उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है। आम जनता को तहसील और राजस्व कार्यालयों के चक्कर काटने की लंबी और थका देने वाली परंपरा से मुक्ति दिलाने के लिए योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों के बाद, उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद ने तीन नए हाई-टेक पोर्टलों का आधिकरिक रूप से शुभारंभ कर दिया है। इन पोर्टलों के जरिए अब जमीन के बंटवारे से लेकर ईडब्ल्यूएस प्रमाण-पत्र बनवाने और खतौनी देखने की पूरी प्रक्रिया पूरी तरह से ऑनलाइन और पारदर्शी हो गई है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की ओर एक और मजबूत कदम
शुक्रवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राजस्व परिषद ने इन तीनों पोर्टलों को जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में ट्रेनी पीसीएस अधिकारी भी मौजूद रहे, जिन्हें आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल और जनता के प्रति जवाबदेही का पाठ पढ़ाया गया। राजस्व परिषद की अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राज्य के नागरिकों को उनके राजस्व से जुड़े अधिकार बिना किसी परेशानी के उपलब्ध कराने के लिए बेहद गंभीर हैं।
अक्सर यह देखा जाता था कि जमीनी विवाद, पैमाइश या बंटवारे के मामलों में आम आदमी को महीनों और कभी-कभी सालों तक अधिकारियों के दफ्तरों के बाहर कतारों में खड़ा रहना पड़ता था। बिचौलियों का बोलबाला रहता था और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। लेकिन अब इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के आने से आवेदन से लेकर अंतिम निस्तारण तक की पूरी प्रक्रिया को कोई भी व्यक्ति अपने घर बैठे ऑनलाइन ट्रैक कर सकेगा। इससे न सिर्फ अनावश्यक कागजी प्रक्रिया से राहत मिलेगी, बल्कि सरकारी तंत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी।
धारा 116 पोर्टल: अब घर बैठे होगा भूमि विभाजन
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 116 के तहत आने वाले भूमि विभाजन के मामलों के लिए सरकार ने एक समर्पित और बेहद आधुनिक पोर्टल लॉन्च किया है। इस पोर्टल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि अब सह-खातेदार अपनी जमीन के बंटवारे के लिए सीधे ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इसके बाद की पूरी प्रक्रिया—जैसे कि नोटिस जारी करना, उद्घोषणा करना और लेखपाल की फील्ड रिपोर्ट—सब कुछ डिजिटल माध्यम से ही संचालित होगी।
इतना ही नहीं, इस पोर्टल में गूगल मैप (Google Map) की शानदार तकनीक को भी जोड़ा गया है। इसकी मदद से जमीन की वास्तविक भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) को सीधे स्क्रीन पर देखा जा सकेगा। इससे न्यायालय और फील्ड में काम करने वाले अधिकारियों के बीच तालमेल बेहतर होगा और मामलों के निस्तारण में जो ढिलाई पहले देखने को मिलती थी, उस पर लगाम लगेगी। प्रार्थी अपने आवेदन की पल-पल की अपडेट अपने मोबाइल पर देख सकेगा।
ईडब्ल्यूएस पोर्टल: प्रमाण-पत्र बनवाने की प्रक्रिया हुई बेहद आसान
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के नागरिकों के लिए प्रमाण-पत्र बनवाना अक्सर एक टेढ़ी खीर साबित होता था। दस्तावेजों के सत्यापन और दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते लोग थक जाते थे। इस समस्या का स्थाई समाधान निकालते हुए सरकार ने नया ईडब्ल्यूएस पोर्टल शुरू किया है। अब सामान्य वर्ग के गरीब परिवार घर बैठे इस प्रमाण-पत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन फाइल कर सकते हैं।
आवेदन करने के बाद यह प्रकरण सीधे संबंधित लेखपाल और तहसीलदार के लॉगिन पर ऑनलाइन फॉरवर्ड हो जाएगा। अधिकारी डिजिटल माध्यम से ही दस्तावेजों की जांच कर इसका निस्तारण करेंगे। इस पूरी डिजिटल चैन के कारण न केवल समय की भारी बचत होगी, बल्कि आम आदमी का उत्पीड़न भी रुकेगा।
सरलीकृत खतौनी: अब डेटा मिलेगा और भी ज्यादा सटीक
राजस्व रिकॉर्ड का सबसे अहम हिस्सा मानी जाने वाली 'खतौनी' को आम नागरिकों के लिए और अधिक सरल और उपयोगी बना दिया गया है। नए बदलाव के तहत अब भूमि का क्षेत्रफल छह दशमलव स्थानों (Six Decimal Places) तक प्रदर्शित किया जाएगा। इससे छोटे से छोटे भूखंड या जमीन के टुकड़े की जानकारी भी बिल्कुल सटीक और बिना किसी भ्रम के मिल सकेगी।
इसके अलावा, पुराने न्यायिक आदेशों और बंधक (Mortgage) से जुड़े आदेशों की जानकारी भी अब एक ही जगह पर व्यवस्थित रूप से उपलब्ध कराई गई है। जमीन के मालिकाना हक को समझने में अब किसी भी आम नागरिक को वकीलों या दलालों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, क्योंकि सारा डेटा क्रिस्टल क्लियर फॉर्मेट में उपलब्ध होगा।
युवा अधिकारियों को मिला आधुनिक तकनीक का प्रशिक्षण
पोर्टलों के इस लॉन्च कार्यक्रम के दौरान एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें नवनियुक्त और ट्रेनी पीसीएस अधिकारियों को रोवर तकनीक (Rover Technology) के माध्यम से आधुनिक भूमि मापन के गुर सिखाए गए। राजस्व परिषद अध्यक्ष अर्चना अग्रवाल ने युवा अधिकारियों को संबोधित करते हुए स्पष्ट कहा कि राजस्व प्रशासन का सीधा नाता आम इंसान के बुनियादी अधिकारों से जुड़ा है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक का उद्देश्य केवल कागजों को डिजिटल करना भर नहीं है, बल्कि इसका असली मकसद आम जनता के जीवन को आसान बनाना, उन्हें त्वरित न्याय देना और पारदर्शी व्यवस्था कायम करना है। युवा अधिकारियों से यह अपेक्षा की गई है कि वे पूरी संवेदनशीलता, निष्पक्षता और जनसेवा की सच्ची भावना के साथ इन नई डिजिटल व्यवस्थाओं का अधिकतम लाभ जनता तक पहुंचाएं।
निष्कर्ष: बदल रही है उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक तस्वीर
निसंदेह, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उठाए गए ये कदम राज्य को डिजिटल गवर्नेंस के मामले में एक नए मुकाम पर ले जा रहे हैं। जब आम आदमी को अपनी जमीन के कागजों, बंटवारे या प्रमाण-पत्रों के लिए सिस्टम के आगे हाथ नहीं जोड़ना पड़ेगा, तभी असल मायनों में सुशासन की स्थापना होगी। इन तीन पोर्टलों के शुरू होने से बिचौलियों का राज खत्म होगा और जनता का शासन के प्रति विश्वास और अधिक मजबूत होगा। आने वाले दिनों में इन पोर्टलों के जरिए लाखों प्रदेशवासियों को सीधी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।