गुरुग्राम के सेक्टर-50 स्थित आदमपुर झाड़सा गांव इन दिनों एक बड़े धार्मिक और प्रशासनिक टकराव का केंद्र बन चुका है। यहां स्थित ऐतिहासिक बाबा बालकनाथ मंदिर, गोशाला और समाधि स्थल पर हाल ही में चली बुलडोजर कार्रवाई के खिलाफ स्थानीय ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों का गुस्सा फूट पड़ा है। रविवार को इस ध्वस्तीकरण के विरोध में एक विशाल महापंचायत का आयोजन किया गया, जिसमें प्रशासन के खिलाफ कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी गई है।
100 से 150 साल पुराना है मंदिर और समाधि स्थल
इस पूरे विवाद के केंद्र में स्थित मंदिर को लेकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का दावा है कि यह कोई अवैध निर्माण नहीं, बल्कि 100 से 150 साल पुराना प्राचीन धार्मिक स्थल है। तिजारा के विधायक महंत बालकनाथ और स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह जमीन बहुत पहले पंचायत द्वारा पूजा-पाठ और धार्मिक कार्यों के लिए दान में दी गई थी। इस स्थल पर लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है, और इसे अचानक इस तरह से ध्वस्त किए जाने से श्रद्धालुओं में भारी रोष व्याप्त है।
कार्रवाई के तुरंत बाद ग्रामीणों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन की रणनीति बनाई और 11 सदस्यीय संघर्ष समिति का गठन किया गया। इस समिति में 360 गांवों के महेंद्र सिंह ठाकरान, वजीराबाद के पूर्व सरपंच सूबे सिंह बोहरा, प्रदीप जेलदार, संदीप ठाकरान, सुरेंद्र ठाकरान, भगत ठाकरान, सोनू ठाकरान और नवीन जैसे प्रमुख चेहरे शामिल हैं। समिति के सदस्यों ने घटनास्थल का दौरा कर तोड़फोड़ की कड़ी निंदा की थी।
महापंचायत में उमड़ी भीड़, 360 खाप के प्रधान ने की अध्यक्षता
रविवार को आयोजित इस महापंचायत की अध्यक्षता 360 खाप के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान ने की। इस सभा में न केवल आसपास के दर्जनों गांवों के ग्रामीण और मौजिज लोग शामिल हुए, बल्कि कई संत-महात्मा और जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण भारद्वाज ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। वक्ताओं ने एक स्वर में इस कार्रवाई को सनातन आस्था पर सीधा प्रहार बताया और चेतावनी दी कि इसे किसी भी कीमत पर सहन नहीं किया जाएगा।
ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने भारी पुलिस बल की तैनाती करके लगभग 16 घंटे तक यह विध्वंस अभियान चलाया। इस दौरान शिव मंदिर को छोड़कर परिसर के भीतर बने अन्य पांच मंदिरों, गोशाला और समाधि स्थल को नेस्तनाबूद कर दिया गया। यही नहीं, महापंचायत में यह भी गंभीर आरोप लगाया गया कि कार्रवाई के दौरान मूर्तियों को रातों-रात हटा दिया गया और गोशाला में मौजूद 35 गायों व बछड़ों को जबरन कार्टरपुरी गोशाला में शिफ्ट कर दिया गया।
प्रशासन के सामने रखी गईं तीन मुख्य मांगें
महापंचायत के दौरान सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास कर प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिन्हें पूरा करने के लिए एक निश्चित समयसीमा का संकेत दिया गया है:
- मंदिर का पुनर्निर्माण: तोड़े गए सभी धार्मिक ढांचों और मंदिरों का उसी स्थान पर दोबारा निर्माण कराया जाए।
- शिकायतें वापस हों: इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ग्रामीणों के खिलाफ पुलिस या प्रशासन द्वारा दी गई सभी शिकायतें तत्काल प्रभाव से वापस ली जाएं।
- गोधन की वापसी: गोशाला से हटाई गई सभी 35 गायों और बछड़ों को वापस उसी स्थान पर लाया जाए।
प्रशासन का अपना पक्ष और कानूनी तर्क
दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर जिला प्रशासन और संबंधित अधिकारियों का अपना अलग प्रशासनिक दृष्टिकोण है। अधिकारियों का तर्क है कि जिस जमीन पर यह निर्माण था, वह करीब चार एकड़ सरकारी जमीन है। प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमण हटाने से पहले पिछले दो महीनों से लगातार नोटिस दिए जा रहे थे। जब निर्धारित नोटिस अवधि समाप्त हो गई और किसी प्रकार का संतोषजनक जवाब या दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, तब नियमानुसार यह संयुक्त कार्रवाई (एंटी-एनक्रोचमेंट ड्राइव) अंजाम दी गई।
अगला कदम: डीसी से लेकर मुख्यमंत्री तक पहुंचेगा मामला
महापंचायत में तय किया गया है कि इन मांगों को मनवाने के लिए एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही जिला उपायुक्त (डीसी) से मुलाकात करेगा। यदि स्थानीय स्तर पर कोई सकारात्मक समाधान नहीं निकलता है, तो इस मामले की आधिकारिक शिकायत सीधे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से की जाएगी। इस आंदोलन ने गुरुग्राम के राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक तूल पकड़ सकता है।