा राष्ट्र के प्रति गहरी जिम्मेदारी की भावना पैदा करे। उन्होंने विद्या भारती और इस प्रकार के विद्यालयों की सराहना की जो लंबे समय से शिक्षा के साथ-साथ राष्ट्रभक्ति और संस्कारों की मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।
कार्यक्रम के विशिष्ट वक्ताओं और स्थानीय गणमान्य नागरिकों ने भी इस दौरान अपने विचार रखे। इस भव्य आयोजन में विधायक राजेश मूणत, राजीव लोचन महाराज, मयंक बैस, राघवेंद्र सिंह ठाकुर, अजय कुलश्रेष्ठ सहित भारी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक और शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे, जिन्होंने इस ऐतिहासिक दिन को हमेशा के लिए यादगार बना दिया।