दिलवालों की दिल्ली अपने अनोखे अंदाज़ और दिलचस्प किस्सों के लिए हमेशा जानी जाती है। इस बार राजधानी में एक ऐसा मुकाबला चर्चा का विषय बना हुआ है, जिसने इंटरनेट से लेकर सड़कों तक हलचल मचा दी है। बात हो रही है दिल्ली की सबसे अनोखी और बहुप्रतीक्षित 'सबसे फैट डॉग' प्रतियोगिता की, जिसके नतीजे ने हर किसी को हैरान भी किया और भावुक भी। इस महामुकाबले में हौज खास के एसडी मार्केट की लाड़ली और करीब 75 किलो वजनी स्ट्रीट डॉग 'गोला' ने तमाम लग्जरी और देसी नस्लों के डॉगीज़ को पीछे छोड़ते हुए 'सुपर हेवीवेट चैंपियन' का खिताब अपने नाम कर लिया है।
गूगू को पछाड़कर रचा इतिहास
यह मुकाबला किसी आम प्रतियोगिता से कम नहीं था। इसमें साकेत के धाकड़ दावेदार 'गूगू' को कड़े मुकाबले में शिकस्त मिली। फाइनल राउंड तक पहुँचने के लिए गूगू ने सेमीफाइनल में 'तारा' नाम के डॉगी को हराया था, लेकिन फाइनल की बाजी पूरी तरह से गोला के नाम रही। आयोजकों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस रोमांचक और अनूठे कॉन्टेस्ट में कुल 64 डॉगीज़ ने हिस्सा लिया था, जिनमें वीआईपी नस्लों से लेकर हमारे अपने मोहल्लों के स्ट्रीट डॉग्स भी शामिल थे।
वोटिंग के आंकड़े इतने जबरदस्त थे कि हर कोई हैरान रह गया। गोला को कुल 66,954 वोट मिले, जबकि रनर-अप रहे 'गूगू' को 27,046 वोटों से संतोष करना पड़ा। दोनों के बीच हार-जीत का अंतर पूरे 39,908 वोटों का रहा, जो यह बताता है कि जनता के दिलों में गोला के लिए कितना प्यार था।
जीत से ठीक पहले दुनिया को कह गई अलविदा
इस कहानी का सबसे भावुक और झकझोर देने वाला पहलू यह है कि जिस 'गोला' ने अपनी भारी-भरकम और प्यारी शख्सियत से पूरे शहर को अपना दीवाना बना लिया था, वह परिणाम आने से पहले ही इस दुनिया को अलविदा कह गई। हालांकि, प्रतियोगिता के नियमों और उसकी लोकप्रियता को देखते हुए उसका नाम रेस में बरकरार रखा गया और अंततः उसने जीत हासिल कर ही ली। जैसे ही गोला की जीत की खबर एसडी मार्केट और सोशल मीडिया पर फैली, उसके चाहने वालों की आँखें नम हो गईं। एक तरफ जहाँ उसकी ऐतिहासिक जीत का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसकी मौत का गम भी हर स्थानीय निवासी के चेहरे पर साफ झलक रहा है।
डिजिटल मीम्स से लेकर सड़कों तक चला कैंपेन
गोला को इस मुकाम तक पहुँचाने में उसके प्रशंसकों और स्थानीय दुकानदारों ने कोई कसर नहीं छोड़ी। इंटरनेट पर गोला की जीत के लिए मीम्स, फनी पोस्ट्स और अपील की बाढ़ आ गई थी। आलम यह था कि यह प्रतियोगिता दिल्ली की सीमाओं को लांघकर सोशल मीडिया के राष्ट्रीय पटल पर ट्रेंड करने लगी थी।
इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत इसकी पारदर्शिता थी। विजेता का फैसला केवल सोशल मीडिया लाइक्स के जरिए नहीं किया गया। आयोजकों ने दिल्ली के चुनिंदा इलाकों जैसे वसंत विहार, कमला नगर और पंजाबी बाग के लोकप्रिय कैफे में विशेष पोलिंग बूथ (मतदान केंद्र) बनाए थे, जहाँ लोगों ने लाइन में लगकर अपने पसंदीदा डॉगी के लिए वोटिंग की थी। ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों को मिलाकर पड़े इन भारी-भरकम वोटों ने साबित कर दिया कि दिल्ली के लोग अपने आवारा और प्यारे स्ट्रीट एनिमल्स से कितना लगाव रखते हैं।
एसडी मार्केट की शान थी गोला
दक्षिण दिल्ली के हौज खास स्थित एसडी मार्केट आने वाला हर शख्स गोला से वाकिफ था। लगभग 75 किलो वजन के साथ वह मार्केट की शान हुआ करती थी। दुकानदारों से लेकर वहाँ आने वाले ग्राहकों तक, हर कोई उसे प्यार से कुछ न कुछ खाने को देता था, यही वजह थी कि उसका वजन इतना बढ़ गया था, जो अंततः उसकी पहचान बन गया।
आज भले ही गोला हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसकी यह जीत इस बात की मिसाल है कि स्ट्रीट एनिमल्स भी समाज का एक अहम हिस्सा हैं और वे इंसानों की तरह ही अपार स्नेह और सम्मान के हकदार होते हैं। गोला की यह कहानी लंबे समय तक दिल्लीवालों के दिलों में जिंदा रहेगी, जहाँ उसने अपनी मौत के बाद भी अपनी जीत का परचम लहराकर सबको यह सिखा दिया कि सच्चे प्यार की कोई सीमा नहीं होती।