कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया से जुड़ा बहुचर्चित मामला अब एक नए और बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की परतें उघाड़ने के लिए अब तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। जांच एजेंसी के लिए अब सीसीटीवी फुटेज सबसे बड़ा हथियार बन चुके हैं। पुलिस अधिकारियों और इस प्रकरण से जुड़े तमाम चेहरों की हर एक हरकत अब कैमरों की जद में आ चुकी है, जो आने वाले दिनों में कई बड़े खुलासे कर सकती है।
एसआईटी की रडार पर हर एक मूवमेंट, खंगाले जा रहे हैं कैमरे
जबलपुर में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) अंजना तिवारी के नेतृत्व में गठित विशेष जांच दल (SIT) इस मामले की तह तक जाने के लिए दिन-रात जुटी हुई है। जांच टीम का मुख्य फोकस इस बात पर है कि पूर्व सीएसपी सहित पुलिस विभाग के अन्य अधिकारी किस समय कहां मौजूद थे और उनकी गतिविधियां क्या थीं।
जांच अधिकारियों का मानना है कि बयानों में हेरफेर या छिपाव की गुंजाइश हो सकती है, लेकिन डिजिटल सबूत यानी सीसीटीवी कैमरे झूठ नहीं बोलते। यही वजह है कि प्रासंगिक स्थानों के फुटेज को सुरक्षित कर लिया गया है और उनकी बारीकी से जांच की जा रही है।
जेल पहुंची एसआईटी, आरोपियों से हुई आमने-सामने पूछताछ
जाग की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए हाल ही में न्यायालय से विधिवत अनुमति प्राप्त करने के बाद एएसपी अंजना तिवारी ने कटनी जिला जेल का रुख किया। वहां उन्होंने प्रकरण से जुड़े दोनों मुख्य आरोपियों से लंबी पूछताछ की।
सूत्रों के अनुसार, एसआईटी यह जानने की कोशिश कर रही है कि जब यह पूरा मामला दर्ज हुआ, उसके बाद पुलिसिया कार्रवाई किस दिशा में आगे बढ़ी। इसके अलावा, आरोपियों के संपर्क में कौन-कौन लोग थे और कथित जमीन सौदे की पटकथा असल में कहां से लिखी गई थी, इन तमाम सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
डिफॉल्ट बेल के पेंच को भी सुलझाएगी टीम
इस पूरी जांच में 'डिफॉल्ट बेल' का बिंदु सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसी इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां बनीं कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर चालान पेश नहीं किया जा सका, जिसके चलते आरोपियों को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिल गया।
- चालान में देरी क्यों हुई?: क्या यह प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी?
- दस्तावेजी मिलान: चालान तैयार होने से लेकर अदालत में उसकी प्रस्तुति तक की टाइमलाइन को खंगाला जा रहा है।
- जिम्मेदारों की भूमिका: इस प्रक्रिया में शामिल रहे हर एक शख्स की भूमिका की समीक्षा की जा रही है।
जमीन के कागजात और भुगतान के हर ट्रांजैक्शन की होगी स्क्रूटनी
यह पूरा विवाद एक कथित जमीन सौदे से भी जुड़ा हुआ है। एसआईटी के जांच दायरे में नामांतरण रिकॉर्ड, रजिस्ट्री के कागजात, पैसों का लेन-देन और भुगतान से जुड़े तमाम दस्तावेज आ चुके हैं। जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि यह जमीन का सौदा किन परिस्थितियों में तय हुआ था, इसमें पैसों का फ्लो किस प्रकार हुआ और पर्दे के पीछे से कौन लोग इसे संचालित कर रहे थे। इन तमाम दस्तावेजों को अब जेल में दर्ज बयानों और सीसीटीवी फुटेज के साथ क्रॉस-वेरीफाई किया जा रहा है।
बयानों और साक्ष्यों का होगा महा-मिलान
एसआईटी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि जांच का अगला चरण बयानों के सत्यापन का है। आरोपियों के अलावा मामले से जुड़े अन्य गवाहों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। इन बयानों को दस्तावेजों, तकनीकी साक्ष्यों (सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल्स) और अब तक सामने आए आरोपों के साथ आमने-सामने रखकर परखा जाएगा।
"जाग टीम किसी भी पहलू को अनछुआ नहीं छोड़ रही है। सीसीटीवी फुटेज से मिलने वाले तथ्यों और गवाहों के बयानों में यदि कोई विरोधाभास निकलता है, तो उसे आधार बनाकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।"
आगे क्या होगा?
कटनी के इस हाई-प्रोफाइल मामले में जिस तरह से एसआईटी वैज्ञानिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को एक-दूसरे से जोड़ रही है, उससे आने वाले दिनों में कुछ और नाम सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता। जनता और कानूनी जानकारों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि सीसीटीवी के ये फुटेज न्याय की प्रक्रिया में कितने कारगर साबित होते हैं।
