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वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत की नई आर्थिक रणनीति, वित्त मंत्री का बड़ा बयान

वैश्विक अनिश्चितता के दौर में भारत की नई आर्थिक रणनीति, वित्त मंत्री का बड़ा बयान

दुनियाभर में आर्थिक मोर्चे पर चल रही उथल-पुथल के बीच भारत ने अपनी भविष्य की प्राथमिकताओं को लेकर एक बार फिर स्पष्ट और कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शनिवार को दो टूक शब्दों में कहा कि वैश्विक अनिश्चितता अब कोई अस्थायी दौर नहीं, बल्कि दुनिया की एक 'स्थायित्व प्राप्त स्थिति' (Permanent Reality) बन चुकी है। ऐसे में देश की नीतियों और रणनीतियों को इसी यथार्थ को ध्यान में रखकर गढ़ा जाना बेहद जरूरी है।

कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026 में वित्त मंत्री का संबोधन

राजधानी नई दिल्ली में आयोजित प्रतिष्ठित 'पांचवें कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन 2026' को मुख्य वक्ता के तौर पर संबोधित करते हुए वित्त मंत्री ने भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सहनशक्ति (Resilience) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक बुनियाद को लगातार और मजबूत बनाने की जरूरत है, और यह कोई ऐसी कवायद नहीं है जिसे एक बार करके छोड़ दिया जाए। यह एक सतत, कभी न थमने वाली प्रक्रिया है जिस पर सरकार का पूरा फोकस है।

मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में जहाँ बड़े-बड़े विकसित देश भी मंदी और सप्लाई चेन के संकट से जूझ रहे हैं, भारत ने अपनी विकास यात्रा को पटरी पर बनाए रखा है। हालांकि, वित्त मंत्री का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और अन्य वैश्विक वित्तीय संस्थान लगातार वैश्विक मंदी और कर्ज के बढ़ते बोझ को लेकर चेतावनियां जारी कर रहे हैं।

निजी क्षेत्र (Private Sector) को संभालनी होगी निवेश की कमान

अपने संबोधन के दौरान वित्त मंत्री ने एक बड़ा नीतिगत संदेश देते हुए कहा कि अब वह समय आ गया है जब देश के प्राइवेट सेक्टर को खुलकर आगे आना चाहिए और बड़े पैमाने पर निवेश की अगुवाई करनी चाहिए। केवल पूंजी निवेश तक ही सीमित न रहते हुए, निजी कंपनियों को रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) और इनोवेशन जैसे अहम क्षेत्रों में भी भारी निवेश करना होगा।

उन्होंने साफ किया कि सरकार एक सुविधाप्रदाता (Facilitator) और नियामक (Regulator) की भूमिका निभा रही है, लेकिन देश को लंबी अवधि के उच्च विकास पथ पर ले जाने के लिए उद्योग जगत को जोखिम उठाने और नई तकनीकों में निवेश करने के लिए आगे आना होगा।

बढ़ता वैश्विक सार्वजनिक ऋण: एक गंभीर चिंता का विषय

वैश्विक अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर चिंता जताते हुए निर्मला सीतारमण ने एक चौंकाने वाला आंकड़ा साझा किया। उन्होंने बताया कि वैश्विक सार्वजनिक ऋण (Global Public Debt) साल 2025 में बढ़कर सीधे तौर पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के लगभग 94 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच गया है।

इतना ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के मुताबिक यह आंकड़ा आने वाले कुछ ही वर्षों यानी 2029 तक बढ़कर 100 प्रतिशत के ऐतिहासिक उच्च स्तर को छू सकता है। वित्त मंत्री ने याद दिलाया कि कर्ज का यह खतरनाक स्तर आखिरी बार द्वितीय विश्व युद्ध के तुरंत बाद के दौर में देखा गया था, जो दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी है।

सुधार कोई मजबूरी नहीं, बल्कि मजबूत विश्वास का नतीजा

भारत के नीतिगत बदलावों और रिफॉर्म्स का जिक्र करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि देश का नेतृत्व आज 'सुधारवादी सोच' (Reform-oriented Mindset) के साथ आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि देश में आर्थिक सुधारों को कभी भी किसी बाहरी दबाव या मजबूरी के तहत नहीं अपनाया गया, बल्कि यह पक्के विश्वास और दूरगामी सोच का नतीजा हैं।

  • जीएसटी (GST): कर प्रणाली को पारदर्शी और सरल बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम।
  • इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC): अटके हुए धन की रिकवरी और व्यापारिक सुगमता को बढ़ावा।
  • चार नए लेबर कोड: श्रमिकों के कल्याण के साथ-साथ उद्योगों के लिए नियमों को लचीला बनाना।
  • जन विश्वास एक्ट: अनुपालक बोझ (Compliance Burden) को कम करना और छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना।

भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत तैयार

वित्त मंत्री ने अपने संबोधन के अंत में विश्वास जताया कि भारत न केवल वर्तमान की वैश्विक अनिश्चितताओं का डटकर सामना कर रहा है, बल्कि आने वाले दशकों की चुनौतियों के लिए भी खुद को पूरी तरह तैयार कर रहा है। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में आर्थिक गतिविधियों को अधिक सुगम, अनुमान लगाने योग्य और अत्यधिक उत्पादक बनाना है, ताकि हर नागरिक तक इसका प्रत्यक्ष लाभ पहुंच सके।

यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब पूरी दुनिया की निगाहें भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर और उसकी नीतियों पर टिकी हुई हैं। ऐसे में वित्त मंत्री का यह बयान भारत की भविष्य की आर्थिक दिशा और उसकी अटूट प्रतिबद्धता का स्पष्ट दस्तावेज बन गया है।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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