सनातन संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना के केंद्र माने जाने वाले तीर्थ नगरी मथुरा में इस समय एक बेहद ही खास और भव्य आयोजन देखने को मिल रहा है। गोवर्धन मठ पुरी के ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ महाराज की 30वीं पुण्यतिथि के पावन अवसर पर दो दिवसीय विशेष महोत्सव का शुभारंभ हो चुका है। इस धार्मिक अनुष्ठान की शुरुआत शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार और पूरे विधि-विधान के साथ हुई, जिसमें देश के कई हिस्सों से पहुंचे विशिष्ट अतिथियों और साधु-संतों ने हिस्सा लिया।
अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने की विशेष शिरकत
इस दो दिवसीय भव्य आयोजन के पहले दिन अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने विशेष रूप से शिरकत की। उन्होंने कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ महाराज के चित्र पर माल्यार्पण किया और अत्यंत श्रद्धा के साथ उनका पूजन व आरती की। मुख्यमंत्री के इस दौरे से आयोजन की गरिमा और अधिक बढ़ गई।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने गोवर्धन मठ पुरी के वर्तमान 145वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज से भेंट की। उन्होंने पीठाधीश्वर के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया और आध्यात्मिक विषयों पर चर्चा भी की। इस मुलाकात को उत्तर और पूर्वोत्तर भारत के सांस्कृतिक समन्वय के रूप में भी देखा जा रहा है।
विशेष उपहारों का किया गया आदान-प्रदान
संत समाज के प्रति अपनी गहरी आस्था प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थजी महाराज को पूर्वोत्तर की संस्कृति से जुड़े कई अनूठे उपहार भेंट किए। इन उपहारों में प्रमुख रूप से शामिल थे:
- बौद्ध धर्म का पवित्र अंगवस्त्र 'खादा'
- मां तारा का एक मनमोहक छायाचित्र
- पूर्वोत्तर की कला को दर्शाता विशेष हस्तशिल्प हाथी
- अरुणाचल प्रदेश सरकार के पिछले 10 वर्षों के स्वर्णिम विकास कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक विशेष पुस्तक
- राज्य सरकार की ओर से दिया जाने वाला पारंपरिक राजकीय स्मृति चिह्न
ब्रह्मलीन शंकराचार्य का देश के प्रति अमूल्य योगदान
इस अवसर पर अपने संबोधन और विचारों में मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी निरंजनदेव तीर्थ महाराज के जीवन और उनके द्वारा किए गए महान कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि स्वामी निरंजनदेव तीर्थ महाराज ने अपने जीवनकाल में सदैव देश, संस्कृति और समाज को एक नई और सही दिशा दिखाने का अद्भुत कार्य किया था। उनके विचार आज के समय में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने तब हुआ करते थे।
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि वर्तमान शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थजी महाराज भी उसी महान गौरवशाली परंपरा, सनातन मूल्यों और जनसेवा के भाव को पूरी निष्ठा व समर्पण के साथ आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। उनका यह प्रयास देश को वैचारिक रूप से और अधिक मजबूत बना रहा है।
शनिवार को होगी विशाल श्रद्धांजलि सभा
शुक्रवार को हुए धार्मिक अनुष्ठानों और वेदमंत्रों के गूंज के बाद, इस दो दिवसीय आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण शनिवार को होने वाला है। शनिवार को दोपहर ठीक 12 बजे एक विशाल श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाएगा। इस सभा में देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं, संतों और गणमान्य नागरिकों के पहुंचने का सिलसिला लगातार जारी है।
प्रशासन और आयोजन समिति की ओर से मथुरा पहुंचने वाले सभी श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। दूर-दराज से आ रहे लोग ब्रह्मलीन शंकराचार्य के प्रति अपनी अगाध श्रद्धा व्यक्त करने के लिए बेताब हैं। इस आयोजन से न केवल मथुरा बल्कि पूरे देश में आध्यात्मिक ऊर्जा का एक नया संचार देखने को मिल रहा है।