त्योहारों की चमक और अपनों के साथ वक्त बिताने की चाहत, कई बार कैसे एक बड़ी परीक्षा बन जाती है, इसकी बानगी 28 अगस्त 2026 को दिल्ली-एनसीआर की सड़कों पर साफ देखने को मिली। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अपने पैतृक घरों और रिश्तेदारों के यहां जाने के लिए निकले लाखों लोग जब सड़कों पर उतरे, तो उन्हें उम्मीद नहीं थी कि 'छुट्टी का बड़ा हिस्सा' तो सिर्फ जाम से जूझने में ही बीत जाएगा। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद से लेकर दिल्ली की सीमाओं तक, हर तरफ वाहनों का ऐसा रेला उमड़ा कि पहिए थम से गए।
सड़कों पर महाजाम: दो से तीन घंटे तक फंसे रहे लोग
रक्षाबंधन से ठीक पहले और पर्व के दिन यानी गुरुवार देर रात से ही दिल्ली-एनसीआर के कई प्रमुख मार्गों पर भारी ट्रैफिक दबाव देखने को मिला। स्थिति इतनी विकट हो गई कि लोगों को महज कुछ किलोमीटर का सफर तय करने में घंटों का वक्त लग गया। कोई अपनी निजी कार से परिवार सहित निकला था, तो कोई उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में जाने के लिए सरकारी और निजी बसों की तलाश में था। एक साथ भारी संख्या में लोगों के सड़क पर उतरने से ट्रैफिक पुलिस के तमाम दावे और इंतजाम धरे के धरे रह गए।
नोएडा और गाजियाबाद के कई इलाकों में तो हालात ऐसे थे कि गाड़ियां मीलों लंबी कतारों में रेंगती नजर आईं। यात्रियों का कहना था कि उन्होंने सोचा था कि त्योहार के दिन वे समय पर अपने घर पहुंच जाएंगे, लेकिन रास्ते का सफर किसी जंग जीतने जैसा साबित हुआ। कई लोग तो ऐसे थे जिनकी बसें या ट्रेनें जाम में फंसने के कारण छूट गईं, जिससे उनकी निराशा और अधिक बढ़ गई.
इन प्रमुख मार्गों पर सबसे बुरा रहा हाल
यदि बात करें उन रास्तों की जहां जाम का सबसे ज्यादा असर दिखा, तो उनमें नोएडा और गाजियाबाद के मुख्य एक्सप्रेसवे और बॉर्डर शामिल हैं।
- नोएडा एक्सप्रेसवे और आंतरिक मार्ग: नोएडा एक्सप्रेसवे के साथ-साथ सेक्टर-62, सेक्टर-63, सेक्टर-37, परी चौक और ग्रेटर नोएडा-दादरी रोड पर वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं। एफएनजी (FNG) एक्सप्रेसवे और विकास मार्ग पर भी गाड़ियां बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती दिखीं।
- दिल्ली की सीमाएं (बॉर्डर एरिया): दिल्ली से सटे रास्तों पर भी स्थिति काफी खराब रही। चिल्ला बॉर्डर, कालिंदी कुंज और डीएनडी (DND) फ्लाईवे पर वाहनों का भारी दबाव देखा गया। दिल्ली की तरफ से आने-जाने वाले लोगों को भयंकर जाम का सामना करना पड़ा।
- गाजियाबाद और एनएच-9 का क्षेत्र: गाजियाबाद में एनएच-9, लाल कुआं, इंदिरापुरम, सेक्टर-62 और डासना के आसपास ट्रैफिक पूरी तरह से रेंगता हुआ नजर आया। इसके अलावा मोहन नगर और आरआरटीएस (RRTS) स्टेशन के पास हुए जलभराव ने लोगों की मुसीबतों को और बढ़ा दिया।
बारिश और जलभराव ने बढ़ाई मुसीबत
त्योहर के दिन मौसम ने भी लोगों के साथ एक तरह की लुकाछिपी खेली। बीच-बीच में हुई हल्की से मध्यम बारिश के कारण कई निचले इलाकों और सड़कों पर पानी भर गया। जलभराव के चलते गाड़ियों की रफ्तार अपने आप धीमी हो गई। मोहन नगर और कुछ अन्य इलाकों में पानी जमा होने से दोपहिया और चार पहिया वाहन चालकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जानकारों का मानना है कि यदि बारिश न होती, तो शायद ट्रैफिक की स्थिति इतनी अधिक गंभीर नहीं होती।
बस स्टैंडों पर उमड़ी भारी भीड़, तिल होना की भी जगह नहीं
निजी वाहनों के अलावा सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने वाले यात्रियों की स्थिति भी कुछ अलग नहीं थी। नोएडा और गाजियाबाद के प्रमुख बस अड्डों पर पैर रखने तक की जगह नहीं बची थी। आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, मथुरा, कानपुर, लखनऊ और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अन्य शहरों के लिए रवाना होने वाली बसें खचाखच भरी हुई थीं।
हालात यह थे कि बसें आने के बाद भी यात्रियों को अंदर बैठने की जगह नहीं मिल पा रही थी। कई बसें अपनी क्षमता से इतनी अधिक भरी थीं कि लोगों का उनमें चढ़ना जोखिम भरा साबित हो रहा था। कई यात्रियों को मजबूरी में अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ी या फिर अगली बस के आने का घंटों इंतजार करना पड़ा। बुजुर्गों, महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों को इस दौरान सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
प्रशासन के कड़े इंतजाम भी साबित हुए नाकाफी
त्योहार के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस ने पहले से ही कमर कस रखी थी। प्रशासन की ओर से भारी वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए विशेष नियम बनाए गए थे। एनएच-9 पर 26 अगस्त की सुबह 8 बजे से लेकर 28 अगस्त की रात 12 बजे तक भारी मालवाहक (कमर्शियल) वाहनों के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था।
केवल इतना ही नहीं, बल्कि सड़कों पर यातायात को सुचारू रूप से चलाने के लिए 900 से अधिक पुलिसकर्मियों को चप्पे-चप्पे पर तैनात किया गया था। ट्रैफिक अधिकारियों का कहना था कि भारी वाहनों के रोके जाने से कुछ हद तक राहत जरूर मिली, लेकिन रक्षाबंधन के मौके पर निजी वाहनों और यात्रियों की अचानक आई बाढ़ के आगे पुलिस बल की संख्या भी कम पड़ गई, जिससे कई चौराहों पर जाम की स्थिति बन गई।
यात्रियों के अनुभव: 'उम्मीद नहीं थी ऐसा सफर होगा'
सड़क पर फंसे कई यात्रियों ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी कि एक त्योहार के दिन उन्हें इस तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ेगी। नोएडा से कानपुर के लिए रवाना हुए एक यात्री ने बताया कि उन्हें सिर्फ एनएच-9 के सेक्टर-62 चौराहे तक पहुंचने में ही करीब एक घंटे का समय लग गया। इसके बाद बस स्टैंड पर लंबी लाइन और बस न मिलने के कारण उनका पूरा दिन रास्ते में ही बर्बाद हो गया।
शाम ढलते-ढलते दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी वाहनों की संख्या में भारी इजाफा देखा गया। रक्षाबंधन के इस लंबे सप्ताहांत (Long Weekend) और छुट्टियों के कारण यह अंदेशा जताया जा रहा है कि आने वाले एक-दो दिनों तक भी दिल्ली-एनसीआर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले तमाम रास्तों पर इसी प्रकार की भीड़ बनी रह सकती है।विशेषज्ञों की सलाह: आने वाले दिनों में यात्रा से पहले बरतें सावधानी
ट्रैफिक एक्सपर्ट्स और प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि यदि बहुत जरूरी न हो, तो वे अनावश्यक रूप से पीक आवर्स (Peak Hours) में वाहन लेकर बाहर निकलने से बचें। यदि यात्रा करना अनिवार्य है, तो घर से निकलने से पहले गूगल मैप्स या ट्रैफिक अपडेट्स की मदद से रूट की जानकारी अवश्य लें, ताकि जाम वाले इलाकों से बचा जा सके। त्योहार की खुशियों के बीच यह ट्रैफिक जाम निश्चित रूप से एक कड़वा अनुभव छोड़ गया, जो यह सोचने पर मजबूर करता है कि बढ़ती आबादी और वाहनों के दबाव से निपटने के लिए हमारी शहरी परिवहन व्यवस्था को अभी और कितना मजबूत करने की आवश्यकता है।
