वाराणसी के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई देखने को मिली है। सीर गोवर्धन क्षेत्र के लेखपाल के निजी मुंशी को एंटी करप्शन टीम ने एक लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोच लिया है। यह कार्रवाई उस वक्त की गई जब आरोपी मुंशी एक आम नागरिक से दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के एवज में अवैध वसूली कर रहा था। इस घटना के बाद से महकमे में हड़कंप मच गया है और मुख्य आरोपी लेखपाल की तलाश तेज कर दी गई है।
दाखिल-खारिज के नाम पर हो रही थी अवैध वसूली
प्राप्त जानकारी के अनुसार, वाराणसी के सीर गोवर्धन इलाके में रहने वाले कमल कांत विक्रम को अपनी जमीन के दाखिल-खारिज का काम करवाना था। सरकारी नियमों के मुताबिक यह प्रक्रिया तयशुदाfees के तहत होनी चाहिए थी, लेकिन क्षेत्र के लेखपाल कुन्दन सिंह और उनके नुमाइंदों ने इसे अपनी कमाई का जरिया बना लिया था। लेखपाल की ओर से इस काम को अंजाम देने के लिए भारी रकम की मांग की जा रही थी।
कमल कांत विक्रम इस अनुचित मांग के आगे झुकने को तैयार नहीं थे। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने का फैसला किया और उत्तर प्रदेश की एंटी करप्शन (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) विंग से संपर्क साधा। पीड़ित ने लिखित शिकायत दर्ज कराई कि लेखपाल और उसका मुंशी दाखिल-खारिज के बदले एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे हैं।
एंटी करप्शन टीम ने बिछाया जाल
शिकायत मिलने के बाद एंटी करप्शन टीम ने बिना कोई वक्त गंवाए मामले की गोपनीय जांच शुरू कर दी। प्राथमिक जांच में ही रिश्वत मांगे जाने के पुख्ता सबूत हाथ लग गए। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाने का निर्णय लिया।
मंगलवार को तय रणनीति के तहत शिकायतकर्ता कमल कांत को रिश्वत की रकम के साथ तयशुदा स्थान पर भेजा गया। शहर के प्रतिष्ठित यूपी कॉलेज गेट के पास का इलाका इसके लिए चुना गया। जैसे ही लेखपाल का निजी मुंशी अशोक कुमार, कमल कांत से एक लाख रुपये लेने पहुंचा, सादे कपड़ों में पहले से मुस्तैद एंटी करप्शन टीम ने उसे चारों तरफ से घेर लिया और धर दबोचा।
मोबइल रिकॉर्डिंग से खुले कई बड़े राज
गिरफ्तारी के बाद जब एंटी करप्शन टीम ने आरोपी अशोक कुमार की तलाशी ली, तो उसके कब्जे से पूरे एक लाख रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा उसके पास से एक मोबाइल फोन भी जब्त किया गया। जब तकनीकी टीम ने उस मोबाइल की चैट और कॉल्स को खंगाला, तो उसमें चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
मोबाइल फोन के अंदर मुख्य आरोपी लेखपाल कुन्दन सिंह और मुंशी अशोक कुमार के बीच रिश्वत के पैसों के लेनदेन और हिस्सेदारी को लेकर हुई बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मिल गई। यह रिकॉर्डिंग इस मामले में सबसे बड़ा डिजिटल सबूत साबित हुई है, जिससे आरोपियों का बचना नामुमकिन नजर आ रहा है।
मुख्य आरोपी लेखपाल की तलाश में जुटी पुलिस
इस पूरी कार्रवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपी लेखपाल कुन्दन सिंह को भनक लग गई। एंटी करप्शन टीम के शिकंजे में मुंशी के फंसने की खबर मिलते ही लेखपाल मौके से फरार होने में कामयाब हो गया।
भ्रष्टाचार निवारण संगठन के अधिकारियों का कहना है कि लेखपाल की संलिप्तता के पुख्ता सबूत हाथ लग चुके हैं। फरार लेखपाल की तलाश के लिए विभिन्न ठिकानों पर दबिश दी जा रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि कानून से कोई भी ऊपर नहीं है और जल्द ही मुख्य आरोपी को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
आम जनता में चर्चा का विषय
इस हाई-प्रोफाइल रिश्वतखोरी के मामले के सामने आने के बाद से स्थानीय लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोगों का कहना है कि आम जनता छोटे-छोटे सरकारी कामों के लिए किस तरह चक्कर काटने को मजबूर होती है और सरकारी नुमाइंदे किस बेबाकी से जनता का शोषण करते हैं। एंटी करप्शन टीम की इस त्वरित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर भ्रष्टाचार की यह जड़ें कितनी गहरी हैं।
फिलहाल, एंटी करप्शन टीम पकड़े गए मुंशी से पूछताछ कर रही है और इस सिंडिकेट में जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और बड़े खुलासे होने की उम्मीद जताई जा रही है।