हरियाणा और हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हथनीकुंड बैराज क्षेत्र इन दिनों एक गंभीर और चिंताजनक घटना को लेकर चर्चा के केंद्र में है। यहाँ भारतीय सेना के विशेष बलों द्वारा किए जा रहे एक नियमित सैन्य अभ्यास के दौरान बड़ा हादसा हो गया, जिसने पूरे सुरक्षा तंत्र को सकते में डाल दिया है। यमुना नदी के उग्र और तेज बहाव के बीच बाढ़ से बचाव (फ्लड रेस्क्यू) का यह युद्धाभ्यास चल रहा था, तभी एक अप्रत्याशित तकनीकी या प्राकृतिक त्रुटि के कारण स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो गई। इस दुर्घटना में सेना के पांच जवान पानी के तेज बहाव की चपेट में आ गए, जिनमें से तीन ने सूझबूझ और अपनी असाधारण शारीरिक क्षमता के बल पर सुरक्षित बाहर आने में सफलता हासिल की, लेकिन दो विशिष्ट कमांडो अभी भी लापता बने हुए हैं।
कैसे घटा यह भयानक हादसा? जानिए घटनास्थल की पूरी क्रूर सच्चाई
प्राप्त पुख्ता जानकारियों के अनुसार, यह पूरी घटना मंगलवार को उस समय सामने आई जब सेना की प्रतिष्ठित 'वन पैरा स्पेशल फोर्स' (1 Para SF) के जवान यमुना नदी के विकराल रूप के बीच अपनी सामरिक ट्रेनिंग को अंजाम दे रहे थे। यह अभ्यास केवल एक सामान्य एक्सरसाइज नहीं था, बल्कि किसी भी प्राकृतिक आपदा या आपातकालीन बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जवानों को युद्ध स्तर पर तैयार करने का एक अहम हिस्सा था।
ट्रेनिंग प्रोटोकॉल के तहत जवानों को मोटर बोट के जरिए पानी के बहाव को मापते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन का अभ्यास करना था। हालांकि, नदी के अंदर पानी के वेग और भंवर (Undercurrents) का अंदाजा लगाना उस वक्त भारी पड़ गया। देखते ही देखते सेना की मोटर बोट अनियंत्रित होकर उस खतरनाक क्षेत्र में जा पहुंची, जिसे आधिकारिक तौर पर 'डेंजर जोन' घोषित किया गया है। नदी के उस हिस्से में पानी का दबाव और बहाव इतना तीव्र था कि मोटर बोट पलक झपकते ही पलट गई और उसमें सवार सभी जवान नदी के ठंडे और मटमैले पानी में समा गए।
तैरकर बाहर आए तीन जवान, मौत को दी मात
हादसा इतना अचानक हुआ कि संभलने का मौका तक नहीं मिला। बोट के पलटते ही सभी जवान पानी के तेज बहाव में बहने लगे। गनीमत यह रही कि 'पैरा स्पेशल फोर्स' के कमांडोज का शारीरिक और मानसिक प्रशिक्षण बेहद कठोर होता है, जिसके कारण उन्होंने विकट परिस्थिति में भी हिम्मत नहीं हारी।
- नाव में मौजूद तीन जवानों ने अपनी ट्रेनिंग और सर्वाइवल स्किल्स का बेहतरीन परिचय दिया।
- पानी के भीषण बहाव से लड़ते हुए वे लगभग 600 मीटर की लंबी दूरी तक तैरकर सुरक्षित किनारे पर पहुँचने में कामयाब रहे।
- इन तीनों जवानों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद सुरक्षित निगरानी में रखा गया है।
- लेकिन दुर्भाग्यवश, दल के अन्य दो कमांडो तेज बहाव और पानी के नीचे छिपे खतरों की वजह से लापता हो गए।
युद्ध स्तर पर जारी है लापता कमांडोज की तलाश और सर्च ऑपरेशन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और सेना के वरिष्ठ अधिकारियों में हड़कंप मच गया। बिना एक पल गंवाए तुरंत प्रभाव से एक विशाल सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन (Search Operation) लॉन्च किया गया। हथनीकुंड बैराज के आसपास के इलाकों में यमुना नदी के बहाव की दिशा में विशेष टीमों को तैनात कर दिया गया है।
सुरक्षा एजेंसियों की ओर से गोताखोरों (Divers) की मदद ली जा रही है। इसके साथ ही, आधुनिक उपकरणों, ड्रोन कैमरों और वाटर स्कूटरों की सहायता से नदी के चप्पे-चप्पे को खंगाला जा रहा है ताकि लापता दोनों कमांडोज का सुराग लगाया जा सके। बैराज के गेट्स के पास भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है, क्योंकि अंदेशा जताया जा रहा है कि पानी के तेज बहाव के कारण जवान किसी गहरे हिस्से या बैराज के स्ट्रक्चर के पास फंस सकते हैं।
प्रशासन और सैन्य अधिकारियों की पैनी नजर
इस हादसे के बाद से ही हथनीकुंड बैराज और उसके आसपास के क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और सैन्य अधिकारियों का जमावड़ा लगा हुआ है। सेना के उच्च अधिकारी खुद पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। हर घंटे की रिपोर्ट दिल्ली और कमांड मुख्यालय तक पहुंचाई जा रही है। मौसम और नदी के लगातार बदलते मिजाज के कारण बचाव अभियान में कुछ तकनीकी अड़चनें जरूर आ रही हैं, लेकिन रेस्क्यू टीमों का हौसला अब भी बुलंद है।
देश की सीमाओं और आपदाओं के समय आम जनता की रक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले इन जांबाज कमांडोज की सलामती के लिए पूरा देश प्रार्थना कर रहा है। जैसे-जैसे इस मामले में नए अपडेट्स सामने आ रहे हैं, सुरक्षा और प्रशासन से जुड़े लोग पल-पल की जानकारी जुटाने में लगे हुए हैं। हमारी नजर इस खबर पर बनी हुई है और जैसे ही कोई आधिकारिक पुष्टि या नया अपडेट प्राप्त होगा, पाठकों तक सबसे पहले पहुंचाया जाएगा।