Breaking
► विधानसभास्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का रोमांचक समापन, 120 टीमों ने दिखाया दम ► राजस्थान में एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा सियासी संग्राम, सड़कों पर उतरा विपक्ष ► किसानों के लिए बड़ी राहत: फसल नुकसान पर सर्वे तेज, रबी में मिलेंगे मुफ्त बीज और मिनीकिट ► समस्तीपुर में पुलिस पर भारी पड़ा आरोपी, कीचड़ में लोटकर काटा गदर - VIDEO ► फेसबुक का बड़ा बदलाव: अब ऐप खोलते ही दिखेगी फुल-स्क्रीन रील्स फीड ► वाराणसी से डिजिटल पिंडदान: मॉरिशस और यूरोप के नागरिकों ने ऑनलाइन किया त्रिपिंडी श्राद्ध ► मालेगांव के सरकारी अस्पताल में गहराया ऑक्सीजन संकट, थमी सांसें ► चार दिनों से बिजली गुल: गुस्से में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सीताद्वार उपकेंद्र पर दिया धरना ► ग्वालियर जू घूमने गया था पति, पत्नी को मिला मौका; CCTV फुटेज देख पैरों तले खिसक गई जमीन ► चंदौली के नमो घाट पर गूंजेगा आसमान का गर्जन, भव्य एयर शो को लेकर प्रशासन सख्त ► विधानसभास्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का रोमांचक समापन, 120 टीमों ने दिखाया दम ► राजस्थान में एसआईआर के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा सियासी संग्राम, सड़कों पर उतरा विपक्ष ► किसानों के लिए बड़ी राहत: फसल नुकसान पर सर्वे तेज, रबी में मिलेंगे मुफ्त बीज और मिनीकिट ► समस्तीपुर में पुलिस पर भारी पड़ा आरोपी, कीचड़ में लोटकर काटा गदर - VIDEO ► फेसबुक का बड़ा बदलाव: अब ऐप खोलते ही दिखेगी फुल-स्क्रीन रील्स फीड ► वाराणसी से डिजिटल पिंडदान: मॉरिशस और यूरोप के नागरिकों ने ऑनलाइन किया त्रिपिंडी श्राद्ध ► मालेगांव के सरकारी अस्पताल में गहराया ऑक्सीजन संकट, थमी सांसें ► चार दिनों से बिजली गुल: गुस्से में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, सीताद्वार उपकेंद्र पर दिया धरना ► ग्वालियर जू घूमने गया था पति, पत्नी को मिला मौका; CCTV फुटेज देख पैरों तले खिसक गई जमीन ► चंदौली के नमो घाट पर गूंजेगा आसमान का गर्जन, भव्य एयर शो को लेकर प्रशासन सख्त

झारखंड में फिर भड़केगा छात्र आंदोलन? 18 अक्टूबर से सड़क पर उतरने की चेतावनी

झारखंड में फिर भड़केगा छात्र आंदोलन? 18 अक्टूबर से सड़क पर उतरने की चेतावनी

झारखंड के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर सुगबुगाहट तेज हो गई है। राज्य के युवा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्र एक बार फिर से आंदोलन के रास्ते पर जाने का मन बना चुके हैं। हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ वादाखिलाफी का गंभीर आरोप लगाते हुए छात्र संगठनों ने तीखे तेवर अख्तियार कर लिए हैं। JPSC रिफॉर्म मंच ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो आगामी 18 अक्टूबर से राज्यभर के छात्र एक बार फिर सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।

न्यायालय के फैसले और CID रिपोर्ट पर टकी हैं नजरें

इस पूरे विवाद के केंद्र में राज्य की प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं जैसे JSSC CGL और JPSC से जुड़े मामले हैं। झारखंड उच्च न्यायालय में इस महत्वपूर्ण मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया चल रही है। छात्र नेता रवींद्र पासवान ने हाल ही में मीडिया के सामने अपनी बात रखते हुए सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। छात्रों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत में राज्य सरकार का रुख क्या रहता है और जांच एजेंसियां किस प्रकार के तथ्य सामने रखती हैं।

पिछली न्यायिक सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से अपना काउंटर-एफिडेविट दाखिल किया गया था। इसके बाद माननीय उच्च न्यायालय ने उन आधारों से जुड़ी CID जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे, जिनके तहत पूर्व में परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया गया था। छात्रों का मुख्य आरोप यह है कि 17 अगस्त को लिए गए कैबिनेट के फैसलों के आधार पर परीक्षाएं तो रद्द कर दी गईं, लेकिन तय समयसीमा के भीतर संबंधित CID रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश नहीं की गई है, जिससे छात्रों में असमंजस और आक्रोश का माहौल है।

क्या है छात्रों की मुख्य मांगें?

छात्रों का स्पष्ट कहना है कि सरकार को अदालती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतनी चाहिए। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:

  • सरकार 17 अगस्त के कैबिनेट के फैसलों और पूरी CID जांच रिपोर्ट को अविलंब उच्च न्यायालय के सामने रखे।
  • न्यायालय में सरकार की तरफ से इस मामले में बेहद मजबूत और स्पष्ट पक्ष रखा जाए।
  • लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो, यह सुनिश्चित किया जाए।
  • भर्ती परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सुधार लाया जाए।

पुराने आंदोलन की यादें और सरकार का फैसला

आपको बता दें कि कुछ समय पहले झारखंड के छात्रों ने झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक, भ्रष्टाचार, धांधली और चयन प्रक्रिया की कमियों के खिलाफ एक ऐतिहासिक और लंबा संघर्ष किया था। यह छात्र आंदोलन करीब 24 से 25 दिनों तक लगातार चला था, जिसमें पूरे राज्य के युवा सड़कों पर डटे रहे थे।

छात्रों के उस भारी दबाव और एकजुटता के आगे झुकते हुए आखिरकार हेमंत सोरेन सरकार ने JSSC CGL समेत कई विवादित भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था। इसके साथ ही सरकार ने यह भी घोषणा की थी कि वर्ष 2014 के बाद से हुई तमाम भर्ती परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की निष्पक्ष CID जांच कराई जाएगी। सरकार के इस कदम के बाद कुछ समय के लिए छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित कर दिया था, यह मानकर कि उनकी जीत हो गई है।

न्यायपालिका की एंट्री और नया कानूनी पेंच

लेकिन यह विवाद यहीं थमा नहीं। परीक्षा रद्द होने के बाद एक दूसरा नया कानूनी पेंच फंस गया। कुछ चयनित छात्र सोरेन सरकार के उस फैसले के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट चले गए, जिसमें परीक्षाएं रद्द की गई थीं। इसके बाद अदालत ने JSSC CGL, CDPO और JPSC से जुड़ी कुछ खास परीक्षाओं एवं नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी आदेश पर रोक लगा दी।

अदालत ने इस मामले में सरकार से कड़ा जवाब तलब किया और CID जांच से जुड़ी रिपोर्ट मांगी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सितंबर माह में उच्च न्यायालय ने CID जांच की निगरानी के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश, जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को बतौर मॉनिटर नियुक्त कर दिया था। अदालत की तरफ से रिपोर्ट सौंपने के लिए एक निश्चित समयसीमा भी तय की गई थी, जिसके पूरा होने के बाद अब छात्र संगठनों का धैर्य जवाब देता नजर आ रहा है।

भविष्य की अनिश्चितता और युवाओं का असंतोष

झारखंड के युवाओं का कहना है कि वे पिछले कई सालों से लगातार प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में अपनी जवानी, पैसा और ऊर्जा झोंक रहे हैं। पेपर लीक और प्रशासनिक लापरवाही के कारण बार-बार परीक्षाएं रद्द होना या उनमें कानूनी अड़चनें आना उनके मानसिक स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिति पर बहुत भारी पड़ रहा है।

JPSC रिफॉर्म मंच का कहना है कि सरकार ने छात्रों के साथ जो वादे किए थे, वे केवल कागजी साबित हो रहे हैं। यदि समय रहते अदालत में ठोस पैरवी नहीं की गई और पारदर्शी तरीके से नियुक्तियों का रास्ता साफ नहीं हुआ, तो झारखंड के युवा एक बार फिर से अपनी ताकत दिखाने को तैयार हैं। आगामी 18 अक्टूबर की तारीख राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था दोनों के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है, क्योंकि यदि छात्र सड़कों पर उतरे तो प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था संभालना एक बार फिर बड़ी चुनौती बन जाएगा।

About the Author

रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →