जयपुर मेयर चुनाव: आखिरी वक्त में ऐसा क्या हुआ कि बदल गई पूरी बाजी?
राजस्थान की राजधानी जयपुर के राजनीतिक गलियारों में इन दिनों हलचल अपने चरम पर है। जयपुर मेयर पद के लिए होने वाले आगामी चुनाव ने अचानक एक ऐसा रोमांचक मोड़ ले लिया है, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मुख्य राजनीतिक दलों—भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस—के अधिकृत उम्मीदवारों के बीच कड़े मुकाबले की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन मैदान में दो निर्दलीय पार्षदों की नाटकीय 'सरप्राइज एन्ट्री' ने पूरे चुनावी समीकरण को ही उलटकर रख दिया है।
नामांकन प्रक्रिया के आखिरी घंटों में हुए इस घटनाक्रम ने दोनों प्रमुख दलों की नींद उड़ा दी है। आइए गहराई से समझते हैं कि आखिर इस चुनाव के पर्दे के पीछे क्या पक रहा है और ये दो नए चेहरे किसके लिए सबसे बड़ा सिरदर्द साबित हो सकते हैं।
सुनील कोठारी और सुनीता मावर के सामने कड़ी चुनौती
निर्वाचन आयोग द्वारा तय की गई समय सीमा के अनुसार, सभी दलों के दिग्गजों ने अपने-अपने पत्ते पहले ही खोल दिए थे। इस रेस में सत्ताधारी दल की तरफ से सुनील कोठारी को मैदान में उतारा गया है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस की ओर से सुनीता मावर ने अपनी दावेदारी मजबूत की है। शुरुआती दौर में ऐसा माना जा रहा था कि मुकाबला पूरी तरह से इन दोनों के बीच ही सिमट कर रह जाएगा और ऊँट किस करवट बैठेगा, यह तय करने में पार्षदों की संख्या बल की भूमिका अहम होगी।
लेकिन राजनीति में जितनी सीधी रेखा दिखती है, उतनी होती नहीं है। जैसे ही नामांकन पत्रों की छंटनी और पर्चा दाखिल करने का समय समाप्त हुआ, यह बात सामने आई कि दो अन्य निर्दलीय पार्षदों ने भी चुनावी मैदान में उतरने का कड़ा फैसला कर लिया है। इन दोनों निर्दलियों के आने से अब यह चुनाव दोतरफा न रहकर बहुकोणीय (Multilateral) बन गया है, जिससे वोटों के ध्रुवीकरण की पूरी संभावना बन गई है.
निर्दलीय पार्षदों की एंट्री से क्यों सहमे हैं सियासी दल?
स्थानीय निकाय चुनावों में निर्दलीय प्रत्याशियों की भूमिका हमेशा से किंगमेकर या फिर खेल बिगाड़ने वाली (Spoiler) रही है। इस बार भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। जानकारों का मानना है कि इन दोनों निर्दलीय पार्षदों के मैदान में आने से कई असंतुष्ट पार्षदों को एक नया विकल्प मिल गया है। यदि दोनों प्रमुख दलों में टिकट बंटवारे या आंतरिक कलह के कारण कोई बगावत हुई है, तो ये निर्दलीय उस असंतोष का फायदा उठाने में सबसे आगे रहेंगे।
जयपुर नगर निगम के भीतर चल रही अंदरूनी चर्चाओं के मुताबिक, बागी तेवर अपना चुके कई पार्षद पर्दे के पीछे से इन निर्दलीय उम्मीदवारों को समर्थन दे सकते हैं। यही वजह है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों के खेमे में अचानक से बैठकों का दौर तेज हो गया है और अपने-अपने पार्षदों को एकजुट (Safe House / Resort Politics) रखने की रणनीति पर काम शुरू हो चुका है।
गणित क्या कहता है?
- कुल संख्या बल: जयपुर नगर निगम के बोर्ड में बहुमत का जादुई आंकड़ा हासिल करने के लिए पार्षदों के समर्थन की जरूरत होती है।
- क्रॉस वोटिंग का डर: निर्दलीयों के मैदान में होने से क्रॉस वोटिंग की आशंका सबसे ज्यादा बढ़ जाती है, क्योंकि गुप्त मतदान के दौरान दलगत सीमाएं अक्सर टूट जाती हैं।
- फर्स्ट प्रेफरेंस वोट: यदि मुकाबला कांटे का हुआ, तो छोटी-छोटी पार्टियों और निर्दलियों के पास मौजूद वोट बैंक निर्णायक साबित हो सकते हैं।
दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर
इस चुनाव को केवल एक मेयर की कुर्सी की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जा रहा है, बल्कि इसे आने वाले समय के राजनीतिक संदेश के तौर पर भी परखा जा रहा है। बीजेपी जहाँ अपनी साख को बचाने और मजबूत पकड़ दिखाने की जुगत में है, वहीं कांग्रेस किसी भी कीमत पर इस सीट को अपने पाले में कर स्थानीय निकाय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती है।
ऐसी स्थिति में इन दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों का मैदान में उतरना किसी बड़े 'ट्विस्ट' से कम नहीं है। क्या ये निर्दलीय सिर्फ औपचारिकता निभाएंगे या फिर चुनावी नतीजों को पूरी तरह से पलटकर रख देंगे? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा, लेकिन इतना तय है कि जयपुर का यह मेयर चुनाव अब बेहद रोमांचक और संघर्षपूर्ण हो चुका है।
आगे की रणनीति और कड़े मुकाबले के आसार
जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है, राजनीतिक दलों के रणनीतिकार हर एक पार्षद से व्यक्तिगत संपर्क साधने में जुटे हैं। फोन कॉल्स, मुलाकातों और गुप्त बैठकों का दौर शहर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार जारी है। हर कोई अपने कुनबे को संभालने और पाला बदलने से रोकने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
जयपुर की जनता से लेकर राजनीतिक पंडितों तक की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या ये दोनों निर्दलीय अंत तक मैदान में डटे रहते हैं या फिर ऐन वक्त पर नाम वापसी के जरिए कोई नया राजनीतिक खेल देखने को मिलता है। इस चुनावी ड्रामे के हर एक नए अपडेट के लिए हमारी नजर लगातार बनी हुई है।