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चीन सीमा पर ITBP की बड़ी तैयारी, सभी इकाइयों में गठित हुईं ड्रोन प्लाटून और बंकरों का निर्माण

चीन सीमा पर ITBP की बड़ी तैयारी, सभी इकाइयों में गठित हुईं ड्रोन प्लाटून और बंकरों का निर्माण

भारत-तिब्बत सीमा पुलिस ने चीन से लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा पर सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। बल की सभी सीमा इकाइयों में विशेष ड्रोन प्लाटून का गठन किया गया है और आधुनिक युद्ध की जरूरतों को देखते हुए सीमावर्ती इलाकों में भूमिगत ढांचे तैयार किए जा रहे हैं।

आईटीबीपी के महानिदेशक (डीजी) शत्रुजीत सिंह कपूर ने राजस्थान के अलवर स्थित बल के केंद्र में जवानों को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि चीन से पारंपरिक युद्ध के तरीकों से मुकाबला करने का दौर अब बीत चुका है, इसलिए बल अपने जवानों, हथियारों, वाहनों और सीमा चौकियों के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दे रहा है। वर्ष 1962 में स्थापित आईटीबीपी चीन के साथ लगती 3,488 किलोमीटर लंबी एलएसी की सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है।

ड्रोन और आधुनिक तकनीकों पर जोर

महानिदेशक ने रूस-यूक्रेन और ईरान-अमेरिका के संघर्षों का हवाला देते हुए कहा कि मौजूदा दौर में ड्रोन और ड्रोन-रोधी तकनीक का महत्व अत्यधिक बढ़ गया है। इन तकनीकों के जरिए छोटे देश भी बड़े देशों को कड़ी चुनौती दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि करीब 95,000 कर्मियों वाले और पर्वतीय युद्ध में प्रशिक्षित इस बल को सरकार से 400 करोड़ रुपये की धनराशि मिली है, जिसका 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने पर खर्च किया जा रहा है। इसके साथ ही केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 4,000 करोड़ रुपये की एक बड़ी आधुनिकीकरण योजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसमें से 1,000 करोड़ रुपये विशेष रूप से ड्रोन और ड्रोन-रोधी प्रणालियों के लिए तय किए गए हैं।

'स्ट्राइक' पाठ्यक्रम और 'शौर्य कमांडो' का गठन

गलवान जैसी परिस्थितियों और झड़पों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 'स्ट्राइक' नाम से एक नया प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार किया गया है। वर्ष 2027 के अंत तक पूरे बल को इस पाठ्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जून 2020 में लद्दाख के गलवान में एलएसी पर चीनी सैनिकों के साथ हुई हिंसक झड़प में भारत के 20 जवान शहीद हुए थे। इसके अलावा, अरुणाचल प्रदेश में चीनी पीएलए के साथ गतिरोध के दौरान अपनी क्षमताओं का लोहा मनवाने वाली 'शौर्य कमांडो' नामक नई लड़ाकू टीम भी बनाई गई है, जिन्हें हर सीमा बटालियन में तैनात किया जाएगा।

भूमिगत बंकर और साजो-सामान का आधुनिकीकरण

आधुनिक युद्ध प्रणाली से मिले अनुभवों के आधार पर सीमा पर बड़े पैमाने पर भूमिगत आश्रय स्थल यानी बंकर बनाए जा रहे हैं। जवानों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए शून्य से नीचे तापमान वाले क्षेत्रों में स्थित 383 बैरकों में से 342 में ऊष्मारोधी व्यवस्था की गई है। दूरदराज के क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए 141 जनरेटर खरीदे गए हैं और कई स्थानों पर सौर जल हीटर लगाए गए हैं। बल लगभग 50 साल पुराने अपने हथियारों को बदलने के साथ-साथ सभी भूभागों पर चलने वाले नए वाहनों और त्वरित प्रतिक्रिया वाहनों की खरीद से अपनी आवाजाही क्षमता को भी लगातार बढ़ा रहा है।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

Content Writer

अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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