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डॉटर्स डे पर छलका कृति सेनन का दर्द, बोलीं- जब बेटियां सुरक्षित हों तभी मनाएं जश्न

डॉटर्स डे पर छलका कृति सेनन का दर्द, बोलीं- जब बेटियां सुरक्षित हों तभी मनाएं जश्न

समाज में महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है, और इस बार बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री कृति सेनन ने इस पर खुलकर अपनी बात रखी है। डॉटर्स डे के खास अवसर पर जहाँ एक तरफ लोग अपनी बेटियों के साथ तस्वीरें साझा कर रहे थे और सोशल मीडिया पर बधाई संदेश दे रहे थे, वहीं कृति सेनन ने इस दिन की प्रासंगिकता और इसके असल मायनों पर एक गहरा सामाजिक सवाल खड़ा किया है। उनका यह पोस्ट इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

एक ऐसी दुनिया की कल्पना जो अब भी अधूरा सपना है

कृति सेनन ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा और विचारोत्तेजक पोस्ट लिखा। इस पोस्ट की शुरुआत उन्होंने एक आम भारतीय लड़की की रोजमर्रा की जिंदगी और उसके डर से की। उन्होंने पाठकों से एक स्थिति की कल्पना करने को कहा—सोचिए आपकी बेटी रात में अकेले घर लौट रही है, और अचानक वह आपको फोन करके घबराई हुई आवाज में कहती है कि उसे शक है कि कुछ लोग उसका पीछा कर रहे हैं। वह बार-बार मुड़कर पीछे देख रही है और तभी उसके घर पहुँचने से पहले उसका फोन स्विच ऑफ हो जाता है। उस माता-पिता पर क्या बीतेगी?

यह सिचुएशन सिर्फ एक कल्पना नहीं, बल्कि देश की लाखों-करोड़ों लड़कियों की कड़वी सच्चाई है। घर से बाहर निकलते ही हर लड़की के मन में एक अनजाना डर और सतर्कता बनी रहती है।

रोजमर्रा की सावधानियां और छिनती हुई आजादी

अपने पोस्ट में कृति ने उन तमाम अनगिनत बातों का जिक्र किया, जो एक लड़की को घर से बाहर कदम रखते ही करनी पड़ती हैं। उन्होंने लिखा कि आज भी महिलाओं को अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई तरह के जतन करने पड़ते हैं:

  • घर से निकलते ही अपनी लाइव लोकेशन परिवार या दोस्तों के साथ शेयर करना।
  • पर्स में हमेशा पेपर स्प्रे या कोई सुरक्षा हथियार रखना।
  • पैदल चलने के बजाय अधिक पैसे खर्च करके कैब बुक करना, ताकि रास्ते में किसी खतरे से बचा जा सके।
  • असुरक्षित महसूस होने पर रास्ते भर किसी से फोन पर बात करते रहना।

ये सभी बातें दर्शाती हैं कि तकनीकी रूप से भले ही हम कितने भी आगे बढ़ गए हों, लेकिन महिलाओं के लिए सार्वजनिक स्थान आज भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो पाए हैं।

'मैं पहुँच गई हूँ' वाले फोन कॉल से कब मिलेगी मुक्ति?

कृति सेनन ने अपने इस भावुक संदेश में उस आम आदत का भी जिक्र किया, जिसे हर घर की बेटी निभाती है। सफर खत्म होने और घर पहुँचने के बाद माता-पिता को फोन करके यह कहना, 'पापा/मम्मी, मैं पहुँच गई हूँ।'

एक्ट्रेस ने उम्मीद जताई कि एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब बेटियों को अपनी सुरक्षित वापसी की सूचना देने के लिए इस तरह के फोन कॉल्स की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। उन्हें डर के साये में जीने के बजाय खुलकर और स्वतंत्र रूप से सांस लेने का हक मिलना चाहिए।

असल मायनों में कब मनेगा बेटी दिवस?

कृति ने अपने पोस्ट के अंत में एक बहुत बड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसी दुनिया की दरकार है जहाँ बेटियां:

  • रात के वक्त बिना किसी खौफ के अकेले घर लौट सकें।
  • अंधेरा होने के बाद भी किसी पार्क या खुली जगह पर सुकून से बैठ सकें।
  • अपनी मर्जी के कपड़े पहन सकें, बिना इस डर के कि कोई उन्हें घूर रहा है या ताने कस रहा है।
  • बिना किसी हिचकिचाहट और डर के पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल कर सकें।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जिस दिन देश की हर बेटी सार्वजनिक स्थानों पर खुद को पूरी तरह सुरक्षित महसूस करने लगेगी, असल मायनों में उसी दिन 'बेटी दिवस' या 'डॉटर्स डे' मनाने का कोई अर्थ होगा। केवल एक दिन सोशल मीडिया पर तस्वीरें पोस्ट कर देने से बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो जाती, इसके लिए समाज की मानसिकता और व्यवस्था दोनों को बदलना होगा।

सोशल मीडिया पर मिल रही है जबरदस्त सराहना

कृति सेनन का यह बेबाक और सच को आईना दिखाने वाला पोस्ट सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। आम जनता से लेकर कई अन्य सेलिब्रिटीज ने भी इस पोस्ट की सराहना की है। लोगों का कहना है कि एक बड़े प्लेटफॉर्म वाले कलाकार द्वारा इस तरह की गंभीर बात उठाना समाज में बदलाव की दिशा में एक अहम कदम है। वर्तमान समय में जब महिलाओं के खिलाफ अपराध के आंकड़े डराते हैं, तब ऐसे विचार समाज को आत्ममंथन करने पर मजबूर करते हैं।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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