मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण शहर ग्वालियर में एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। देश के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले ठिकानों में शुमार ग्वालियर के महाराजपुरा एयरफोर्स स्टेशन परिसर से विमानों में इस्तेमाल होने वाले कीमती एवियोनिक्स स्क्रैप (Aviation Scrap) की चोरी का सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है। इस घटना ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, क्योंकि जिस जगह को परिंदा भी पर न मार सके की श्रेणी में रखा जाता है, वहां से इस तरह कीमती सामान बाहर निकल जाना किसी बड़ी चूक का संकेत देता है।
कचरे के ट्रैक्टर का हुआ इस्तेमाल, सुरक्षा एजेंसियों को दिया चकमा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दुस्साहसिक वारदात 9 सितंबर 2026 की शाम करीब 4 से 5 बजे के बीच अंजाम दी गई। चोरों ने सुरक्षा तंत्र को मात देने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया। कैंपस के भीतर साफ-सफाई और कचरा उठाने के लिए अधिकृत ट्रैक्टर का इस्तेमाल इस चोरी के लिए किया गया। आरोप है कि शातिर चोरों ने कचरे के भारी ढेरों के ठीक नीचे इस हाई-वैल्यू एवियोनिक्स स्क्रैप को बड़ी चालाकी से छिपा दिया था।
जब कचरे से भरा यह ट्रैक्टर एयरफोर्स स्टेशन के मुख्य गेट से बाहर निकला, तो वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों को किसी भी तरह का शक नहीं हुआ। कचरा उठाने वाली गाड़ी समझकर उसे आसानी से बाहर जाने दिया गया। इस तरह बेहद सुनियोजित तरीके से देश की इस सामरिक संपत्ति को कैंपस के बाहर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचा दिया गया।
ऐसे हुआ मामले का बड़ा खुलासा
इस पूरी चोरी का पर्दाफाश तब हुआ जब शनिवार को एयरफोर्स स्टेशन के भीतर नियमित निगरानी और ऑडिट का काम चल रहा था। परिसर की सुरक्षा और व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों का ध्यान अलग-अलग स्थानों पर रखे गए स्क्रैप और मेटल की मात्रा पर गया। जब मिलान किया गया तो मात्रा काफी कम पाई गई।
मात्रा कम मिलने के बाद हड़कंप मच गया। तुरंत प्रभाव से आंतरिक स्तर पर प्राथमिक जांच शुरू की गई। जब सीसीटीवी फुटेज और अन्य गतिविधियों को खंगाला गया, तब जाकर इस हाई-प्रोफाइल चोरी की परतें खुलीं। हालांकि शुरुआती आकलन में चोरी किए गए स्क्रैप की कीमत 50 हजार रुपये से अधिक आंकी जा रही है, लेकिन रक्षा महत्व के उपकरणों के लिहाज से यह मामला वित्तीय मूल्य से कहीं अधिक गंभीर माना जा रहा है।
निजी सफाई ठेकेदार और कर्मचारी निकले मास्टरमाइंड
इस पूरे मामले की जब गहराई से तहकीकात की गई, तो जो नाम सामने आए उन्होंने सबको चौंका दिया। जांच में पता चला कि एयरफोर्स कैंपस के भीतर साफ-सफाई और कचरा निस्तारण का ठेका 'मैसर्स ढुल सिक्योरिटी सर्विसेज' नामक कंपनी के पास था। इस कंपनी के मूल मालिक सुभाष चंद्र ढुल बताए जा रहे हैं, जो उत्तर प्रदेश के नोएडा के रहने वाले हैं। वहीं, ग्वालियर लोकल स्तर पर इस कंपनी के तमाम ऑपरेशन्स और कामकाज की कमान योगेंद्र सिंह के हाथ में थी।
जांच की दिशा में आगे बढ़ते हुए पुलिस और एयरफोर्स की संयुक्त टीमों ने पाया कि बाहरी कोई शख्स इस चोरी को अंजाम नहीं दे सकता था। कैंपस के अंदरूनी रास्तों और सुरक्षा घेरे की जानकारी केवल उन्हीं लोगों को थी जो वहां नियमित रूप से काम कर रहे थे। शक की सुई सीधे तौर पर ठेके पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों पर आकर रुकी।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई, तीन आरोपी हिरासत में
मामले की गंभीरता को देखते हुए एयरफोर्स स्टेशन के सुरक्षा अनुभाग की ओर से महाराजपुरा थाना पुलिस को एक औपचारिक लिखित शिकायत दी गई। शिकायत मिलते ही हरकत में आई स्थानीय पुलिस ने शनिवार को ही भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत चोरी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज कर लिया।
कार्रवाई को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने इस घटना में संलिप्त पाए गए तीन नामजद आरोपियों को तुरंत हिरासत में ले लिया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, हिरासत में लिए गए इन संदिग्धों से कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है और यह भी बताया है कि उन्होंने किस तरह इस योजना को अमलीजामा पहनाया था।
अधिकारियों के बयान और आगे की जांच
इस पूरे घटनाक्रम पर बात करते हुए सीएसपी रोबिन जैन ने मीडिया को जानकारी दी कि एयरफोर्स स्टेशन के असिस्टेंट सिक्योरिटी ऑफिसर की आधिकारिक शिकायत के आधार पर महाराजपुरा थाने में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
"एयरफोर्स कैंपस के अंदर से स्क्रैप चोरी के मामले में तीन नामजद आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनके बताए अनुसार चोरी किए गए स्क्रैप की शत-प्रतिशत बरामदगी के लिए दबिश दी जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि इस साजिश में और कौन-कौन लोग शामिल हैं," सीएसपी रोबिन जैन ने बताया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर और रक्षा हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। सवाल यह उठ रहा है कि देश के इतने संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठान के मुख्य द्वार पर तैनात सुरक्षाकर्मियों की नजरों से कचरे के ढेर के नीचे छिपाकर ले जाया जा रहा यह सामान क्यों नहीं पकड़ा गया? क्या सुरक्षा जांच के नियमों में कोई ढिलाई बरती जा रही थी? इन तमाम बिंदुओं पर अब सैन्य खुफिया एजेंसियां और स्थानीय पुलिस मिलकर गहराई से जांच कर रही हैं।
फिलहाल, पुलिस का पूरा फोकस चुराए गए उस कीमती एवियोनिक्स स्क्रैप को जल्द से जल्द बरामद करने पर है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संवेदनशील तकनीक या उपकरण गलत हाथों में न पहुंच सकें। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा कितनी भी कड़ी क्यों न हो, अंदरूनी मिलीभगत और लापरवाही बड़े सुरक्षा घेरों में भी सेंध लगा सकती है। पुलिस इस मामले में आने वाले दिनों में कुछ और बड़े खुलासे कर सकती है।