यूनाइटेड किंगडम पहले और भारत दूसरे स्थान पर, पाकिस्तान में हर साल दर्ज होते हैं दर्जनों मामले
एसिड अटैक यानी तेजाब फेंकने की घटनाएं किसी भी समाज के लिए एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाला अपराध माना जाता है। इस तरह के हमलों का शिकार ज्यादातर महिलाएं और लड़कियां होती हैं, जिससे उनके जीवन पर शारीरिक और मानसिक रूप से गहरा असर पड़ता है। वैश्विक स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, दुनिया के अलग-अलग देशों में तेजाब से हमलों की स्थिति भिन्न-भिन्न है। विश्व जनसंख्या समीक्षा (World Population Review) और यूएसए डेटा हब की रिपोर्ट्स में भारत, पाकिस्तान और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों में एसिड हमलों के आंकड़े सामने आए हैं।
एसिड अटैक क्या है और इसका प्रभाव
एसिड अटैक उस आपराधिक कृत्य को कहा जाता है जिसमें किसी व्यक्ति को गंभीर रूप से घायल करने, उसे प्रताड़ित करने या विकृत करने के इरादे से उसके शरीर पर तेजाब या अन्य खतरनाक रसायन फेंका जाता है। इस प्रकार के हमलों में पीड़ित व्यक्ति का चेहरा और शरीर बुरी तरह झुलस जाता है। कई मामलों में पीड़ित की दृष्टि हमेशा के लिए जा सकती है या अत्यधिक संक्रमण व शारीरिक क्षति के कारण जान का भी खतरा बना रहता है।
यूनाइटेड किंगडम (UK) पहले स्थान पर
विश्व जनसंख्या समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, यूनाइटेड किंगडम एसिड अटैक के मामलों में वैश्विक स्तर पर पहले पायदान पर आता है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2017 में यूके में एसिड अटैक के कुल 941 मामले दर्ज किए गए थे। इसके बाद कुछ वर्षों में इन मामलों में कमी दर्ज की गई और साल 2021 में यह आंकड़ा घटकर 421 पर आ गया। हालांकि, इसके अगले ही साल यानी 2022 में इन हमलों में फिर से बढ़ोतरी हुई और आंकड़े बढ़कर 710 तक पहुंच गए।
भारत दूसरे नंबर पर, वास्तविक आंकड़े होने की आशंका ज्यादा
तेजाब हमलों के मामलों में भारत को वैश्विक स्तर पर दूसरा स्थान मिला है। विश्व जनसंख्या समीक्षा के मुताबिक, भारत में वर्ष 2018 के दौरान एसिड अटैक के 228 आधिकारिक मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि, इस रिपोर्ट में यह आशंका भी जताई गई है कि देश में होने वाले हमलों के वास्तविक आंकड़े पुलिस में दर्ज मामलों की तुलना में काफी अधिक हो सकते हैं। रिपोर्ट के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2018 में हमलों की वास्तविक संख्या 228 से लेकर 1,000 के बीच हो सकती है, जिसका मतलब है कि देश में हर साल औसतन कम से कम 614 इस तरह के हमले हो सकते हैं। इन हमलों की चपेट में आने वाले अधिकांश लोग महिलाएं और युवा लड़कियां हैं।
पाकिस्तान की स्थिति और क्षेत्रीय आंकड़े
एसिड हमलों के मामलों में पाकिस्तान का स्थान भारत के बाद आता है। विश्व जनसंख्या समीक्षा और यूएसए डेटा हब के आंकड़ों के अनुसार, पाकिस्तान में हर साल कम से कम 80 एसिड अटैक के मामले दर्ज किए जाते हैं। पाकिस्तान की एक गैर-सरकारी संस्था 'एसिड सर्वाइवर्स फाउंडेशन' द्वारा किए गए शोध से पता चलता है कि देश के दक्षिणी पंजाब क्षेत्र में इस प्रकार के आपराधिक मामलों की संख्या सबसे अधिक दर्ज की जाती है।