नई दिल्ली में आयोजित रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी 'नो आइडिया इज फाइनल' से तस्वीरें हटाए जाने का मामला राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गया है। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने इस कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे शर्मनाक करार दिया है और कहा है कि इस तरह के कदम से लोकतांत्रिक देश के रूप में भारत की वैश्विक छवि प्रभावित होती है।
दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित बीकानेर हाउस में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के बेटे रेहान वाड्रा की फोटोग्राफी प्रदर्शनी का आयोजन किया गया था। इस प्रदर्शनी में देश में हुए विभिन्न विरोध प्रदर्शनों को दर्शाने वाली तस्वीरें भी प्रदर्शित की जानी थीं। हालांकि, उद्घाटन से ठीक पहले प्रबंधन के दखल के बाद यह आयोजन विवादों में घिर गया, जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर बहस छिड़ गई है।
अधिकारियों की कार्रवाई पर शशि थरूर का तंज
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए बीकानेर हाउस प्रबंधन के फैसले की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह घटना कई स्तरों पर निराशाजनक है। थरूर के अनुसार, जिन तस्वीरों को हटाने के लिए कहा गया, वे ऐसे आयोजनों और घटनाओं से जुड़ी थीं जो पहले से ही जनता की स्मृति में दर्ज हैं और मीडिया तथा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर आम जनता द्वारा देखी जा चुकी हैं।
थरूर ने व्यंग्यात्मक लहजे में अधिकारियों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि तस्वीरों को हटाने के इस फैसले ने रेहान वाड्रा को उनकी प्रदर्शनी से कहीं अधिक लोकप्रियता और पब्लिसिटी दिला दी है। उन्होंने कटाक्ष किया कि इस सेंसरशिप ने रेहान के फोटोग्राफी करियर को वह चर्चा दिला दी जो शायद सामान्य परिस्थितियों में इतनी आसानी से नहीं मिल पाती।
सेंसरशिप और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का सवाल
प्रदर्शनी विवाद पर अपनी बात रखते हुए शशि थरूर ने तर्क दिया कि बीकानेर हाउस प्रबंधन की अपनी नीतियां हो सकती हैं, लेकिन किसी विरोध प्रदर्शन को कैमरे में कैद करना या उसकी तस्वीर प्रदर्शित करना अपने आप में कोई राजनीतिक गतिविधि नहीं बन जाता। उन्होंने कहा कि विरोध प्रदर्शनों की ये तस्वीरें किसी समकालीन घटना का कलात्मक दस्तावेज मात्र होती हैं।
थरूर ने इस बात पर भी जोर दिया कि यदि इस मामले को लेकर अदालत का रुख किया जाता, तो तस्वीरों को प्रदर्शित करने के पक्ष में मजबूत कानूनी और तार्किक दलीलें दी जा सकती थीं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार की सेंसरशिप देश के भीतर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे को सीमित करती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को कमजोर करती है। हालांकि, इस मामले में कानूनी रूप से अदालत का कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
क्या था पूरा विवाद और प्रदर्शनी का घटनाक्रम?
रेहान वाड्रा की इस फोटोग्राफी प्रदर्शनी का शीर्षक 'नो आइडिया इज फाइनल' रखा गया था। प्रदर्शनी शुरू होने से लगभग 24 घंटे पहले, प्रबंधन ने रेहान को सूचित किया कि प्रदर्शित की जाने वाली कुछ तस्वीरें संस्थान की नीति के अनुकूल नहीं हैं और उन्हें आपत्तिजनक माना जा सकता है। इस पर रेहान ने प्रबंधन से अपनी आपत्तियों को लिखित रूप में देने की मांग की थी।
प्रदर्शनी के उद्घाटन वाले दिन दोपहर करीब साढ़े बारह बजे प्रबंधन की ओर से यह निर्देश दिया गया कि कुल 105 तस्वीरों में से लगभग 70 तस्वीरों को हटाना होगा। इस अचानक आए फैसले के बाद प्रदर्शनी के आयोजन से पहले ही असमंजस और विवाद की स्थिति पैदा हो गई।
बीकानेर हाउस प्रबंधन का पक्ष
दूसरी ओर, बीकानेर हाउस मैनेजमेंट सोसाइटी ने अपने इस कदम का बचाव किया है। सोसाइटी का कहना है कि प्रदर्शनी में शामिल कुछ तस्वीरें संस्थान की निर्धारित नीतियों और नियमों के अनुरूप नहीं थीं, जिसके कारण उन्हें हटाने का अनुरोध किया गया था। प्रबंधन का यह भी स्पष्ट करना है कि बाकी की तस्वीरें तय योजना के अनुसार प्रदर्शनी में अभी भी मौजूद हैं।