प्रयागराज के नेहरू पार्क को भव्य मिनी सफारी के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। अक्टूबर 2026 में मंडलायुक्त डॉ. लोकेश एम. ने सेना और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इस स्थल का स्थलीय निरीक्षण किया। इसके बाद परियोजना को तेजी से अमलीजामा पहनाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह महत्वाकांक्षी परियोजना लगभग 30 से 50 हेक्टेयर यानी 123 एकड़ से अधिक के विस्तृत भूभाग पर फैलाई जाएगी। पार्क के सौंदर्यीकरण और वन्यजीव संरक्षण के तहत यहाँ हिरणों की विभिन्न प्रजातियों और रंग-बिरंगे पक्षियों को लाया जाएगा, जिससे यह पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण केंद्र बन सके। इसके अलावा आगंतुकों के लिए एक भव्य प्रवेश प्लाजा, प्रकृति प्रेमियों के लिए नेचर ट्रेल्स और पार्क के भीतर घूमने के लिए मड ट्रैक यानी कच्चे रास्तों का निर्माण किया जाएगा। बच्चों के शैक्षणिक विकास और मनोरंजन को ध्यान में रखते हुए विशेष प्रदर्शनियों का आयोजन भी इस योजना का हिस्सा है।
ड्रोन सर्वे और एमओयू की प्रक्रिया
परियोजना को व्यवस्थित और तकनीकी रूप से त्रुटिरहित बनाने के लिए पूरे नेहरू पार्क का ड्रोन के जरिए स्थलाकृतिक सर्वेक्षण कराया जाएगा। इस सर्वे से मिलने वाले भौगोलिक आंकड़ों के आधार पर ही निर्माण की सटीक रूपरेखा तय होगी। चूंकि यह भूमि रक्षा मंत्रालय यानी सेना के अधीन है, इसलिए प्रशासनिक समन्वय के तहत सेना और प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) के बीच एक संयुक्त समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इसके उपरांत वन विभाग के वन्यजीव एवं पर्यावरण विशेषज्ञों के तकनीकी सहयोग से विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी।
मैकफर्सन झील का जीर्णोद्धार
मिनी सफारी के निर्माण कार्य शुरू होने से पहले पार्क के भीतर मौजूद प्राकृतिक धरोहरों को संवारा जाएगा। इस क्रम में परिसर में स्थित ऐतिहासिक मैकफर्सन झील की सफाई को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। झील को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए इसमें गिरने वाले गंदे नालों की टैपिंग की जाएगी, प्रभावी जलशोधन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे और जल सतह को साफ रखने के लिए जलकुंभी को पूरी तरह से हटाया जाएगा।
प्रशासनिक जिम्मेदारी और राजस्व मॉडल
इस पूरी मिनी सफारी के निर्माण, विकास और भविष्य में इसके सुचारू संचालन व रखरखाव (Operation & Maintenance) की मुख्य जिम्मेदारी प्रयागराज विकास प्राधिकरण (PDA) को सौंपी गई है। परियोजना का वित्तीय मॉडल इस प्रकार तैयार किया गया है कि सफारी के संचालन का खर्च टिकट बिक्री और अन्य स्वीकृत माध्यमों से मिलने वाले राजस्व से पूरा किया जा सके। इस पूरी प्रक्रिया में नगर निगम प्रयागराज, भारतीय सेना और राज्य वन विभाग आपसी समन्वय के साथ सहयोग करेंगे।