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नेपाल आपदा पर कोटद्वार के पूर्व सैनिकों ने जताया गहरा शोक, कहा- दुख की घड़ी में भारत साथ

नेपाल आपदा पर कोटद्वार के पूर्व सैनिकों ने जताया गहरा शोक, कहा- दुख की घड़ी में भारत साथ

पड़ोसी और मित्र राष्ट्र नेपाल इन दिनों एक बेहद दर्दनाक और भीषण प्राकृतिक आपदा के दौर से गुजर रहा है। इस आपदा ने वहां भारी तबाही मचाई है, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है। इस हृदयविदारक घटना से पूरी दुनिया में शोक की लहर है, और भारत में भी इसका गहरा असर देखा जा रहा है। उत्तराखंड के कोटद्वार स्थित पूर्व सैनिक संघर्ष समिति ने इस बड़ी त्रासदी में अपनी जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है और उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि अर्पित की है।

पूर्व सैनिकों ने आपदा पर जताया गहरा दुख

उत्तराखंड के गढ़वाल क्षेत्र में स्थित कोटद्वार से पूर्व सैनिक संघर्ष समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व सैनिक महेन्द्र और उनकी पूरी कार्यकारिणी ने नेपाल में हुई इस तबाही पर गहरा शोक व्यक्त किया है। समिति की ओर से जारी किए गए आधिकारिक शोक संदेश में कहा गया है कि पड़ोसी राष्ट्र में घटी यह घटना अत्यंत पीड़ादायक है। अचानक आई इस प्राकृतिक आपदा ने न जाने कितने हंसते-खेलते परिवारों को उजाड़ दिया है।

संघर्ष समिति के सदस्यों ने उन सभी अभागों को अपनी श्रद्धांजलि दी है जो इस आपदा का शिकार होकर काल के गाल में समा गए। सैनिकों और पूर्व सैनिकों का जीवन अनुशासन, देशप्रेम और मानवता की रक्षा के लिए समर्पित होता है, इसलिए वे किसी भी देश में होने वाली मानवीय पीड़ा को बेहद गहराई से महसूस कर सकते हैं।

भारत और नेपाल के रिश्ते और आपदा का संकट

भारत और नेपाल के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि यह रोटी-बेटी और संस्कृति के अटूट धागों से बंधे हैं। जब भी नेपाल पर कोई संकट आया है, भारत ने हमेशा एक बड़े भाई और सच्चे मित्र की तरह आगे बढ़कर मदद का हाथ बढ़ाया है। मौजूदा प्राकृतिक आपदा के बाद भी दोनों देशों के बीच की आत्मीयता एक बार फिर से खुलकर सामने आ रही है।

कोटद्वार के पूर्व सैनिकों ने अपने संदेश में यह साफ कर दिया है कि इस मुश्किल वक्त में भारत का प्रत्येक नागरिक, विशेष तौर पर सेना और पूर्व सैनिकों का विशाल समुदाय, अपने नेपाली भाइयों और बहनों के साथ पूरी मजबूती के साथ खड़ा है। सीमाओं के भूगोल से परे जाकर, इंसानियत का रिश्ता सबसे ऊपर माना जाता है।

लापता लोगों के सकुशल लौटने की प्रार्थना

इस भीषण आपदा में न केवल कई लोगों की जान गई है, बल्कि बड़ी संख्या में लोग लापता भी बताए जा रहे हैं। उनके परिजन इस समय भारी मानसिक तनाव और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं। हर पल बढ़ती चिंता के बीच भगवान से यही प्रार्थना की जा रही है कि लापता लोग सुरक्षित अपने घरों तक लौट सकें।

  • दिवंगत आत्माओं की शांति: ईश्वर से प्रार्थना की गई है कि वह सभी दिवंगत आत्माओं को अपने श्री चरणों में स्थान दें।
  • शोक संतप्त परिवारों को संबल: इस अपार दुख को सहन करने के लिए प्रभावित परिवारों को मानसिक शक्ति और संबल मिले।
  • सुरक्षित वापसी: लापता हुए लोगों के सकुशल मिलने की कामना पूरे देश में की जा रही है।

मानवता की कोई सीमा नहीं होती

कुदरत के आगे इंसान हमेशा बेबस नजर आता है। जब भी बाढ़, भूस्खलन या भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाएं आती हैं, तो वे अपने पीछे केवल तबाही और आंसुओं के निशान छोड़ जाती हैं। ऐसे समय में संवेदनाओं का सागर उमड़ पड़ता है। जैसा कि कोटद्वार के पूर्व सैनिकों ने अपने संदेश में रेखांकित किया है—आपदा की कोई सीमा नहीं होती और मानवता की भी कोई सीमा नहीं होती।

आज भले ही प्रत्यक्ष रूप से नेपाल इस दर्द को झेल रहा है, लेकिन उस दर्द की कसक हिमालय की वादियों और पूरे भारतीय उपमहाद्वीप में महसूस की जा रही है। नेपाल की यह पीड़ा हम सबकी पीड़ा है, और इस संकट की घड़ी में पूरा भारत देश एकजुट होकर नेपाल के साथ खड़ा है।

राहत और बचाव कार्यों की उम्मीद

वर्तमान वर्ष 2026 में तकनीक और आपदा प्रबंधन के बेहतर साधनों के बावजूद, इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं भारी क्षति पहुंचाती हैं। नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन राहत एवं बचाव कार्यों में लगातार जुटे हुए हैं ताकि मलबे में फंसे लोगों को निकाला जा सके और घायलों को तुरंत चिकित्सीय सहायता पहुंचाई जा सके। भारत की ओर से भी लगातार हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया जा रहा है।

अंत में, 'ॐ शांति, ॐ शांति, ॐ शांति' के मंत्रोच्चार के साथ सभी दिवंगत आत्माओं को मौन रहकर श्रद्धांजलि दी गई है और यह उम्मीद जताई गई है कि नेपाल जल्द ही इस त्रासदी के काले बादलों से बाहर निकलकर फिर से एक नई सुबह की ओर बढ़ेगा।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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