90 के दशक की मशहूर बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन ने अपने करियर के चरम पर एक ऐसा साहसी निजी फैसला लिया था, जिसने उस समय की फिल्मी दुनिया और समाज का ध्यान खींचा था। मात्र 21 वर्ष की कानूनी उम्र पूरी करते ही उन्होंने अपनी चचेरी बहनों, पूजा और छाया को गोद ले लिया था, जिनकी उस समय उम्र क्रमशः 11 और 8 वर्ष थी। हाल ही में अपने जन्मदिन के मौके पर उन्होंने इस फैसले से जुड़े कई अनसुने पहलुओं, मीडिया की अटकलों और अपने बच्चों के साथ गहरे रिश्तों पर खुलकर बात की है।
90 के दशक में क्यों रखा था गोद लेने की बात को गोपनीय
रवीना टंडन ने एक साक्षात्कार में बताया कि उन्होंने 90 के दशक में बेटियों को गोद लेने की बात लंबे समय तक सार्वजनिक क्यों नहीं की थी। उस दौर की पीली पत्रकारिता और पत्रिकाओं की सनसनीखेज खबरों के डर से उन्होंने यह कदम बहुत ही चुपचाप उठाया था। अभिनेत्री के अनुसार, यदि वे उस समय इस बारे में खुलकर बतातीं, तो मीडिया में अवांछित और अपमानजनक अटकलें लगाई जा सकती थीं।
आरजे सिद्धार्थ कन्नन के साथ बातचीत में उन्होंने याद करते हुए कहा कि जब उन्होंने लड़कियों को गोद लिया था, तो शुरुआत में उन्होंने इस बारे में किसी से बात नहीं की, जब तक कि बेटियों ने अपनी 10वीं कक्षा की पढ़ाई पूरी नहीं कर ली। इसके बाद वे उनके साथ शूटिंग पर आने लगीं, तब लोगों ने पूछना शुरू किया कि ये लड़कियां कौन हैं। रवीना ने बताया कि उस समय पत्रिकाओं के संपादकों और रिपोर्टरों की सोच काफी संकीर्ण थी, और उन्हें डर था कि ऐसी खबरें छप सकती हैं कि अभिनेत्री को गुप्त रूप से कोई बच्चा हो गया है। इसी गंदले माहौल से बचने के लिए उन्होंने प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रखी थी।
अजीब अफवाहें और शादी को लेकर समाज की टिप्पणियां
रवीना के इस फैसले के बाद कई तरह की बेबुनियाद अफवाहें भी उड़ीं। जूम को दिए एक पुराने इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि कुछ लोगों ने यहाँ तक दावा कर दिया था कि ये बच्चियां उनकी अपनी गुप्त संतानें हैं जो शादी से पहले पैदा हुई थीं। रवीना ने इस बात पर कटाक्ष किया था कि जब वे खुद सिर्फ 21 साल की थीं और बच्चियां 11 तथा 8 साल की थीं, तो वे 11 या 12 वर्ष की उम्र में बच्चों की मां कैसे बन सकती हैं।
इसके अलावा, अभिनेत्री को यह भी सुनने को मिला कि 'भले-चंगे' रिश्तेदारों और शुभचिंतक आंटियों ने उनसे सवाल किया था कि अब उनसे शादी कौन करेगा क्योंकि वे अपने साथ 'अतिरिक्त बोझ' (excess baggage) लेकर चल रही हैं। इस पर रवीना का स्पष्ट रुख था कि जो व्यक्ति उनसे सच्चा प्यार करेगा, वह उनकी बेटियों, उनके कुत्तों, उनकी बिल्ली और उनके पूरे परिवार को स्वीकार करेगा। उन्होंने बताया कि जब उन्होंने अपने अब के पति और फिल्म वितरक अनिल थदानी को डेट करना शुरू किया था, तो उन्होंने अपनी इस शर्त को बहुत स्पष्ट रूप से रख दिया था कि वे अपने पूरे गिरोह यानी परिवार के साथ ही आएंगी। दोनों की शादी साल 2004 में हुई थी और उनके दो बच्चे राशा और रणबीरवर्धन हैं, जबकि पूजा और छाया अब विवाहित हैं और उनके अपने बच्चे भी हैं।
माता-पिता के निधन के बाद उठाया था बड़ा कदमपूजा और छाया को गोद लेने के पीछे की मुख्य वजह बताते हुए रवीना ने कहा कि जब उनके माता-पिता का निधन हो गया, तो उन्होंने देखा कि चचेरी बहनों को वह जीवन नहीं मिल पा रहा था जिसकी वे हकदार थीं। उन्होंने एनजीओ के लिए कई काम किए थे, लेकिन यहाँ उनके सामने दो ऐसी बच्चियां थीं जिनका जन्म उन्होंने खुद अपनी आँखों के सामने देखा था। इसलिए, जैसे ही वे कानूनी रूप से वयस्क हुईं, उन्होंने दोनों को अपने घर ले लिया और उनकी कानूनी अभिभावक बन गईं।
लहरें रेट्रो के साथ एक अन्य बातचीत में उन्होंने कहा कि गोद लेना जीवनभर की प्रतिबद्धता है, जिसमें रिश्ते, बंधन, प्यार और भावनाएं सब कुछ शामिल हैं। उनके बीच एक अटूट रिश्ता है और ये दोनों बड़ी बेटियां उनके छोटे बच्चों की बड़ी बहनें हैं।
बच्चों के साथ पीढ़ीगत अंतर और 46 की उम्र में नानी बनना
द टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए एक हालिया साक्षात्कार में रवीना ने बताया कि वे अपने बच्चों के साथ पीढ़ी के अंतर को कैसे पाटती हैं। उनके और उनके बच्चों—राशा, रणबीर और बड़ी बेटियों के बीच दोस्ती का रिश्ता है। वे सब मिलकर वन्यजीवों और प्रकृति से प्यार करते हैं, जंगल सफारी पर जाते हैं और जानवरों के प्रति समान लगाव रखते हैं। हालाँकि, तकनीक के मामले में वे आज भी अपने बेटा-बेटी की मदद लेती हैं।
मिस मालिनी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने 46 वर्ष की आयु में नानी बनने के अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि तकनीकी रूप से जब नानी शब्द आता है, तो लोग सोचते हैं कि महिला 70-80 वर्ष की होगी। चूंकि उन्होंने 21 साल की उम्र में बेटियों को अपनाया था और उनकी सबसे बड़ी बेटी तब 11 साल की थी, इसलिए उनके बीच केवल 11 साल का ही वास्तविक उम्र का अंतर है। अपनी सबसे बड़ी बेटी के साथ उनका रिश्ता एक दोस्त जैसा है, भले ही वे तकनीकी रूप से मां जैसी भूमिका में हों।