3 नवंबर 2026 को भारत में सोने का भाव 24 कैरेट के लिए 13,964 रुपये प्रति ग्राम है। जानिए प्रमुख शहरों में सोने-चांदी की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव का असर।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों से मिले संकेतों और भू-राजनीतिक हलचल के बीच घरेलू सर्राफा बाजार में सोने की कीमतों में आंशिक गिरावट दर्ज की गई है।
गुड रिटर्न्स के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 3 नवंबर 2026 को 24 कैरेट सोने का भाव 13,964 रुपये प्रति ग्राम है, जो कि पिछले दिन यानी 2 नवंबर की तुलना में 27 रुपये कम है। इसी तरह 22 कैरेट सोने का भाव 12,800 रुपये प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोने का भाव 10,473 रुपये प्रति ग्राम दर्ज किया गया है। इसमें क्रमशः 25 रुपये और 20 रुपये प्रति ग्राम की कमी आई है। हालांकि, लेख की शुरुआत में दिए गए शुरुआती आंकड़ों में 22 और 18 कैरेट के भावों में आंशिक अंतर (क्रमशः 12,730 रुपये और 10,416 रुपये) का भी उल्लेख मिलता है, जो विभिन्न बाजारों और समय के अनुसार तय होते हैं।
एमसीएक्स और वैश्विक बाजार का हाल
क्रिप्टो और जिंस बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में आई भारी गिरावट के बाद अब सोना और चांदी उबरने की कोशिश कर रहे हैं। जियोट्टस डॉट कॉम के सीईओ विक्रम सुब्बुराज ने बताया कि शुरुआती कारोबार में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने के वायदा भाव 1.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,40,222 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बोले गए। वहीं, दिसंबर चांदी का वायदा भाव 2.66 प्रतिशत की तेजी के साथ 1,83,890 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज किया गया। हालांकि, यह शुरुआती इलेक्ट्रॉनिक सत्र के संदर्भ हैं और नियमित एमसीएक्स खुलने के समय के पुष्ट मूल्य नहीं हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और अमेरिकी सैन्य कार्रवाई
घरेलू सर्राफा बाजार के इतर, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। एसोसिएटेड प्रेस के हवाले से अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी परिसंपत्तियों को निशाना बनाते हुए 'सीमित रक्षात्मक' हमले किए हैं। यह कार्रवाई अमेरिकी सैन्य बलों पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल धंसने के खतरे के सीधे जवाब में की गई है।
इन सामरिक संघर्षों के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने घोषणा की है कि वाशिंगटन ने ईरान के साथ अप्रत्यक्ष राजनयिक वार्ताओं के दौरान 'प्रगति' हासिल की है। हालांकि, तेहरान के अधिकारियों का कहना है कि किसी भी समझौते के लिए अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाना और ईरानी शर्तों का पूर्ण पालन करना अनिवार्य है।
कच्चे तेल के टैंकरों में आग और क्षेत्रीय सुरक्षा
इस बीच, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने जानकारी दी है कि रणनीतिक समुद्री गलियारे में बिछाए गए समुद्री बारूदों (sea mines) की चपेट में आने से दो कच्चे तेल के टैंकरों में आग लग गई। यह घटना शुक्रवार को कतर के एक एलएनजी (LNG) पोत पर हुए मिसाइल और ड्रोन हमले के बाद खाड़ी देशों की तीखी निंदा के बीच सामने आई है।
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पिछले साल 28 फरवरी 2026 को हुए संयुक्त अमेरिकी-इजराइली हमलों के बाद से काफी बढ़ गया है, जिनमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद जून 2026 में पाकिस्तान की मध्यस्थता से एक अंतरिम समझौता हुआ था, लेकिन अगले ही महीने वह टूट गया। तब से दोनों देश समुद्री टकराव और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं को लेकर राजनयिक गतिरोध में फंसे हुए हैं।