उत्तराखंड में आपदा से निपटने की नई तैयारी, हर जिले में बनेंगे मास्टर ट्रेनर
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उत्तराखंड में आपदा से निपटने की नई तैयारी, हर जिले में बनेंगे मास्टर ट्रेनर

उत्तराखंड में आपदा से निपटने की नई तैयारी, हर जिले में बनेंगे मास्टर ट्रेनर

हिमालय की गोद में बसा उत्तराखंड अपनी खूबसूरती के साथ-साथ प्राकृतिक आपदाओं की दृष्टि से भी बेहद संवेदनशील क्षेत्र है। राज्य में भूकंप, भूस्खलन, बाढ़, अतिवृष्टि, बादल फटना, हिमस्खलन और वनाग्नि जैसी आपदाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। इन तमाम प्राकृतिक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और राज्य के आपदा प्रबंधन तंत्र को जमीनी स्तर पर और अधिक मजबूत करने के लिए अब एक बेहद ठोस कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) के सहयोग से उत्तराखंड में प्रशिक्षण और क्षमता विकास कार्यक्रमों का दायरा व्यापक स्तर पर बढ़ाया जा रहा है।

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कार्यकारी निदेशक का दौरा और अहम बैठक

हाल ही में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान के कार्यकारी निदेशक एवं वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मधूप व्यास ने उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) का महत्वपूर्ण दौरा किया। इस दौरान उन्होंने राज्य के शीर्ष अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक की, जिसमें आपदा से जुड़ी पूर्व तैयारियों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और आगामी वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि केवल आपदा आने के बाद राहत कार्यों पर निर्भर रहने के बजाय, आपदा से पहले की तैयारियों को अचूक बनाया जाना चाहिए।

उत्तराखंड के सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने इस दौरान यूएसडीएमए की अब तक की गतिविधियों और भविष्य की रणनीतियों का विस्तृत ब्योरा सामने रखा। बैठक में यह तय किया गया कि विभिन्न विभागों के कर्मचारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय स्तर पर काम करने वाले कार्मिकों को खोज एवं बचाव (Search and Rescue), आपातकालीन प्रतिक्रिया (Emergency Response) और आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Disaster Risk Reduction) का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि संकट के समय किसी भी तरह की देरी न हो।

प्रथम चरण में हर जिले को मिलेंगे 10 मास्टर ट्रेनर

आपदा प्रबंधन की इस नई और महत्वाकांक्षी योजना के तहत प्रथम चरण में उत्तराखंड के प्रत्येक जिले में 10-10 विशेष रूप से प्रशिक्षित मास्टर ट्रेनर तैयार किए जाएंगे। इन मास्टर ट्रेनरों को आपदा प्रबंधन के सभी तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। ये मास्टर ट्रेनर अपने-अपने गृह जिलों में लौटकर स्थानीय विभागों के कार्मिकों, स्वयंसेवकों और अन्य हितधारकों को प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी संभालेंगे।

जिला स्तर के अलावा राज्य स्तर पर भी मास्टर ट्रेनरों का एक मजबूत और दक्ष समूह तैयार किया जा रहा है। यह राज्य स्तरीय समूह न केवल संपूर्ण प्रदेश में प्रशिक्षण गतिविधियों को एक सही दिशा देगा, बल्कि जिला स्तर के मास्टर ट्रेनरों के मार्गदर्शन और उनकी क्षमताओं को मांजने का काम भी करेगा। इस विकेंद्रीकृत प्रणाली से यह सुनिश्चित होगा कि सुदूर पर्वतीय क्षेत्रों के गांवों तक आपदा प्रबंधन की जानकारी और कौशल आसानी से पहुंच सके।

प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न विभागों के लिए विशेष पाठ्यक्रम

इस पूरी कार्ययोजना की खूबी यह है कि इसमें शासन के शीर्ष स्तर से लेकर मैदानी अमले तक को शामिल किया गया है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और प्रांतीय सिविल सेवा (PCS) के अधिकारियों के लिए भी आपदा प्रबंधन से जुड़े विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल तैयार किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, अलग-अलग सरकारी विभागों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को उनकी कार्यशैली और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के अनुरूप प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि किसी भी आपदा के दौरान सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ एक टीम के रूप में काम कर सकें।

"उत्तराखंड भौगोलिक और प्राकृतिक दृष्टि से एक संवेदनशील राज्य है। यहां आपदा के दौरान त्वरित प्रतिक्रिया के साथ-साथ आपदा से पहले की तैयारी को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए नियमित प्रशिक्षण और क्षमता विकास की गतिविधियां लगातार जारी रहनी चाहिए।" — मधूप व्यास, कार्यकारी निदेशक, NIDM

सिर्फ किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि मॉक ड्रिल और व्यावहारिक अभ्यास पर जोर

बैठक में इस बात पर गंभीर मंथन हुआ कि आपदा प्रबंधन केवल कागजी बैठकों या थ्योरी तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसे प्रभावी बनाने के लिए अभ्यास, मॉक ड्रिल और व्यावहारिक गतिविधियों को दैनिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। लगातार अभ्यास करने से प्रशिक्षित कर्मियों की मांसपेशियां और मानसिक स्थिति संकट के समय तुरंत और सही निर्णय लेने के लिए तैयार रहती हैं।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने स्पष्ट किया कि यूएसडीएमए द्वारा तैयार किए जा रहे ये प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरी तरह से स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और विभागवार जोखिमों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी प्रशिक्षित और मुस्तैद मानवशक्ति तैयार करना है जो आपदा पूर्व की तैयारी से लेकर आपदा के दौरान त्वरित राहत और बाद में पुनर्बहाली के कार्यों को चुस्ती के साथ अंजाम दे सके।

बैठक में मौजूद रहे प्रमुख अधिकारी

इस उच्च स्तरीय मंथन के दौरान आपदा प्रबंधन और सुरक्षा तंत्र से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी प्रमुख रूप से उपस्थित रहे। इनमें एसीईओ प्रशासन प्रकाश चंद्र, एसीईओ क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, एसडीआरएफ के डिप्टी कमांडेंट शुभांक रतूड़ी, डॉ. पीडी माथुर और मोहित पूनिया सहित कई अन्य अधिकारी शामिल थे। इन सभी अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों के अनुभवों को साझा करते हुए प्रशिक्षण कैलेंडर को अंतिम रूप देने में अहम सुझाव दिए।

उत्तराखंड सरकार और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान का यह संयुक्त कदम आने वाले समय में राज्य के सुरक्षा ढांचे को एक नई मजबूती देगा। पर्वतीय इलाकों में अक्सर आने वाली प्राकृतिक आपदाओं के बीच इस तरह की पुख्ता तैयारी जनजीवन की रक्षा करने में सबसे बड़ा कवच साबित होगी।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

Writer (स्थानीय खबरें)

रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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