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गंगा का कहर: साहिबगंज-बरहरवा रेलखंड पर थमी ट्रेनों की रफ्तार, युद्धस्तर पर काम जारी

गंगा का कहर: साहिबगंज-बरहरवा रेलखंड पर थमी ट्रेनों की रफ्तार, युद्धस्तर पर काम जारी

देश के कई हिस्सों में प्रकृति का रौद्र रूप लगातार देखने को मिल रहा है। इसी बीच झारखंड के साहिबगंज से एक बड़ी खबर सामने आ रही है, जहाँ गंगा नदी का बढ़ता जलस्तर और उसका तेज बहाव रेल यात्रियों और रेलवे प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। साहिबगंज-बरहरवा रेलखंड पर गंगा के कटाव और बढ़ते पानी के कारण रेल परिचालन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालात की गंभीरता को देखते हुए रेलवे ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए युद्धस्तर पर मरम्मत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।

गंगा के आक्रामक तेवर से थमी पहियों की रफ्तार

साहिबगंज-बरहरवा रेलखंड पर पिछले कुछ दिनों से स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है। गंगा नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ ही पानी का बहाव सीधे रेलवे ट्रैक के संवेदनशील हिस्सों की ओर आक्रामक होता जा रहा है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि रेलवे को सुरक्षा कारणों से डाउन लाइन पर परिचालन रोकना पड़ा है और कई महत्वपूर्ण ट्रेनों के रूट में बदलाव करने पड़े हैं या उन्हें पूरी तरह रद्द करना पड़ा है।

स्थानीय यात्रियों को इस वजह से भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। हालाँकि, रेलवे बोर्ड और मालदा मंडल प्रशासन स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचा जा सके।

युद्धस्तर पर चल रहा है 'रिवर ट्रेनिंग' का काम

हालात से निपटने के लिए मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यात्रियों की सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसके साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

डीआरएम ने बताया कि गंगा के कटाव को रोकने और उसके बहाव को रेलवे ट्रैक के संवेदनशील हिस्सों से दूर मोड़ने के लिए 'रिवर ट्रेनिंग' (River Training) का काम तेजी से किया जा रहा है। इस तकनीकी प्रक्रिया के तहत नदी की मुख्य धारा की दिशा को नियंत्रित करने का प्रयास किया जा रहा है ताकि पटरियों पर मंडरा रहे खतरे को कम किया जा सके।

मैदान में डटे हैं 400 से अधिक कर्मचारी

इस आपदा से निपटने के लिए रेलवे ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। घटनास्थल पर लगभग 400 से अधिक रेलवे कर्मचारी दिन-रात मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। इसके साथ ही भारी मशीनरी और आधुनिक उपकरणों को भी काम पर लगाया गया है ताकि कम से कम समय में ट्रैक को सुरक्षित किया जा सके।

  • 400+ कर्मचारी: दिन-रात राहत और बचाव कार्यों में जुटे।
  • हेवी मशीनरी: तटबंध को मजबूत करने और धारा मोड़ने के लिए तैनात।
  • 24 घंटे मॉनिटरिंग: वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार स्थिति की समीक्षा।

सीमित जगह और बदलती परिस्थितियां बनीं बड़ी चुनौती

यह राहत कार्य इतना आसान भी नहीं है। रेलवे इंजीनियरों के सामने सबसे बड़ी बाधा कार्यस्थल पर जगह की कमी (Limited Space) होना है। इसके अलावा, गंगा नदी का जलस्तर और बहाव लगातार बदल रहा है, जिससे काम की गति पर भी असर पड़ रहा है।

रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह तकनीकी रूप से एक बेहद संवेदनशील कार्य है, जिसे अत्यंत सावधानी के साथ पूरा किया जा रहा है। यही वजह है कि इसमें तय समय से अधिक वक्त लग सकता है।

कई ट्रेनें रद्द और कई के बदले गए रूट

इस तकनीकी समस्या और ट्रैक सुरक्षा कार्यों के चलते यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। साहिबगंज-हावड़ा एक्सप्रेस सहित कई प्रमुख ट्रेनों को या तो रद्द कर दिया गया है या उनके मार्ग में परिवर्तन किया गया है।

  • साहिबगंज-बरहड़वा डाउन लाइन पिछले कुछ दिनों से पूरी तरह ठप है।
  • वनांचल एक्सप्रेस सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण ट्रेनों को अप लाइन से चलाने का प्रस्ताव और संचालन किया जा रहा है।
  • प्रतिदिन यात्रा करने वाले स्थानीय यात्रियों और दैनिक वेतन भोगियों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

रेलवे की यात्रियों से अपील

रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति (Train Status) की जांच अवश्य कर लें। किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और केवल रेलवे के आधिकारिक स्रोतों से मिलने वाली जानकारियों पर ही भरोसा करें।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि जैसे ही स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में आ जाएगी और ट्रैक को सुरक्षित घोषित कर दिया जाएगा, वैसे ही सामान्य रेल परिचालन को बहाल कर दिया जाएगा। तब तक यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे वैकल्पिक मार्गों का चयन करें और रेलवे प्रशासन का सहयोग करें।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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