कुदरत का कहर जब बरसता है, तो इंसानी बस्तियां कैसे पानी के समंदर में तब्दील हो जाती हैं, इसकी एक बानगी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में देखने को मिल रही है। धार्मिक और आध्यात्मिक नगरी चित्रकूट इन दिनों भीषण जलप्रलय का सामना कर रही है। यहां लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के चलते पवित्र मंदाकिनी नदी उफान पर है और इसका विकराल रूप देखकर हर कोई सहम उठा है। नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रसिद्ध रामघाट समेत कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
मंदाकिनी नदी का डरावना रूप और रामघाट डूबा
स्थानीय मौसम विभाग और जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से हो रही झमाझम बारिश के कारण सतना और चित्रकूट के आसपास के क्षेत्रों में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। नदियां और नाले अपने खतरे के निशान से ऊपर बह रहे हैं। स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंदाकिनी नदी का जलस्तर जो सामान्य दिनों में नियंत्रित रहता है, वह बढ़कर सीधे 146 मीटर के खतरनाक स्तर तक पहुंच गया था। हालांकि, राहत की बात यह है कि अब पानी का स्तर धीरे-धीरे नीचे आने लगा है, जिससे प्रशासन और स्थानीय लोगों ने थोड़ी राहत की सांस ली है।
बाढ़ का पानी अचानक रिहायशी इलाकों में घुसने से लोगों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। जिन लोगों के मकान निचले इलाकों में थे, उन्हें मजबूरन अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों का सहारा लेना पड़ा। संपर्क मार्ग पूरी तरह कट चुके थे और चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा था। ऐसे समय में संकटमोचन बनकर राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राज्य आपदा आपातकालीन प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें मैदान में उतरीं।
700 से अधिक नागरिकों का सुरक्षित रेस्क्यू
आपदा की इस घड़ी में प्रशासनिक अमले और बचाव दलों ने अदम्य साहस का परिचय दिया है। जिला कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया कि प्रशासन ने बिना एक पल गंवाए राहत और बचाव कार्यों को तेज कर दिया था। चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद, NDRF और SDRF की टीमों ने मिलकर 700 से अधिक लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है।
बचाव अभियान के दौरान कई ऐसी जगहें थीं जहां सड़कों के पूरी तरह जलमग्न होने के कारण भारी वाहनों या नावों का पहुंचना नामुमकिन था। ऐसी विकट परिस्थितियों को देखते हुए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर तुरंत हवाई बचाव अभियान (Air Rescue) शुरू करने का फैसला किया। वायुसेना और प्रशासनिक समन्वय से चलाए गए इस कॉter-operation के जरिए फंसे हुए लोगों तक मदद पहुंचाई गई।
प्रशासन और सीएम मोहन यादव की कड़ी नजर
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तुरंत मोर्चा संभाला। रीवा में आयोजित एक उच्च स्तरीय आपातकालीन बैठक में मुख्यमंत्री ने चित्रकूट और सतना के हालातों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से जिले-दर-जिले की रिपोर्ट ली और राहत कार्यों को युद्धस्तर पर जारी रखने के निर्देश दिए।
समीक्षा बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, "मुझे जैसे ही भारी बारिश और सिमरावल तथा मंदाकिनी नदियों के जलस्तर बढ़ने की सूचना मिली, मैंने अपनी यात्रा में बदलाव किया। बालाघाट से दिल्ली और फिर सीधे रीवा पहुंचकर मैंने हालात का जायजा लिया। हमारी स्थानीय टीमों ने बहुत ही कम समय में बेहतरीन समन्वय दिखाते हुए स्थिति को संभाला है। अब तक लगभग 700 नागरिकों को सुरक्षित बचाया जा चुका है, जिनमें से दो लोगों को विशेष रूप से हेलीकॉप्टर के माध्यम से और बाकी लोगों को रेस्क्यू बोट्स के जरिए बाहर निकाला गया।"
राहत शिविरों और भोजन की व्यवस्था
बेघर हुए और बाढ़ से प्रभावित लोगों के लिए प्रशासन ने सुरक्षित स्थानों पर शेल्टर कैंप (राहत शिविर) स्थापित किए हैं। इन शिविरों में रह रहे लोगों के लिए खाने-पीने से लेकर चिकित्सीय सहायता तक के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि अब तक प्रभावित क्षेत्रों में 6,000 से ज्यादा खाने के पैकेट वितरित किए जा चुके हैं ताकि किसी को भी भूखा न रहना पड़े।
सबसे राहत भरी बात यह है कि इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अभी तक किसी भी प्रकार की जनहानि (जान जाने) की सूचना नहीं मिली है। प्रशासन का पूरा फोकस अब युद्धस्तर पर साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल की आपूर्ति और बीमारियों की रोकथाम पर है ताकि पानी उतरने के बाद किसी महामारी का खतरा न पैदा हो।
आगे की स्थिति और प्रशासनिक अपील
मौसम विभाग के पूर्वानुमान और जिला प्रशासन के बयानों के अनुसार, यदि आगामी घंटों में बारिश नहीं होती है, तो जलस्तर और तेजी से नीचे आएगा और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगी। हालांकि, सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और प्रशासनिक बल अभी भी चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं और लगातार गश्त कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह भी घोषणा की है कि वे स्वयं व्यक्तिगत रूप से चित्रकूट का दौरा करेंगे और जमीनी स्तर पर राहत कार्यों का निरीक्षण करेंगे। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नागरिकों की सुरक्षा और पुनर्वास के लिए खजाने के द्वार खुले हैं और हरसंभव मदद पहुंचाई जाएगी। स्थानीय प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन का पूरा सहयोग करें।
