झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और उसकी साख पर खड़े किए गंभीर सवाल, केंद्र सरकार के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन की दी चेतावनी
झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के प्रवक्ता मनोज पांडे ने एक बार फिर देश के चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल उठाए हैं। उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि चुनाव आयोग अब एक विश्वसनीय संस्था नहीं रह गई है और जब भी उस पर किसी तरह का दबाव बनता है, वह अपने ही पुराने फैसलों से यू-टर्न ले लेती है। जेएमएम प्रवक्ता के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग के खिलाफ जब से विरोध के स्वर उठे हैं, तब से आयोग ने अपनी कार्यप्रणाली में कई बदलाव किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आयोग ने अपने ही किए गए कई कार्यों को खुद अनुचित ठहराया और फिर उनमें सुधार किया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह संवैधानिक निकाय भारी दबाव में काम कर रहा है।
मनोज पांडे ने आगे कहा कि आयोग द्वारा वर्तमान में उठाए जा रहे कदम केवल उसके द्वारा किए गए पापों को छुपाने का एक असफल प्रयास मात्र हैं। लोकतंत्र में सत्ता का परिवर्तन हमेशा चुनाव और जनता के जनादेश के जरिए होता है, जिसे सभी स्वीकार करते हैं। लेकिन यदि जनादेश के बावजूद लोकतांत्रिक तरीके से सरकार न हटे, तो जनता के पास जन आंदोलन के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं बचता है। उन्होंने कहा कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक एक व्यापक क्रांति और जन आंदोलन की आवश्यकता है, क्योंकि जनता के भारी दबाव के आगे अंततः सरकार को झुकना ही पड़ेगा और इस्तीफा देना होगा। केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार वोट चोरी के दम पर सत्ता में आई है और इस तरह के कुकृत्यों के खिलाफ लोकतांत्रिक व्यवस्था में जन दबाव सबसे महत्वपूर्ण हथियार है।
टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर फायरिंग और पश्चिम बंगाल की घटना पर तीखा हमला
बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ की गाड़ी पर हाल ही में हुई फायरिंग की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जेएमएम प्रवक्ता मनोज पांडे ने इसे सीधे तौर पर सरकार द्वारा पोषित गुंडों का कारनामा करार दिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में जिसका भी नाम सामने आ रहा है, वह जेल के अंदर बंद होने के बावजूद अपने आपराधिक सिंडिकेट और अंडरवर्ल्ड को संचालित कर रहा है। हर कोई इस बात से भली-भांति वाकिफ है कि ऐसे तत्वों को किसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष समर्थन और सहयोग प्राप्त है। यह पूरी तरह से राज्य तंत्र के संरक्षण में पल रहे अपराधियों द्वारा अंजाम दिया गया अपराध है।
इसके साथ ही, पश्चिम बंगाल के चोरबगान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना को लेकर भी उन्होंने वहां की सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने इस घटना के लिए प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह विफल बताया और इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही करार दिया। मनोज पांडे ने कहा कि वहां तैनात तमाम पुलिसकर्मी केवल वीवीआईपी सुरक्षा में व्यस्त थे, जबकि आम जनता की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मौके पर सुरक्षा और प्रबंधन का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया था।
झारखंड की व्यवस्था से सीखने की दी सलाह
पश्चिम बंगाल की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने सुझाव दिया कि अन्य राज्यों को झारखंड से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि रांची में दुर्गा पूजा के दौरान उमड़ने वाली भारी भीड़ को नियंत्रित और व्यवस्थित करने के लिए राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने जिस मुस्तैदी के साथ सुरक्षा के उपाय किए, वह सराहनीय है। उन्होंने दुर्गा पूजा को सनातन धर्म का सबसे बड़ा और पवित्र पर्व बताते हुए तंज कसा कि कुछ ढोंगी सनातनी लोग इस महान पर्व पर भी केवल राजनीति करना जानते हैं। इतने बड़े और संवेदनशील त्योहार के दौरान गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार करना सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन की प्रशासनिक विफलता को उजागर करता है।