झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तर प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) के पेपर लीक मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अनुसंधान कर रही सीआईडी (CID) को एक के बाद एक कई अहम और पुख्ता सबूत हाथ लगे हैं, जिससे परीक्षा संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस मामले में आरोपी एजेंसी के कर्मी को तीन दिनों की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद न्यायिक हिरासत में वापस जेल भेज दिया गया है।
रिमांड अवधि के दौरान हुए कई बड़े खुलासे
जांच एजेंसी सीआईडी ने आरोपी से पूछताछ के लिए अदालत से तीन दिनों की रिमांड की मांग की थी, जिसे मंजूर कर लिया गया था। रिमांड के दौरान जांच अधिकारियों ने आरोपी से पेपर लीक के तौर-तरीकों, डिजिटल साक्ष्यों और इस सिंडिकेट में शामिल अन्य चेहरों के बारे में लंबी पूछताछ की। पूछताछ के दौरान कई ऐसे तकनीकी तथ्य सामने आए हैं जो यह साबित करते हैं कि परीक्षा के गोपनीय दस्तावेजों को सुरक्षित रखने के प्रोटोकॉल में बड़ी चूक या सुनियोजित सेंधमारी की गई थी।
सीआईडी के उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि आरोपी से मिले इनपुट के आधार पर कई अन्य संदिग्धों की भी पहचान कर ली गई है। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और गिरफ्तारियां भी संभव हैं। जांच टीम इस बात की गहराई से पड़ताल कर रही है कि आखिर प्रश्नपत्र छपाई से लेकर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने के बीच की प्रक्रिया में किस स्तर पर और किसने लापरवाही बरती या फिर मिलीभगत की।
लाखों युवाओं के भविष्य का है सवाल
झारखंड में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा का पेपर लीक होना राज्य के लाखों शिक्षित बेरोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ था। परीक्षा रद्द होने के बाद से ही युवाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। प्रतियोगी छात्र लगातार यह मांग कर रहे हैं कि इस पूरे षड्यंत्र के पीछे जो भी बड़े मास्टरमाइंड छिपे हैं, उन्हें बेनकाब किया जाए और उनके खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए।
राज्य के युवाओं की निगाहें अब पूरी तरह से सीआईडी की जांच और अदालत की कार्रवाई पर टिकी हैं। छात्रों का कहना है कि इस तरह की धांधलियों से न सिर्फ उनका कीमती वक्त बर्बाद होता है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ती है।आगे की कानूनी कार्रवाई और जांच की दिशा
- डिजिटल और तकनीकी विश्लेषण: सीआईडी जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की फॉरेंसिक जांच करवा रही है।
- आपसी मिलीभगत की टोह: एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या इस लीक में आयोग के भीतर के लोग भी शामिल थे।
- सघन छापेमारी: मिले हुए नए सबूतों के आधार पर राज्य के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी की जा सकती है।
फिलहाल, आरोपी को जेल भेजे जाने के बाद यह तय माना जा रहा है कि सीआईडी जल्द ही इस मामले में अदालत में चार्जशीट दाखिल करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। राज्य में पारदर्शिता और निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली को बहाल करने के लिए इस मामले की तह तक जाना बेहद जरूरी हो गया है।