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झारखंड में सियासी पारा हाई, एसआईआर के मुद्दे पर राजभवन घेरेगा झामुमो

झारखंड में सियासी पारा हाई, एसआईआर के मुद्दे पर राजभवन घेरेगा झामुमो

झारखंड की राजधानी रांची में राजनीतिक सरगर्मी एक बार फिर चरम पर है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया को लेकर उपजे विवाद के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) आक्रामक रुख अपना चुका है। पार्टी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए मंगलवार को यह ऐलान किया कि 30 सितंबर 2026 को रांची स्थित राजभवन के समक्ष एक विशाल प्रदर्शन किया जाएगा। इस राजनीतिक हलचल ने राज्य के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज कर दी है।

रांची कॉलेज मैदान से निकलेगा मार्च, राजभवन तक होगी हुंकार

झामुमो रांची जिला एवं महानगर समिति की ओर से दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, यह विरोध प्रदर्शन 30 सितंबर को दोपहर ठीक 12 बजे से शुरू होगा। प्रदर्शन की व्यापक तैयारी की गई है, जिसके तहत पार्टी कार्यकर्ता और नेता सबसे पहले रांची कॉलेज मैदान में एकत्र होंगे। इसके बाद एक आक्रोश मार्च या जुलूस के रूप में सभी कार्यकर्ता राजभवन की ओर कूच करेंगे।

इस विरोध प्रदर्शन को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें पार्टी के शीर्ष स्तर की नुमाइंदगी देखने को मिलेगी। झामुमो के रांची जिला समिति के संयोजक प्रमुख मुश्ताक आलम ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से स्पष्ट किया है कि इस कार्यक्रम में रांची जिला समिति के तमाम केंद्रीय सदस्य, जिला एवं महानगर स्तर के सभी पदाधिकारी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे। इसके अलावा, विभिन्न प्रखंडों के स्थानीय नेता, पार्टी के सांसद और विधायक भी इस आंदोलन की कमान संभालते हुए नजर आएंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त की बर्खास्तगी की उठी मांग

यह आंदोलन केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका दायरा और भी बड़ा कर दिया गया है। झामुमो की इस प्रदर्शन के पीछे मुख्य मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से बर्खास्त किए जाने की है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव आयोग के मौजूदा फैसले और कार्यशैली लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुकूल नहीं हैं और इससे आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्टी नेताओं का तर्क है कि एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) की वर्तमान प्रक्रिया में कई ऐसी खामियां हैं, जो मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित कर रही हैं। झामुमो लगातार इस बात को उठा रहा है कि इस प्रक्रिया से आम नागरिकों में असमंजस और असंतोष का माहौल बन रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

चुनावी और प्रशासनिक मोर्चे पर आमने-सामने

एक तरफ जहां क्षेत्रीय दल और सत्ताधारी गठबंधन से जुड़े संगठन चुनाव आयोग के फैसलों पर लगातार सवाल खड़े कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ निर्वाचन आयोग का पक्ष भी पूरी तरह स्पष्ट है। आयोग की ओर से पहले ही यह बात साफ कर दी गई है कि एसआईआर समेत तमाम अन्य फैसले पूरी तरह से नियमों के दायरे में रहकर और विधिवत प्रशासनिक स्तर पर लिए गए हैं। आयोग का मानना है कि मतदाता सूची को त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाने के लिए इस तरह की प्रक्रियाएं जरूरी हैं।

बावजूद इसके, राजनीतिक दलों का असंतोष कम होने का नाम नहीं ले रहा है। झामुमो का यह आगामी प्रदर्शन इस बात का गवाह है कि आने वाले दिनों में प्रशासनिक फैसलों और राजनीतिक विरोध के बीच की यह रस्साकशी और अधिक तीव्र हो सकती है।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियां

30 सितंबर को राजभवन के समक्ष होने वाले इस प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए रांची जिला प्रशासन भी पूरी तरह से सतर्क हो गया है। राजधानी के सबसे संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी जोन माने जाने वाले राजभवन के आसपास सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाने की संभावना है। पुलिस प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और शहर की यातायात व्यवस्था पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

झामुमो के इस शक्ति प्रदर्शन पर न केवल राजनीतिक पंडितों की पैनी नजर है, बल्कि राज्य के आम नागरिकों की निगाहें भी इस बात पर टिकी हैं कि इस विरोध के बाद चुनाव आयोग या केंद्र सरकार की तरफ से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। बहरहाल, 30 सितंबर का यह दिन झारखंड की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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