भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी ओहायो गवर्नर पद के मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एमी एक्टन से करीब 6 प्रतिशत मतों से हार गए। जानिए हार की मुख्य वजहें।
डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन के बावजूद भारतीय मूल के नेता को मिला झटका
भारतीय मूल के अमेरिकी राजनेता विवेक रामास्वामी को अमेरिका के मिडटर्म चुनावों में ओहायो राज्य के गवर्नर पद के लिए हार का सामना करना पड़ा है। उन्हें अपनी मुख्य प्रतिद्वंद्वी और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्टन के हाथों लगभग छह प्रतिशत मतों से शिकस्त मिली है। यह चुनाव विवेक रामास्वामी के राजनीतिक करियर का पहला बड़ा प्रशासनिक चुनाव था, जिसमें उन्हें यह परिणाम देखना पड़ा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी सहयोगी माने जाने वाले रामास्वामी का यह चुनाव हारना रिपब्लिकन पार्टी और विशेषकर ट्रंप खेमे के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसके साथ ही, ओहायो राज्य अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का भी गृह राज्य है, जिसके कारण इस चुनाव पर राष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष नजर थी।
विवादित विज्ञापन और निजी हमलों का असर
राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, विवेक रामास्वामी की हार के पीछे उनके चुनाव अभियान के दौरान अपनाई गई कुछ रणनीतियां और विवाद रहे हैं। अक्टूबर महीने में उनके द्वारा जारी किए गए एक चुनावी विज्ञापन को लेकर काफी तीखी बहस छिड़ गई थी। इस विज्ञापन में उन्होंने एमी एक्टन की अलग रह चुकीं मां, डोना आर्थर को प्रदर्शित करते हुए मतदाताओं से अपनी बेटी को वोट न देने की अपील की थी। इस विज्ञापन की शैली को कई मतदाताओं और विश्लेषकों ने नकारात्मक प्रचार के रूप में देखा। इसके परिणाम स्वरूप ओहायो के गवर्नर माइक डीवाइन और सीनेटर जॉन हस्टेड जैसे वरिष्ठ रिपब्लिकन नेताओं ने भी उनके चुनाव प्रचार से दूरी बना ली थी।
एमी एक्टन ने सार्वजनिक रूप से साझा किया था कि वे पिछले करीब 50 वर्षों से अपनी मां के संपर्क में नहीं थीं और उन्होंने अपने बचपन के कठिन पारिवारिक अनुभवों का जिक्र किया था। विश्लेषकों का मानना है कि इस पारिवारिक पृष्ठभूमि और निजी मामलों को चुनाव में घसीटने से मतदाताओं की सहानुभूति एमी एक्टन के पक्ष में चली गई, जो रामास्वामी के पक्ष में नहीं गया।
सुरक्षा गार्ड से जुड़े विवाद और प्रशासनिक अनुभव की कमी
चुनावी सरगर्मी के बीच इस साल जनवरी में रामास्वामी के परिवार की सुरक्षा में तैनात एक निजी सुरक्षा गार्ड की संघीय ड्रग्स तस्करी के मामलों में गिरफ्तारी हुई थी, जिससे उनके अभियान को अचानक बड़ा झटका लगा था। इसके बाद यह भी सामने आया था कि उनके कई अन्य सुरक्षा गार्ड्स के पास ओहायो राज्य में सशस्त्र सुरक्षा के रूप में कार्य करने का उचित लाइसेंस नहीं था, जिससे इस सुरक्षा चूक को लेकर भी सवाल खड़े हुए और राजनीतिक गलियारों में मामला काफी गर्माया।
दूसरी ओर, एमी एक्टन का ओहायो राज्य में प्रशासनिक अनुभव भी उनकी जीत का एक बड़ा कारण बना। वे कोविड-19 महामारी के दौरान ओहायो की हेल्थ डायरेक्टर रह चुकी थीं, जिसके कारण राज्य की जनता के बीच उनकी एक मजबूत और जानी-पहचानी पहचान थी। इसके विपरीत, विवेक रामास्वामी के पास राजनीति का लंबा प्रशासनिक अनुभव नहीं था, और राष्ट्रपति ट्रंप की करीबी नजदीकी के बावजूद वे इसका पूरा लाभ नहीं उठा सके।
डेमोक्रेटिक लहर और सत्ता विरोधी रुझान
ओहायो राज्य की राजनीतिक पृष्ठभूमि का विश्लेषण करें तो पिछले लगभग 20 वर्षों से वहां गवर्नर पद पर रिपब्लिकन पार्टी का कब्जा रहा है। हालांकि, इस बार के मिडटर्म चुनावों में अमेरिकी संसद और कई अन्य राज्यों की तरह ओहायो में भी सत्ता विरोधी रुझान और डेमोक्रेटिक पार्टी के पक्ष में एक स्पष्ट लहर देखने को मिली। इस राजनीतिक बदलाव और डेमोक्रेटिक लहर का सीधा फायदा एमी एक्टन को मिला, जिसके चलते वे रिपब्लिकन गढ़ माने जाने वाले ओहायो में जीत दर्ज करने में सफल रहीं।