अभिनेत्री रीता भादुड़ी की जयंती पर जानिए उनके फिल्मी करियर, 'जूली', 'राजा' फिल्मफेयर अवॉर्ड और टीवी शो से जुड़े खास तथ्य।
अभिनेत्री रीता भादुड़ी ने मुख्य भूमिकाओं में नजर आए बिना अपनी अभिनय क्षमता के दम पर सिनेमा और टेलीविजन जगत में एक विशिष्ट पहचान बनाई। अपने लंबे करियर में उन्होंने लगभग 70 फिल्मों और 30 से अधिक टेलीविजन धारावाहिकों में काम किया। पर्दे पर उन्हें आमतौर पर मां, बहन, दोस्त, सास और दादी जैसे सहायक किरदारों में देखा गया, लेकिन उनकी सहज अदाकारी ने हर भूमिका को दर्शकों के बीच अमर बना दिया।
रीता भादुड़ी का जन्म 4 नवंबर 1955 को उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में हुआ था। उनके घर में अभिनय का माहौल पहले से ही था, क्योंकि उनकी मां चंद्रिमा भादुड़ी भी एक अभिनेत्री थीं। अभिनय के प्रति अपने शौक को आगे बढ़ाते हुए रीता ने पुणे स्थित प्रतिष्ठित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से अभिनय की औपचारिक शिक्षा प्राप्त की। उन्होंने अपने अभिनय सफर की शुरुआत साल 1968 में आई फिल्म 'तेरी तलाश में' से की थी। हालांकि, उन्हें वास्तविक और व्यापक पहचान साल 1975 में रिलीज हुई फिल्म 'जूली' से मिली। इस फिल्म में उन्होंने मुख्य किरदार की सहेली की भूमिका निभाई थी और उन पर फिल्माया गया गाना 'ये रातें नई पुरानी' काफी लोकप्रिय हुआ था। छोटी भूमिका होने के बावजूद उन्होंने अपने अभिनय से दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी।
प्रमुख फिल्में और क्षेत्रीय सिनेमा में योगदान
'जूली' की सफलता के बाद रीता भादुड़ी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उन्होंने सत्तर और अस्सी के दशक में 'सावन को आने दो', 'विश्वनाथ', 'अनुरोध', 'अंखियों के झरोखों से', 'किताब' और 'गोपाल कृष्ण' जैसी कई फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। हिंदी के अलावा उन्होंने दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी काम किया। मलयालम फिल्म 'कन्याकुमारी' में महान अभिनेता कमल हासन के साथ उनकी भूमिका ने भी खासी चर्चा बटोरी थी। इसके अलावा उन्होंने गुजराती और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों में भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। नब्बे के दशक में वह बड़े पर्दे पर 'बेटा', 'हीरो नंबर 1', 'कभी हां कभी ना', 'तमन्ना' और 'क्या कहना' जैसी चर्चित फिल्मों में नजर आईं, जहां उनके परिपक्व अभिनय ने फिल्म की कहानी को मजबूती दी।
फिल्म 'राजा' के लिए मिला फिल्मफेयर पुरस्कार
साल 1995 में रिलीज हुई फिल्म 'राजा' रीता भादुड़ी के फिल्मी करियर का एक बड़ा मील का पत्थर साबित हुई। इस फिल्म में उन्होंने माधुरी दीक्षित और संजय कपूर के साथ स्क्रीन साझा की थी। फिल्म में उनके शानदार और प्रभावी अभिनय को समीक्षकों और दर्शकों दोनों ने सराहा, जिसके चलते उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इसके बाद भी उन्होंने 'दिल विल प्यार व्यार' जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का हुनर दिखाया। उन्होंने अपने पूरे करियर से यह साबित किया कि सिनेमा में किरदार की लंबाई मायने नहीं रखती, बल्कि अभिनय की गहराई ही कलाकार को लंबे समय तक दर्शकों के दिलों में जिंदा रखती है।
टेलीविजन पर तीन दशकों लंबी सफल पारी
फिल्मी पर्दे के साथ-साथ रीता भादुड़ी ने छोटे पर्दे यानी टेलीविजन की दुनिया में भी तीन दशकों तक राज किया। उन्होंने 'अमानत', 'हसरतें', 'एक महल हो सपनों का', 'कुमकुम', 'छोटी बहू', 'खिचड़ी' और 'साराभाई वर्सेस साराभाई' जैसे बेहद लोकप्रिय और लंबे समय तक चलने वाले शोज में काम किया। उनके अभिनय की यह खूबी थी कि वह हर धारावाहिक के मिजाज में आसानी से ढल जाती थीं। टेलीविजन पर उनके आखिरी और सबसे चर्चित किरदारों में स्टार भारत के लोकप्रिय शो 'निमकी मुखिया' की इमरती देवी शामिल थीं, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा उन्होंने साल 2017 में आई गुजराती फिल्म 'तंबूरो' में भी अभिनय किया था। अपने अभिनय से पीढ़ियों का मनोरंजन करने वाली यह प्रतिभावान अभिनेत्री 17 जुलाई 2018 को 62 वर्ष की आयु में इस दुनिया को अलविदा कह गई, लेकिन उनके निभाए गए किरदार आज भी याद किए जाते हैं।