झारखंड के गढ़वा जिले से एक बेहद मर्मस्पर्शी और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। आमतौर पर संतान की लंबी उम्र, आरोग्यता और सुरक्षित जीवन की मंगलकामना के लिए रखे जाने वाले महापर्व 'जितिया' (जिउतिया) के पावन अवसर पर एक मां की गोद सूनी हो गई। अपने जिगर के टुकड़े की दीर्घायु की प्रार्थना करने वाली एक मां के नसीब में इस पर्व ने ऐसा आघात लिख दिया, जिसकी टीस शायद वह जीवनभर नहीं भूल पाएगी।
पूजा की सामग्री जुटाने गया था मासूम
मिली जानकारी के अनुसार, यह हृदयविदारक घटना गढ़वा जिले के एक ग्रामीण इलाके की है। जितिया व्रत के अनुष्ठान के लिए पारंपरिक तौर पर 'कुरइन पत्ता' (पूजा में इस्तेमाल होने वाला विशेष पत्ता) और अन्य सामग्रियां जुटानी होती हैं। इसी परंपरा को पूरा करने के लिए घर का एक मासूम बच्चा पास के ही एक ग्रामीण तालाब की ओर गया था।
बच्चा अपनी मां के व्रत को निर्विघ्न पूरा कराने में मदद करने के लिए उत्साहित था, लेकिन उसे क्या पता था कि जिस तालाब के पास वह जा रहा है, वहां से उसकी सांसों की डोर हमेशा के लिए टूट जाएगी। तालाब के पास पहुंचने पर पैर फिसलने या गहरे पानी का अंदाजा न होने के कारण वह अचानक पानी में जा गिरा।
तालाब में डूबने से हुई दर्दनाक मौत
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब तक आसपास के लोग कुछ समझ पाते और बच्चे को बचाने के लिए पानी में उतरते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। पानी की गहराई अधिक होने के कारण बच्चा उसमें समा चुका था। काफी मशक्कत के बाद जब उसे बाहर निकाला गया, तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। जिस घर में व्रत और पूजा-पाठ को लेकर एक पवित्र और सनातनी माहौल बना हुआ था, वहां अचानक चीख-पुकार और मातम पसर गया। मां का रो-रोकर बुरा हाल है। वह बार-बार बस यही कह रही थी कि उसने तो भगवान से बच्चे की लंबी उम्र मांगी थी, लेकिन यह कैसी विडंबना है कि भगवान ने उसकी दुनिया ही उजाड़ दी।
गांव में पसरा सन्नाटा, पर्व की खुशियां मातम में बदलीं
इस दुखद हादसे की खबर फैलते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। जितिया व्रत जैसे पावन और महापर्व का उत्साह पलभर में आंसुओं में बदल गया। गांव के किसी भी घर में इस बार व्रत के पारंपरिक गीत या उत्सव जैसा माहौल नहीं रहा। हर आंख नम थी और हर कोई पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास कर रहा था।
सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासनिक अधिकारियों ने भी इस घटना पर गहरा दुख जताया है और पीड़ित परिवार को हरसंभव सांत्वना दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों में जल स्रोतों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में बने तालाबों, पोखरों और कुओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि खासकर त्योहारी सीजन और ग्रामीण इलाकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है। खुले और असुरक्षित जल स्रोत अक्सर इस तरह की अनहोनी का कारण बनते हैं।
- सावधानी जरूरी: त्योहारों के दौरान जब बच्चे घर के बाहर कार्यों में मदद के लिए निकलते हैं, तो परिजनों को उनके साथ रहना चाहिए।
- प्रशासनिक पहल: ग्रामीण इलाकों के तालाबों के पास बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है।
- संवेदनाएं: इस कठिन समय में पूरा समाज पीड़ित परिवार के साथ खड़ा है और इस अपूर्णीय क्षति को सहन करने की शक्ति ईश्वर से मांग रहा है।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का निजी नुकसान नहीं है, बल्कि यह हर किसी को झकझोर देने वाली एक ऐसी चेतावनी है जो हमें याद दिलाती है कि जिंदगी कितनी नाजुक है। एक मां का जितिया व्रत इस साल आंसुओं के समंदर में डूब गया, जिसे गढ़वा का यह इलाका लंबे समय तक भुला नहीं पाएगा।