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गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण की सुगबुगाहट तेज, जाम से मिलेगी मुक्ति

गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग पर ओवरब्रिज निर्माण की सुगबुगाहट तेज, जाम से मिलेगी मुक्ति

उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र में यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने और आम जनता को रोजाना की परेशानियों से राहत दिलाने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। इसी कड़ी में गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग पर दुल्लहपुर इलाके में लगने वाले लंबे और थका देने वाले ट्रैफिक जाम से स्थायी मुक्ति दिलाने के लिए ओवरब्रिज के निर्माण को लेकर सुगबुगाहट काफी तेज हो गई है। हाल ही में स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया और तकनीकी पहलुओं पर विचार-विमर्श किया है।

रोजाना का झंझट: क्यों जरूरी है दुल्लहपुर में ओवरब्रिज?

गाजीपुर और आजमगढ़ को जोड़ने वाला यह प्रमुख मार्ग हमेशा व्यस्त रहता है। इस रास्ते से रोजाना हजारों छोटे-बड़े वाहन, व्यावसायिक ट्रक और यात्री बसें गुजरती हैं। लेकिन दुल्लहपुर बाजार और रेलवे क्रॉसिंग के पास स्थिति तब बेहद विकट हो जाती है जब वाहनों का दबाव बढ़ता है। यहाँ लगने वाला जाम न केवल आम नागरिकों का कीमती समय बर्बाद करता है, बल्कि कई बार मेडिकल इमरजेंसी के दौरान एम्बुलेंस तक इस बेकाबू ट्रैफिक में फंस जाती हैं।

स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों की लंबे समय से यह मांग रही है कि इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकाला जाए। सड़क के दोनों ओर फैली बेतरतीब दुकानें, अतिक्रमण और रेलवे गेट बंद होने के कारण यहाँ वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ऐसे में ओवरब्रिज का निर्माण ही इस समस्या का एकमात्र और सबसे प्रभावी हल नजर आता है।

प्रशासनिक सक्रियता: एसडीएम ने किया स्थलीय निरीक्षण

समस्या की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय उपजिलाधिकारी (SDM) ने खुद मोर्चा संभाला है। हाल ही में उन्होंने गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग पर दुल्लहपुर क्षेत्र का दौरा किया और संभावित ओवरब्रिज निर्माण स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) और अन्य संबंधित विभागों के तकनीकी विशेषज्ञ भी मौजूद रहे।

निरीक्षण के दौरान एसडीएम ने सड़क की चौड़ाई, आसपास की जमीनों की स्थिति, यूटिलिटी शिफ्टिंग (बिजली के खंभे, पानी की पाइपलाइन आदि) और ट्रैफिक डायवर्जन की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की। अधिकारियों ने इस बात का जायजा लिया कि निर्माण कार्य शुरू होने के दौरान आम जनता को कम से कम असुविधा का सामना करना पड़े।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु:

  • यातायात का दबाव: व्यस्ततम घंटों में वाहनों की आवाजाही का आकलन करना।
  • अतिक्रमण हटाना: सड़क के दोनों किनारों पर अवैध कब्जों को चिन्हित करना।
  • तकनीकी feasibility: ओवरब्रिज की लंबाई और एप्रोच रोड के लिए जमीन की उपलब्धता।
  • जनसुविधा: निर्माण कार्य के दौरान वैकल्पिक रास्तों की रूपरेखा तैयार करना।

व्यापारियों और आम जनता में जगी उम्मीद

प्रशासनिक स्तर पर हो रही इन गतिविधियों से स्थानीय लोगों और व्यापारियों में एक नई उम्मीद जाग उठी है। दशकों से इस समस्या से जूझ रहे लोगों का मानना है कि यदि यह ओवरब्रिज जल्द बनकर तैयार हो जाता है, तो न केवल दुल्लहपुर की तस्वीर बदलेगी, बल्कि गाजीपुर और आजमगढ़ के बीच सफर करना भी काफी आसान और आरामदायक हो जाएगा।

व्यापार मंडल के प्रतिनिधियों का कहना है कि जाम के कारण उनके व्यापार पर भी बुरा असर पड़ता है, क्योंकि ग्राहक बाजार में आने से कतराते हैं। ओवरब्रिज बनने से बाजार में आवागमन सुगम होगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी पंख लगेंगे।

आगे की राह और चुनौतियां

यद्यपि ओवरब्रिज निर्माण का यह प्रस्ताव बेहद सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहा है, फिर भी इसके धरातल पर उतरने से पहले कई प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। डीपीआर (Detailed Project Report) तैयार करने, बजट आवंटन और भूमि अधिग्रहण जैसी प्रक्रियाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा करना प्रशासन के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।

हालांकि, जिस तरह से स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में तत्परता दिखाई है, उससे यह साफ है कि फाइलें अब तेजी से दौड़ रही हैं। आने वाले दिनों में इस प्रोजेक्ट को लेकर और भी महत्वपूर्ण घोषणाएं होने की उम्मीद है। गाजीपुर-आजमगढ़ मार्ग पर सफर करने वाले लाखों यात्रियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि कब कागजी कार्रवाई पूरी होकर असल निर्माण कार्य जमीन पर शुरू होता है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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