पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने भारत और चीन समेत चार देशों के जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की छूट दी है। जानिए पूरी खबर।
पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और सैन्य संघर्ष के बीच ईरान ने भारत, चीन, इराक और कतर के वाणिज्यिक जहाजों के लिए एक बड़ी राहत का ऐलान किया है। तेहरान ने इन चार देशों के जहाजों को सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से बिना रोक-टोक गुजरने की छूट दी है।
ईरान की संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात मोघादम ने एक साक्षात्कार में इस छूट की पुष्टि की है। उन्होंने ईरानी स्टूडेंट्स न्यूज एजेंसी (ISNA) को बताया कि वर्तमान में भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को आवाजाही की अनुमति दी गई है, जिससे इन देशों के पोत बिना किसी बाधा के पार निकल रहे हैं और अमेरिकी सेना भी उन्हें नहीं रोक रही है।
किस आधार पर दी गई है यह छूट?
ईरान ने यह फैसला आपसी हितों और विशिष्ट प्राथमिकताओं के तहत लिया है। ईरानी संसद के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, भारतीय जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने की छूट इसलिए दी गई है क्योंकि तेहरान नई दिल्ली से जीवनरक्षक दवाइयों का आयात करना चाहता है। वहीं, चीन को यह छूट बीजिंग का राजनीतिक समर्थन हासिल करने की उम्मीद में दी गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और दोतरफा नाकेबंदी
वैश्विक ईंधन आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा संभालने वाला यह प्रमुख समुद्री मार्ग पिछले कई महीनों से दोतरफा नाकेबंदी का सामना कर रहा है। गत 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद तेहरान ने इस मार्ग को बंद कर दिया था। इसके जवाब में अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की ओर आने-जाने वाले जहाजों पर अपनी नौसैनिक नाकेबंदी लगा दी थी। इस जलमार्ग पर वर्तमान में कड़े प्रतिबंध हैं और कुछ चुनिंदा जहाजों को ही कड़े सुरक्षा परीक्षण या ट्रांजिट शुल्क चुकाने के बाद गुजरने दिया जा रहा है।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा और भारत का रुख
फरवरी में संघर्ष शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में जहाजों पर हुए हमलों में कम से कम 15 भारतीय नाविक अपनी जान गंवा चुके हैं। ताजा घटनाक्रम में सोमवार शाम ओमान के लिमाह के पास वाणिज्यिक पोत 'एमएसवी अल जुसुफी' पर हुए हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई।
भारत ने इस क्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर लगातार हो रहे हमलों को बेहद चिंताजनक करार दिया है। नई दिल्ली ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि कूटनीति और बातचीत के जरिए इस विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए। भारत का आधिकारिक रुख रहा है कि नागरिक बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक नौवहन को निशाना बनाने का सिलसिला तुरंत बंद होना चाहिए, ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप समुद्री मार्गों पर निर्बाध और स्वतंत्र नौवहन की बहाली हो सके।