वाराणसी में देव दीपावली और घाटों की भव्यता के बीच इन दिनों प्रकृति का एक अलग ही रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। मां गंगा का बढ़ता जलस्तर एक बार फिर से तटीय इलाकों के रहवासियों की नींद उड़ाने लगा है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख मैदानी इलाकों में हो रही मौसमी हलचल और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से छोड़े जा रहे पानी ने काशी के घाटों की तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। आलम यह है कि गंगा और उनकी सहायक नदी वरुणा का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे प्रशासन ने भी अपनी कमर कस ली है और मैदानी इलाकों से लेकर घाटों तक निगरानी बढ़ा दी गई है।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़े बढ़ा रहे हैं चिंता
केंद्रीय जल आयोग (सीडब्ल्यूसी) के राजघाट स्थित आधिकारिक गेज स्टेशन से प्राप्त ताजा आंकड़ों के अनुसार, स्थिति पर पैनी नजर रखी जा रही है। गुरुवार सुबह आठ बजे दर्ज किए गए आंकड़ों के मुताबिक, वाराणसी में गंगा का जलस्तर बढ़कर 70.56 मीटर तक पहुंच चुका है। जानकारों और जल विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंकड़ा चेतावनी के बिंदु के बेहद करीब है और यदि यही रफ्तार बनी रही, तो स्थिति गंभीर हो सकती है।
गंगा के जलस्तर में हो रही इस बेतहाशा बढ़ोतरी का मुख्य कारण ऊपरी हिस्सों से आ रहा पानी है। जल आयोग के अधिकारियों का कहना है कि हर घंटे जलस्तर में हो रहे बदलाव को लगातार रिकॉर्ड किया जा रहा है और इसकी सूचना तुरंत संबंधित विभागों व आपदा प्रबंधन इकाइयों को दी जा रही है ताकि समय रहते पुख्ता इंतजाम किए जा सकें।
कानपुर बैराज से छोड़ा गया 6 लाख क्यूसेक पानी
स्थिति को और अधिक संवेदनशील बनाने वाली खबर उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और मध्य छोर से आ रही है। कानपुर बैराज से भारी मात्रा में पानी डिस्चार्ज किए जाने की आधिकारिक पुष्टि हुई है। मिली जानकारी के मुताबिक, कानपुर बैराज से करीब 6 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है, जो इस समय तीव्र गति से बहाव के साथ आगे बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों का आकलन है कि कानपुर बैराज से छोड़ा गया यह विशाल जलराशि अगले तीन दिनों के भीतर वाराणसी पहुंचेगी। जैसे ही यह पानी काशी की सीमा में प्रवेश करेगा, गंगा के जलस्तर में अचानक एक भारी उछाल देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि स्थानीय प्रशासन और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
घाटों का संपर्क टूटा, डूबने लगे निचले हिस्से
गंगा के बढ़ते जलस्तर का सीधा असर वाराणसी के विश्व प्रसिद्ध घाटों पर साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। प्रसिद्ध पक्का घाटों के ऊपरी हिस्सों तक पानी पहुंच चुका है, जिसके चलते कई घाटों का आपस में संपर्क मार्ग बाधित हो गया है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों को सुरक्षा के लिहाज से पानी के करीब जाने से सख्त मनाही कर दी गई है।
- अस्सी घाट से लेकर दशाश्वमेध और मणिकर्णिका घाट तक पानी का दायरा लगातार फैल रहा है।
- नाविकों को गहरे पानी में नावें न ले जाने के कड़े निर्देश दिए गए हैं।
- घाटों पर सुरक्षा के मद्देनजर जल पुलिस और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमों को तैनात कर दिया गया है।
- निचले इलाकों और वरुणा के तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी जारी कर दी गई है।
वरुणा नदी के तेवर भी हुए तीखे
केवल मुख्य गंगा ही नहीं, बल्कि उनकी प्रमुख उपनदी वरुणा का जलस्तर भी तेजी से ऊपर उठ रहा है। वरुणा पार के इलाकों जैसे ढढिया और सरैया जैसे निचले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के दिलों में बाढ़ की पुरानी डरावनी यादें ताजा होने लगी हैं। वरुणा का पानी जब उफनता है, तो इसके आसपास की बस्तियों में जलभराव की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। स्थानीय लोग खुद ही अपने स्तर पर एहतियाती कदम उठाने लगे हैं ताकि किसी भी अनहोनी से बचा जा सके।
प्रशासनिक तैयारियां और एहतियाती कदम
संभावित बाढ़ की स्थिति को भांपते हुए जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। राहत और बचाव कार्यों से जुड़े सभी विभागों के अधिकारियों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं या उन्हें मुख्यालय पर रहने के निर्देश दिए गए हैं। बाढ़ राहत चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है और वहां पर मेडिकल टीमों के साथ-साथ जरूरी रसद सामग्री की व्यवस्था की जा रही है।
प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रशासन द्वारा जारी किए गए हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करें। अगले तीन दिन वाराणसी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं, क्योंकि कानपुर बैराज का पानी जब यहां पहुंचेगा, तब यह तय होगा कि जलस्तर खतरे के निशान को पार करेगा या स्थिति नियंत्रण में बनी रहेगी।