सोनीपत के पैतृक गांव जठेड़ी में रविवार का दिन पूरी तरह से चर्चाओं के केंद्र में रहा। भारी भरकम पुलिस सुरक्षा और कड़े पहरे के बीच कुख्यात गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी अपने गांव पहुंचा। मौका था उसकी जुड़वां बेटियों के नामकरण और उससे जुड़ी धार्मिक रस्मों का। दिल्ली की द्वारका जिला अदालत से मिले विशेष आदेश के बाद उसे यह कस्टडी पैरोल दी गई थी, जिसके तहत वह तय समय सीमा के भीतर अपने परिवार के बीच मौजूद रहा।
सात घंटे की कड़ी सुरक्षा में पैतृक गांव पहुंचा गैंगस्टर
अदालत के निर्देशों के अनुसार, काला जठेड़ी को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक यानी कुल सात घंटे के लिए पुलिस हिरासत में उसके गांव में रहने की अनुमति मिली थी। सुरक्षा व्यवस्था इतनी चाक-चौबंद थी कि गांव छावनी में तब्दील नजर आ रहा था। चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। जब पुलिस का काफिला और वाहन गांव में पहुंचा, तो वाहन से उतरते ही संदीप ने हाथ हिलाकर वहां मौजूद लोगों का अभिवादन किया। हालांकि इस दौरान आम जनता और मीडिया से दूरी बनाए रखी गई।
परिवार के सदस्यों ने उसका स्वागत पारंपरिक तरीके से ढोल-नगाड़ों के साथ किया। अपनी बेटियों के जन्म के लगभग तीन महीने बाद संदीप को यह मौका मिला जब वह उनके नामकरण संस्कार, हवन-यज्ञ और अन्य पारिवारिक रस्मों में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हो सका।
जून के अंत में हुआ था जुड़वां बेटियों का जन्म
गैंगस्टर काला जठेड़ी की पत्नी अनुराधा चौधरी ने इसी साल जून के अंत में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था। बेटियों के जन्म के वक्त भी अदालत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए उसे चार घंटे की कस्टडी पैरोल दी थी, जिसके जरिए वह अस्पताल या तय स्थान पर अपनी पत्नी और नवजात बच्चियों से मिलने गया था। इस बार बेटियों के नामकरण और धार्मिक अनुष्ठान के लिए द्वारका अदालत ने सात घंटे की लंबी अवधि मंजूर की।
प्रशासनिक नियमों के मुताबिक, इस पूरी कस्टडी पैरोल के दौरान उसका आवागमन, सुरक्षा और तमाम गतिविधियां पूरी तरह से पुलिस की कड़ी निगरानी में रहीं। इतना ही नहीं, अदालत के स्पष्ट निर्देश थे कि इस पैरोल के दौरान आने वाला सारा प्रशासनिक और पुलिस सुरक्षा का खर्च संबंधित परिवार या पक्ष द्वारा ही उठाया जाएगा।
मार्च में हुई थी शादी, फिर चर्चा में आया था मामला
संदीप काला जठेड़ी और अनुराधा चौधरी का विवाह इसी साल मार्च महीने में दिल्ली में संपन्न हुआ था। उस हाई-प्रोफाइल शादी के दौरान भी भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और वह मामला भी देश भर की सुर्खियों में छाया रहा था। कानून की गिरफ्त में होने के बावजूद पारिवारिक और सामाजिक आयोजनों में इस तरह की पैरोल मिलना हमेशा से कानूनी गलियारों और आम जनता के बीच चर्चा का विषय बनता रहा है।
गंभीर अपराधों की लंबी फेरिस्ता
कानून की नजर में संदीप काला जठेड़ी एक बेहद खतरनाक और वांक्षित अपराधी रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, उसके खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में हत्या, हत्या के प्रयास, रंगदारी, फिरौती और जबरन वसूली जैसे 30 से अधिक संगीन आपराधिक मामले दर्ज हैं। कानून के शिकंजे में कसने के बाद उसे 30 जुलाई 2021 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर से एक बड़े ऑपरेशन के तहत गिरफ्तार किया गया था। तब से लेकर अब तक वह सलाखों के पीछे ही अपनी जिंदगी काट रहा है और विभिन्न मुकदमों की सुनवाई अदालतों में जारी है।
एक तरफ जहां कानून अपने सख्त प्रावधानों के तहत अपराध और अपराधियों से सख्ती से निपट रहा है, वहीं दूसरी तरफ मानवीय आधार पर अदालतों द्वारा दिए जाने वाले ऐसे आदेश न्यायिक प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा हैं। सात घंटे की इस短暂 आजादी के बाद काला जठेड़ी को वापस कस्टडी में ले लिया गया और उसे निर्धारित समय पर दोबारा जेल भेज दिया गया, लेकिन गांव में हुई इस हलचल ने एक बार फिर से इस हाई-प्रोफाइल गैंगस्टर को सुर्खियों में ला दिया है।