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खाली प्रॉपर्टी से हर महीने होगी ₹60000 की कमाई, ऐसे लगवाएं ATM

खाली प्रॉपर्टी से हर महीने होगी ₹60000 की कमाई, ऐसे लगवाएं ATM

यदि आपके पास कोई खाली दुकान, कमर्शियल स्पेस या किसी अच्छी लोकेशन पर कोई जमीन पड़ी है, और आप उससे बिना किसी भागदौड़ के नियमित आमदनी चाहते हैं, तो यह खबर आपके लिए बेहद खास है। अमूमन लोग प्रॉपर्टी को किराए पर देने के पारंपरिक तरीकों जैसे दुकान चलाना या गोदाम बनाने के बारे में सोचते हैं, लेकिन एक ऐसा भी जरिया है जिसके जरिए आप बिना दुकान खोले हर महीने निश्चित आय प्राप्त कर सकते हैं। जी हाँ, हम बात कर रहे हैं अपनी खाली प्रॉपर्टी पर एटीएम (ATM) लगवाने की। देश के बड़े बैंक और एटीएम ऑपरेटर कंपनियां अपनी मशीनें स्थापित करने के लिए लोगों की खाली जगहों को किराए पर लेती हैं और इसके बदले हर महीने तगड़ा किराया देती हैं।

इस बिजनेस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें आपको न तो रोज दुकान खोलने और बंद करने की झंझट उठानी पड़ती है और न ही ग्राहकों से डील करना होता है। एक बार एग्रीमेंट होने के बाद हर महीने तय तारीख पर किराया आपके बैंक खाते में पहुंच जाता है। अगर आपके पास भी ऐसी कोई उपयुक्त जगह है, तो आइए विस्तार से समझते हैं कि एटीएम लगवाने की पूरी प्रक्रिया क्या है और इसके लिए किन-किन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

1. एटीएम के लिए कैसी जगह और साइज होना चाहिए?

सबसे पहला सवाल यह उठता है कि क्या हर खाली जगह पर एटीएम लग सकता है? इसका जवाब है- नहीं। बैंक और एटीएम लगाने वाली कंपनियां बहुत ही सोच-समझकर लोकेशन का चयन करती हैं। उनकी प्राथमिकता ऐसी जगहें होती हैं जहाँ लोगों की आवाजाही सबसे ज्यादा हो।

आदर्श लोकेशन: मुख्य बाजार (Main Market), घनी आबादी वाली रेजिडेंशियल सोसायटी, मेन रोड, रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, अस्पताल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी या बड़े कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के बाहर। इसके अलावा, बैंक उन ग्रामीण इलाकों या छोटे कस्بों को भी तेजी से टारगेट कर रहे हैं जहाँ बैंकिंग सुविधाएं या एटीएम कम मात्रा में उपलब्ध हैं।

जगह का साइज और बनावट: एटीएम मशीन और उसके केबिन को स्थापित करने के लिए आमतौर पर 60 से 100 वर्गफुट की जगह पर्याप्त होती है। प्रॉपर्टी हमेशा ग्राउंड फ्लोर पर होनी चाहिए ताकि बुजुर्गों या विकलांगों समेत हर कोई आसानी से वहां पहुंच सके। जगह ऐसी होनी चाहिए जहाँ 24 घंटे ग्राहकों का आना-जाना सुरक्षित और संभव हो। साथ ही, निर्बाध बिजली आपूर्ति, इंटरनेट कनेक्टिविटी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम के लिए जगह अनुकूल होनी चाहिए।

2. बैंक या एटीएम ऑपरेटर कंपनियों से संपर्क कैसे करें?

लोकेशन तय होने के बाद अगला कदम बैंक या संबंधित कंपनियों तक अपनी बात पहुंचाने का होता है। इसके दो मुख्य रास्ते हैं:

  • सीधे बैंकों के माध्यम से: आप अपने नजदीकी कमर्शियल बैंकों की शाखाओं में जाकर सीधे ब्रांच मैनेजर से मिल सकते हैं। उन्हें अपनी प्रॉपर्टी की सटीक लोकेशन, उसका साइज, तस्वीरें और मालिकाना हक (Ownership) से जुड़े कागजात दिखाएं। यदि बैंक को आपकी लोकेशन बिजनेस के लिहाज से सही लगती है, तो उनकी इंटरनल टीम साइट विजिट के लिए आएगी और सब कुछ ठीक पाए जाने पर आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
  • वाइट लेबल एटीएम (White Label ATM) कंपनियां: भारत में सिर्फ बैंक ही नहीं, बल्कि कई रजिस्टर्ड नॉन-बैंकिंग कंपनियां भी एटीएम का संचालन करती हैं जिन्हें 'वाइट लेबल एटीएम' कहा जाता है। इनमें इंडिया1 पेमेंट (India1 Payments), टाटा इंडिकैश (Tata Indicash) और हिटाची पेमेंट सर्विसेज (Hitachi Payment Services) जैसी दिग्गज कंपनियां शामिल हैं। आप इन कंपनियों की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर प्रॉपर्टी से जुड़े अपने आवेदन ऑनलाइन सबमिट कर सकते हैं।

3. एटीएम लगवाने के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

  • प्रॉपर्टी पर एटीएम लगवाने की प्रक्रिया में लीगल वेरिफिकेशन बहुत जरूरी होता है। इसके लिए आपके पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:
  • प्रॉपर्टी के मालिकाना हक के कागजात (Registry Papers / Title Deed)
  • लेटेस्ट हाउस टैक्स रसीद या म्यूटेशन पेपर
  • प्रॉपर्टी का नक्शा (Blue Print) जिस पर स्पष्ट रूप से क्षेत्रफल दर्शाया गया हो
  • जमीन या दुकान के मालिक का पैन कार्ड और आधार कार्ड
  • पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ
  • यदि प्रॉपर्टी किसी और के साथ साझा (Joint) है, तो अन्य सह-मालिकों का नो-ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC)

4. हर महीने कितना किराया मिल सकता है?

  • प्रॉपर्टी से मिलने वाली कमाई पूरी तरह से आपकी लोकेशन की कमर्शियल वैल्यू पर निर्भर करती है। यदि आपकी जगह किसी बहुत व्यस्त मेट्रो सिटी के मुख्य बाजार या पॉश इलाके में है, तो किराया ₹40,000 से लेकर ₹60,000 प्रति माह तक भी मिल सकता है। वहीं, छोटे शहरों, कस्बों या ग्रामीण इलाकों में यह किराया ₹8,000 से ₹25,000 के आसपास हो सकता है। लोकेशन जितनी प्रीमियम होगी, मुनाफे का सौदा उतना ही बड़ा होगा।

5. लीगल एग्रीमेंट और अन्य शर्तें क्या होती हैं?

  • जब बैंक या एटीएम कंपनी आपकी प्रॉपर्टी को फाइनल कर लेती है, तो एक लीगल एग्रीमेंट साइन किया जाता है:
  • लंबे समय का अनुबंध: एटीएम लगवाने के लिए अमظूर पर 5 से 10 साल का लीज एग्रीमेंट (Lease Agreement) किया जाता है।
  • हर साल किराया बढ़ोतरी: अनुबंध में यह नियम आमतौर पर शामिल होता है कि हर साल किराए में 5% से 10% की बढ़ोतरी की जाएगी।
  • रखरखाव की जिम्मेदारी: सबसे बड़ी राहत यह है कि मशीन लगने के बाद उसकी देखरेख, उसमें कैश रिफिल करना, बिजली का बिल भरना, एसी का मेंटेनेंस और सुरक्षा गार्ड की तैनाती जैसी तमाम जिम्मेदारियां बैंक या संबंधित एटीएम ऑपरेटर कंपनी की ही होती हैं। प्रॉपर्टी मालिक को इन झंझटों से पूरी तरह मुक्ति मिलती है।
  • तो अगर आपके पास भी कोई ऐसी खाली जगह पड़ी है जिसका इस्तेमाल फिलहाल नहीं हो रहा है, तो आप आज ही संबंधित बैंकों या ऑपरेटर कंपनियों से संपर्क करके अपनी निष्क्रिय प्रॉपर्टी को एक बेहतरीन कमाई का जरिया बना सकते हैं।

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काव्या त्रिपाठी

काव्या त्रिपाठी

Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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